Dr. umesh chandra srivastava

लखनऊ उ. प्र.

Joined July 2016

Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India

Books:
अश्रुनाद मुक्तक संग्रह ( हिन्दी )

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अश्रुनाद नवम सर्ग ' अध्यात्म ' एवं दसम् सर्ग ' विविध '

अश्रुनाद जीवन में सुख - दुःख सहती चेतना हृदय में रहती चञ्चलता सतत जगत की सरिता ... Read more

अश्रुनाद अष्ठम सर्ग ' प्रारब्ध '

अश्रुनाद .... अष्टम सर्ग .... ........ प्रारब्ध ........ मरुस्थल जीवन गहराता जो लिखता वह मिट... Read more

अश्रुनाद मुक्तक संग्रह , वेदना

...... अश्रुनाद मुक्तक संग्रह ...... .... सप्तम सर्ग .... ..... वेदना ..... अनबूझ नियति ने खेली जीवन ... Read more

अनुरागी माँ

. ।। अनुरागी माँ ।। संसार- सरित में जब भटका , ममता नौका लेकर आई । जब भँवर बनी जीवन- धारा , म... Read more

अश्रुनाद मुक्तक संग्रह षष्ठम सर्ग श्रृंगार

...... अश्रुनाद मुक्तक संग्रह ...... ...... षष्टम सर्ग ...... ...... श्रृंगार ..... मन मोहन रूप सजा... Read more

अश्रुनाद मुक्तक संग्रह पञ्चम सर्ग "हृदय"

.... अश्रुनाद मुक्तक संग्रह .... .... पञ्चम सर्ग .... .... हृदय .... युग - युग से साथ घनेरे सुख - ... Read more

अश्रुनाद मुक्तक संग्रह चतुर्थ सर्ग

...... अश्रुनाद मुक्तक संग्रह ...... ........चतुर्थ सर्ग ....... .......... नीरद .......... घनघोर घटा घिर ... Read more

अश्रुनाद मुक्तक संग्रह चतुर्थ सर्ग

...... अश्रुनाद मुक्तक संग्रह ...... ........चतुर्थ सर्ग ....... .......... नीरद .......... घनघोर घटा घिर ... Read more

अश्रुनाद ... प्रकृति

..... अश्रुनाद मुक्तक संग्रह ... . .... द्वितीय सर्ग .... ...... प्रकृति ..... नीरवता में गुञ्जात... Read more

अश्रुनाद ... रत्नाकर

.... अश्रुनाद मुक्तक संग्रह .... ..... त्रृतीय सर्ग ..... .... रत्नाकर .... उर उदधि- उर्मि लहराती किस... Read more

अश्रुनाद ... नयनाम्बुक

... अश्रुनाद मुक्तक संग्रह ... . ........प्रथम सर्ग ...... .... नयनाम्बु .... लघु बूँदें ले मतवाला ... Read more

व्यंग्य - पत्नी पीड़ित

. .... व्यंग्य .... .... पत्नी - पीड़ित .... पत्नी पीड़ित ऐ ! भद्र जनों , मेरी सलाह सुनते जाओ । ससु... Read more

चिर पुरातन प्रेम

.... गीत ..... चिर- पुरातन प्रेम की नित बह रही नव धवल धारा थिर धरातल सुखद संगम रूप सुन्दरतम् तुम्हारा ... Read more

मधुर - मधुर मन्द - मन्द

..... त्रिपद छन्द ..... ( ठुमक चलत रामचन्द्र ) से प्रेरित मधुर- मधुर मन्द- मन्द , मोहन मुस्कायें मोर मुकुट तिलक भाल वैज्यन्ती... Read more

सघन जलधर

.. .... गीत .... देखकर फिर सघन जलधर , विकल बरसे नयन झर- झर । वेदना के गीत की यह , मधुर ... Read more

.... पद ....

...... पद .... भगवन ! कैसे दर्शन पाऊँ ? तीरथ चारो धाम गया मैं , सागर गंग नहाऊँ । अर्पण तर्पण पूर्ण समर्पण , कण्ठी कण्ठ सजाऊँ ।... Read more

... पद ..।

. ..... पद .... भगवन ! क्यों नहिं दर्शन पाऊँ ? योग मन्त्र श्रुति ग्रन्थ न जानू , कैसे तुमको ध्याऊँ ? श्री ! पद उन्मुख... Read more

अनुरागी माँ

. ।। अनुरागी माँ ।। संसार- सरित में जब भटका , ममता नौका लेकर आई । जब भँवर बनी जीवन- धारा , म... Read more

गीत .. राष्ट्र वन्दना

राष्ट्र- वंदना ( गीत ) हे ! वंदनीया हे ! वत्सलाय नमामि भारत वसुंधराय प्रसून पुष्पित सुवास मलयज ... Read more

श्री कृष्ण वन्दना

.......श्री कृष्ण वन्दना.... यदु- नन्द नन्दन देवकी- वसुदेव नन्दन वन्दनम् । मृदु चपल नयनम् चंचलम् मनमोहनम् अभिनन्दनम् ।... Read more

व्यंग्य - कवि होता

..... व्यंग्य ..... किन्चित यदि मैं भी तुम जैसा , पोइट शायर या कवि होता । हिन्दी इंग्लिश उर्दू मिश्रित शब्दों से अभिनव कवि होता ... Read more

हे ! पार्थ

.... ..गीत.. हे ! पार्थ सुनो परिचय मेरा हम में तुम में अणु कण में मैं सर्वत्र सदा आभिनय मेरा ... Read more

साहस अभाव

. .... गीत .... " साहस अभाव " साहस अभाव में सुजनों के दुष्टों का साहस पलता है ... Read more

गीत - धरती पुलकित

. .... गीत .... धरती पुलकित हो उठे आज जन- जन का दुख हरना होगा इस कर्म- भूमि में असुरों से फिर... Read more

अनुज व्यथा

.... जीवन की दुखद अनुभूति .... ॥ अनुज-व्यथा ॥ कुछ कही अनकही बात कुछ भी नहीं किन्तु सुलझी नहीं बस उलझती रही ... Read more

अश्रुनाद

. .... मुक्तक .... भर मदिर नयन पुलकाती इठलाती सी बलखाती फिर मेरे हृदयाँ... Read more

अश्रुनाद

. .... मुक्तक .... हिय असह्य वेदना छाये आघात परिधि फैलाये मेरी आहत प्रतिध्वनि भ... Read more

चिर पुरातन प्रेम

।। .... गीत ..... चिर- पुरातन प्रेम की नित बह रही नव धवल धारा थिर धरातल सुखद संगम रूप सुन्दरतम् तुम्हारा ... Read more

अश्रुनाद

. .... मुक्तक .... रवि की किरणो से पा ली अनुपम प्रभात की लाली भर स्वर्गंगा से अञ्जुलि अन... Read more

गीत .. राष्ट्र वन्दना

समस्त भारतवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं राष्ट्र- वंदना ( गीत ) हे ! वंदनीया हे ! वत्सलाय नमामि भार... Read more

गीत .. राष्ट्र वन्दना

समस्त भारतवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं राष्ट्र- वंदना ( गीत ) हे ! वंदनीया हे ! वत्सलाय नमामि भार... Read more

अश्रुनाद

. .... मुक्तक .... अनुपम आह्लादित घेरा तुममें संचित है मेरा अंतर्मन में जो चित्रित ... Read more

अश्रुनाद

. .... मुक्तक .... भव- सिन्धु प्रलापित फेरे लहरें सुनामि बन घेरे भू- गर्भ प्रकम्पित ... Read more

मुक्तक

. .... मुक्तक .... तिमिराञ्चल में शालायें कल्पित शशि कलित कलायें तम के छल में ख... Read more

गीत

. .... गीत ..... चिर- पुरातन प्रेम की नित बह रही नव धवल धारा थिर धरातल सुखद संगम रूप सुन्दरतम् तुम्हारा ... Read more

अश्रु- नाद

...... मुक्तक ..... ... अनबूझ नियति ने खेली जीवन की दुखद पहेली हे! विकल वेदने मेरी ... Read more

अश्रु- नाद

, .... मुक्तक .... जीवन सतरंगी फेरे झंझा- झँकोर घन घेरे हो हा- हा कार हृदय में ... Read more

गीत ...

.... जीवन की दुखद अनुभूति .... ॥ अनुज-व्यथा ॥ कुछ कही अनकही बात कुछ भी नहीं किन्तु सुलझी नहीं बस उलझती रही ... Read more

.... श्री कृष्ण वंदना ...

...... श्री कृष्ण वन्दना.... यदु- नन्द नन्दन देवकी- वसुदेव नन्दन वन्दनम् । मृदु चपल नयननम् चंचलम् मनमोहनम् अभिनन्दनम... Read more

..... गीता ...

.... ..गीत.. हे ! पार्थ सुनो परिचय मेरा हम में तुम में अणु कण में मैं सर्वत्र सदा आभिनय मेरा ... Read more

...... गीत ....

.. .... गीत .... देखकर फिर सघन जलधर , विकल बरसे नयन झर- झर । वेदना के गीत की यह , मधुर ... Read more

.... पद ... भगवन ! कैसे दर्शन पाऊँ ?

...... पद .... भगवन ! कैसे दर्शन पाऊँ ? तीरथ चारो धाम गया मैं , सागर गंग नहाऊँ । अर्पण तर्पण पूर्ण समर्पण , कण्ठी कर सरकाऊँ । ... Read more

हे! पार्थ सुनो परिचय मेरा ।

हे ! पार्थ सुनो परिचय मेरा । हम में तुम में कण- कण में मैं सर्वत्र सदा अभिनय मेरा ।। फूलों कलियों काँटो में मैं... Read more

पत्नी पीड़ित ऐ! भद्र जनों

पत्नी पीड़ित ऐ ! भद्र जनों मेरी सलाह को अपनाओ यदि जीवन सुखद बनाना है यदि घर में स्वर्ग बसाना है यदि पत्नी-सुख को प... Read more

श्री कृष्ण वन्दना ....

यदु-नन्द नन्दन देवकी-वसुदेव नन्दन वन्दनम् । मृदु चपल नयनं चंचलं मन मोहनं अभिनन्दनम् ।। मस्तक मुकुट पर-मोर कर मुरली मधुर धर मंगलम् ... Read more

राष्ट्र - वन्दना

हे!वन्दनीया हे!वत्सलाय नमामि भारत वसुन्धराय प्रसून पुष्पित सुवास मलयज हिलोर सागर सुदर्शनाय अगम्य गगनम् सुरम्य सरिता... Read more

देख कर फिर सघन जलधर

देखकर फिर सघन जलधर विकल बरसे नयन झर-झृर सूखते से पादपों ने मौन रहकर सब सहा है अधखिली कलियों प्रतिपल ... Read more

.... पद ...2

भगवन ! कैसे दर्शन पाऊँ ? तीरथ चारो धाम गया जा , सागर गंग नहाऊँ । अर्पण तर्पण पूर्ण समर्पण , कंठी कर सरकाऊँ । उपक्रम पूजन षटकर्मो... Read more

मधुर-मधुर मन्द-मन्द

मधुर-मधुर मन्द-मन्द , मोहन मुस्काये मोर मुकुट तिलक भाल वैज्यंती कण्ठ माल नूपुर की ध्वनि रसाल, छम-छम थिर धायें चपल नयन ... Read more

......साहस अभाव.....

साहस अभाव में सुजनों के , दुष्टों का साहस पलता है । हों असुर अधर्मी धरनी पर , उनका दुःशासन छलता है ।। आदर्श धर्म में बिंधकर... Read more