DrMishr Sahaj

Joined December 2016

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ग़ज़ल

मात्रा भार =7 000 सुनहरे पल. न जाएं टल. अब की अभी, अभी नहिं कल. आलस झटक, काम पर चल. बदला समय, इसी संग ढल. बीते बरस, भूल व... Read more

पावस गीत :

वाह बदरवा हरसाए हैं 000000000000000000000000 वाह बदरवा हरसाए हैं । खुशियों की बरखा लाए हैं ।। रिमझिम -रिमझिम पड़ें फुहारें। चारो... Read more

ग़ज़ल

वाह क्या गीत है। बिन लड़े जीत है। क्या रखा झगड़ों में, प्यार संगीत है। जीवन में मित्र तो, जीवन ही प्रीत है। वर्तमान हाथ में,... Read more

गीतिका

गीतिका मात्रा भार-१० ००० कष्ट गलता नहीं. ग़म पिघलता नहीं. जुल्म के झुण्ड में. कर्म फलता नहीं. संगदिल आँख से, नीर बहता नहीं... Read more

मुक्तक:

आंधियों में उड़ गया था, आज वापस आ गाया हूं. साख से बिछडा हुआ था, साख वापस पा गया हूँ. बहुत दिन से था परेशां, पर नहीं भटका कहीं भी,... Read more

गीतिका

होश में आकर के मुझसे बात कर। फितरत समझता हूँ न भीतर घात कर। जिंदगी मानव की इक उपहार है, असलियत से अब तो मुलाक़ात कर.’... Read more

प्रश्न

प्रश्न रोटी -दाल का जान - माल का हक-हुकूक का तहज़ीब -सुलूक का आपसी व्यवहार का आज-कल-वर्षों का सदियों से अब तक टल रहे हैं टाल... Read more

'सहज के दोहे

अन्दर से बेशक हुआ, बिखरा - चकनाचूर. चेहरे पर कम ना हुआ,पर पहला सा नूर. 'सहज' प्रेम से वास्ता,नफरत का क्या काम. यहीं धरा रह... Read more

'सहज' के दोहे

जीवन है अनमोल यह, इसको नहीं बिगाड़. यह है दुर्लभ से मिला,समझ नहीं खिलवाड़. सोच सार्थक हो सदा,दिन कैसे भी होयँ. निश्चित काट... Read more

एक दोहा

अन्दर से बेशक हुआ,बिखरा- चकनाचूर. चेहरे पर कम ना हुआ,पर पहला सा नूर. @डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज Read more

बातें !सभी कर लेते हैं

छंद मुक्त रचना 000 बातें सभी कर लेते हैं बातों का असर सिर्फ तब होता है जब तदनुसार कर्म भी दिखते हैं. बातें याद नहीं रखत... Read more

एक ग़ज़ल के चन्द अस्सार

आजाद है वतन सही, आजाद हम नहीं। खाई गरीब -अमीर की, अब भी खतम नहीं। हमने संजोए थे कभी, ख... Read more

गीतिका

मापनी:2122 2222 2222 2 --------------------------- आज कल ख़ुद से मैं, नाराज रहा करता हूँ। शान्त रह दिल से, दिल की बात कहा करत... Read more

शब्द युग्म मुक्तक

मुक्तक शब्द युग्म-चमक/दमक मुक्तक 000 कहाँ लगे है चमक-दमक, तुम खुद ही हो उससे ज्यादा. नहीं सुहाती खनक-छनक, तुम खुद ही हो उ... Read more

जनक छंद में तेवरी

तेवरी काव्य जनक छंद में तेवरी –एक कोशिश ००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००० छंद विधान: मापनी: हर प्रथम पंक्ति में ... Read more