Mahender Singh

महादेव क्लीनिक, मानेसर 122051

Joined August 2017

स्नातक(आयुर्वेदाचार्य) विधा:- कविता, हास्य- व्यंग्य, शेर,गजल, कहानी,मुक्तक,लेख,

Books:
जीवन एक अभिव्यक्ति
Jivan ek Abhivyakti

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स्वतंत्र है फितरती सफ़र

धार्मिकता एक तर्ज, भूल गये सब *फर्ज, खुद पर ही चढे कर्ज, खोजते रहे अब मर्ज, पैदा करने होंगे *तर्क. बहुत होगा इनसे फर्क, झड ज... Read more

अमावस्या और पूर्णिमा

एक खगोलीय घटना अमावस्या/पूर्णिमा/सूर्य-ग्रहण/चंद्र-ग्रहण विचारक/दार्शनिक व्यक्तित्व की देन, धर्म/धार्मिक/अंधभक्त कल भी/ आज भी वंच... Read more

मन और अनुबंध

मनुष्य एक मात्र विचारवान/ निर्णय-सम्मत/कल्पनाशील/याद्दाश्त/बुद्धिजीवी प्राणी है. ये सबमें व्यक्तिगत तौर से किसी मनुष्य में इक्ट्ठ... Read more

प्रेम जीवनाधार

प्रेम कहानी बनता है प्रेम परमात्मा का द्वार. प्रेम इक परम उपहार. प्रेम फितरत से निपजे, जाने कोई जाननहार. प्रेम होता है यह आ... Read more

कैसा इत्तेफाक

आजकल के नंदलाल बेरा नहीं किस भांति/ गडती नाल, थोथे बजावे गाल, खाणनै चाहिए माल़, आँखया मह नहीं लाज. औरां कै बाँधे ताज, बाह... Read more

व्यवाहरिक छलावा और गुलाम भारत.

एक *व्यवहार एक *वाद और एक ही *विवाद एक *जरूरत एक *आदत और एक ही *फसाद धर्म और उसके उत्पाद. -----////--//-/-------//-- इन सबसे जन... Read more

छद्म राष्ट्रवाद

देखकर तुम्ही से सिखा, सवाल पूछना गुनाह है ! पूछने जो चाहे पूछ लो, देशद्रोही से *दाग होंगे, राष्ट्रवाद में *फरमान है. अभिव्य... Read more

व्यवस्था और लोकतांत्रिक सुविधाएं

व्यवस्था कई भांति की होती है. एक सार्वजनिक व्यवस्था जिसका संबंध सीधे प्रकृति और अस्तित्व से है उससे इंसान केवल सगज रहकर आपदाओं से ... Read more

व्यवस्था और जनप्रतिनिधि

लघुकथा ******* आज सुबह करीब 9 बजे बेटे हर्ष को लेने. जिसने मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया था. हुड्डा ग्राउंड जाना हुआ, वहीं पर एक ... Read more

आदत

बदली है ये तो बदलेगी, न बदली तो, तुम्हें बदलेगी, दावाग्नि है ये, नहीं बुझी तो, हम सबको, बदलेगी, बदली है ये तो, बदलेगी. ... Read more

कुछ सवाल

क्या एक अच्छा वक्ता ? अच्छा शासक हो सकता है. क्या नींव भरने के बाद ? मकान के डिजाइन में संभावनाएं बचती हैं ? क्या धर्म/मजहब... Read more

राष्ट्रवाद और भेष

कितनी अच्छी लगती है राष्ट्रवाद की बातें ....आ..हा.. मैं तो कहता हूँ ..हो सिर्फ़ देशहित की बातें हो सिर्फ़ गौदान की बातें, क्य... Read more

बिन जीव सब कंकाल

ये आस्था/विश्वास/ये ट्रेंडिंग जिस इंसान को खुद ईश्वर ने पैदा किया, उसी इंसान ने मतलबी भगवान. जो देख नहीं सकता उसे आँखें, जो द... Read more

झाडफूंक और चिकित्सा

भारत विभिन्नताओं का देश है. यह परिवेश हर क्षेत्र में झलकता है. चिकित्सा के क्षेत्र में ईलाज में भी. ईलाज से पहले बीमारी का उद्गम/... Read more

राष्ट्रवाद या देशद्रोह

जला करते थे जो दीपक इन हवाओं में खिलते है जो फूल इन फिज़ाओं में दरकिनार है आज तूफानों की परवाह किसे इनकी मूल जड़ें बहुत ... Read more

परिपक्वता

पापा के दोस्त और बेटे के दोस्त, एक लघुकथा जो परिपक्वता पर आधारित, एक रात मैंने अपने बेटे गौरव को शिक्षार्थ नींद से जगाया, और एक... Read more

प्रकृति राष्ट्रवाद से अनभिज्ञ

लघुकथा :- ******* वह देश के साथ बिलकुल नहीं था, एक बार के विद्रोह ने ही पोल खोल दी वह तिलमिला गया, उसने अब जो भी प्रस्तुतियां द... Read more

मेरा भारत महान

धातु धातु होती है द्रव गैस गैस द्रव पानी पानी है सभी द्रव्य नीचे धरातल ऊपर आकाश, लहू लहूलुहान हुआ, बताओ अब इनकी जाति ज... Read more

कवाब पर हड्डी

माना की बहरे हो पर अन्धे भी हो ये तुमने सिद्ध कर दिया, अब दिमाग कोई मायने नहीं रखता, जो मन आये वो करो ऐसा भी हरगिज़ नहीं होग... Read more

रहस्य बेनकाब

मत दे *जवाब भले चुप रह, तेरा *आगाज़ तो बता दिखा, कैसे है तू सरताज़ बना हुआ, काबिल तू नहीं न ही काबिज, हरेक लेता तेरा नाम क्यों भला... Read more

जरूरत @लघुकथा

एक दिन रास्ते से गुजरते हुए बस यूं ही देखते हुए गुजर रहा था जिन लोगों ने कूड़ा समझकर डाल दिया था, कुछ लोग उसे इकट्ठा कर रहे थे, य... Read more

उतावला बहुमत

सरकार के उतावलापन या पूर्ण बहुमत के फैसले 👇 ( उदाहरण नंबर 1 ) वैद्य जी बहुत बार मरीज आकर आपसे पूछते है. मुझे नहीं मालूम मुझे क... Read more

नजरिये नजरअंदाज नहीं होते

वो शासक ही क्या ? जिससे प्रजा नाराज न हो ? उठे विरोध और भी ज्यादा ? जो लगे काम हुये ! और भी ज्यादा ! जो माँगे रोटी दिखाक... Read more

भारतीय लोकतंत्र प्रथम

कुछ तो है मेरे देश समाज में, जो इतने हैं खफ़ा खफ़ा, सबकुछ एक है जैसा, फिर भी सबकुछ जुदा जुदा. गर अतीत में है जहर , क्या मिटाना अस... Read more

जाग रे जोगिया @गीत

रंग रे जोगिया रंग ले तन नहीं मन नहीं रंग रे जोगिया हटे पसंद खुले नींद उठ जाग रे हटे रंग समझ बदरंग प्रेम संग पैदा हो प्... Read more

भोग भी एक रोग

भोग बना रोग नहीं ये संयोग, मर्ज खरा स्पष्ट, डरते रहे लोग. . अंधकार गहरे दिन नहीं स्पष्ट बाहर है तमस् शयन के उत्सुक . भूल ग... Read more

खोई हुई संपदा @लघुकथा

एक हास्यव्यंग सबने सुना होगा, हँसी किसी को नहीं आई, एक आदमी का एक सिक्का रेत मे गिर गया, अंधेरा था, बड़ी मुश्किल हो गई, वह छलनी ... Read more

बिना नींव वा छत के स्मार्ट सिटी @लघुकथा

कन्हैया ने पीएचडी. पास किया. वह दिशा निर्देशक बनना चाहता है, उससे पहले एक नारे ने उसे दिशा दे दी, सबकुछ जैसे उसकी इच्छा के खिलाफ ... Read more

सफ़ेद बकरी वो भी तीन थन वाली @हास्यव्यंग व कहानी

मेरी कहानी में पात्रा नहीं पात्र है नरेन्द्रा उसे एक तीन थन वाली सफ़ेद बकरी मिल गई. अब क्या था. उसने एक तडीपार को अपनी योजना समझा... Read more

जीवन ही है सृजन में मूल

जीवन ही है सृजन में मूल खिलते है धरा पर इसके फूल, हर खूशबू तुझसे इत्र तो भौतिक आयोजन तू है तो जिंदा हंस मेरा नीर क्षीर ... Read more

जिसने कष्ट सहे केवल वे जन्मे

जग बदला हाँ बदला नीर क्षीर बदला हाँ हो चुका गदला पहले हिचकी याद थी अब एक बीमारी ढ़कोसलों की सूची में एक कमला एक गमला ... Read more

दोहन करो

मटक मटक के गया भटक रही न रतिभर चटक, रचे रचाये खूब संवाग, कौन सुध जब गया अटक. . कहते तेरा तुझको अर्पण मालूम नहीं विध समर्पण दे... Read more

सिलसलेवार सिलसिले

कुछ सिलसिले सिलसलेवार चले रुक न सके कम नहीं हुये खत्म होते भी तो कैसे हो गये हम इतने पढ़े लिखे. अनपढों ने खिंचा जिसे उस आस... Read more

बेटियाँ और छद्म राष्ट्रवाद

हिरण गाय शेर भगेरे चीते से भी कम आकी गई मेरी लाडो. ये छद्म राष्ट्रवाद है तू राष्ट्रवाद से बाहर है कहाँ छुपाते उन्हें कैसे... Read more

जिंदगी और पहल

नृत्य प्रकृति करती है अस्तित्व मेरा द्रष्टा हर संयोग उससे जुड़े हुआ, कोई रोता है कोई हँसता, तरंगों का खेल है, सर्प नहीं देखता... Read more

हास्यव्यंग

याद आती है वो मगर खुद आती नहीं हिचकी आती है भूल पड़ती नहीं नाम लेती है वो नाक बहती है याद उसकी छींकें बढ़ाती है कभी ठण्... Read more

अबला और शास्त्र

हिरण गाय शेर भगेरे चीते से भी कम आकी गई मेरी लाडो. कहाँ छुपाते उन्हें कैसे लतियाते मिल बैठकर आज बतियाते सोमरस सुरापान प... Read more

धोखे और सलीके

आज समाज आहत ! धोखे से नहीं ! सलीके से आहत है ! चिंता है राम घनश्याम री, ✍️ कथा गाथा पकडे माथा प्रकृति अनजान सी भेष कब से पहच... Read more

जिंदगी और मैं

#जिंदगी_और_मैं एक व्यवस्था है इशारे उसके चालें मेरी रंग उसके बदरंग नहीं, चाहत मेरी अपनी कुछ नहीं, दिये जो उसने, दिल से लग... Read more

बहरे लोग सोया समाज

कौन किसकी सुनता कुछ बहरे हुये किसी को ख्याल न था कुछ सियाने कोई चोर शातिर गिरोह अपना तो सबकुछ गया कैसे कह देते बसा लो अपने स... Read more

अतीत का पाखंड आज की परंपरा

अंधाधुंध की कमाई मन में रही न समाई साख मिली सजी सजाई एकदिन होनी है राख तनिक बात समझ न आई कैसे बँट गई ये कोख परिधान पुराने शो... Read more

परख लॉबिंग लिंचिंग अतिवृष्टि

मैं कहिन आँखिन देखी, तुम फँसे अपनी कथनी , व्रत किया उपवास नहीं, लिये खडे धूप अगरबत्ती, मेरी चाहत मुझ ही से पूरी . आज नहीं कोई... Read more

किराए के किरदार

किसे कहते कौन सुनते सबके अपने अपने संसार कोई खुद से परेशान कोई परेशान खुदा से आपबीती सुनते किसी से करते मिला वो भी व्यापार म... Read more

एक बूंद का सफर

एक बूँद थी जो उठी धरा के आगोश से , चढ़ गई बादलों संग आकाश में, प्रवाह नहीं वजूद की, सुरक्षित बादलों की गोद थी उड गये होड चमक ... Read more

वोटर और चुनाव

एक आदमी जो झोल़ा उठाये दिनभर घूमता सुबह एक नियमित समय शायं घर लौटने का भी दिनभर लोग ताश खेलने, हुक्का पीने, हररोज शायं शराब की लत... Read more

जीतने के लिये हारना

लाख गहरे हो घाव, भर जाते हैं, कम से कम, अपनों के दिये ना हो, . टूट जाते हैं अक्सर, आइने, अपना फर्ज़ नहीं भूलते, हर वो टुकड़ा, ... Read more

सफलता और रहस्य

जो लोग असफल यानि फेल्योर होते हैं वे होते ही हैं इसीलिए होते हैं 👇 ( कारण कोई खास या विशेष / गुप्त या रहस्य नहीं. बातें पुरातन... Read more

आपका मत विशेषाधिकार

भीड़ बढ़ी है. बड़ी है ! EVM का जमाना. बालू रेत सा टिल्ला, संभलकर चलना, याददाश्त नहीं हैं, इतिहास साक्षी मोम सा पिंघलना, अ... Read more

भगवान की परिकल्पना

कमजोर असहाय मंदबुद्धि कर्महीन आलसी लोगों का मार्ग है तथाकथित धर्म. कुछ चालाक लोग के लिए. बचने का मार्ग ..भी, कूडेदान की तरह ... Read more

राष्ट्रवाद और विवेक

एक आदमी धर्म अधर्म के मार्ग पर जब तक नहीं चल सकता जब तलक उसके पास अपना ज्ञान/विवेक बोध नहीं होता . तब तक वह किसी #विचारधारा का #सं... Read more