Mahender Singh

महादेव क्लीनिक, मानेसर 122051

Joined August 2017

स्नातक(आयुर्वेदाचार्य) विधा:- कविता, हास्य- व्यंग्य, शेर,गजल, कहानी,मुक्तक,लेख,

Books:
जीवन एक अभिव्यक्ति
Jivan ek Abhivyakti

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गालिब

कूटनीति कहे या कहे फूटनीति कल भी थी आज भी है गालिब भी है काबिल भी खुद को जिया ओरों को जीवन दिया प्रेम पथ पर उतरे खरा, हर बज़्म व... Read more

तलाश

दो रोटी की आश में सुकून की तलाश में दर दर भटकता रहा दो रोटी की आश में स्वाभिमान लिए मन में हुनर था हाथ में जमी... Read more

सिर्फ़ दुपहरी का विश्राम

दिन बीत गया, गुजर गई रात, भूल गये भला जबसे, दोपहरी सा विश्राम, . हलधर छोड़ बैल, वो पेड़ की छाँव, बैल जुगाली करते, कृषक करें वि... Read more

भगवान रुप ब्लैक-होल.

मंदबुद्धि/तर्कहीन/असहाय/दीनहीन/निर्धन/कमजोर. मार्ग है भक्ति, साधन:- कल्पना/थाली/मूर्ति/पूजा/आराधना/उपासना साधक यानि भक्त उपर्... Read more

उम्मीद

टूट जाना, टूटकर जुड़ जाना, रूठे को फिर से मना लेना, हारकर थककर जो थे सोये, भौंर भई बन उम्मीद आगे बढे, कहीं उम्मीद लेकर जाते हो... Read more

दोपहर के समय

दिन देखया न रात, कितके सुबेरा शाम, याद रहया हरदम, यो दुपहरी का घाम, यो दुपहरी का घाम,चाहवे घणा आराम, मजूर माणस निभाते, भूले नमक ... Read more

न्यायालय और व्यवस्था

एक *महिला मित्र ने पूछा है की :- क्या *न्यायालय में *न्याय मिलता है ? . अब ये भला कोई *पीडित थोड़े पूछेगा ! एक *अहंकार से ग्रस्त ... Read more

बेहोशी छोडे

कानों में लीड लगी,ढांप कर चले मुँह. नियति ख्याल किसे,खोपडी चढ़े बूह. खोपडी चढ़े बूह, कौन किसको गामे, खुद मतवाले इतने,न सुने न ही श... Read more

दरकरार

नोटों की **दरकरार सबको हैं, अभी *धर्म और **सरकार को तुमसे भी ज्यादा ***जरूरत हैं, तुम पर जो ***प्रतिबंध लगे हैं , ये उनकी *जरू... Read more

संवाद

जब उडते हुये ये **पराग कण, बन सकते है बोझ सैंकड़ों मण, है ये कौन सी परीक्षा के क्षण, बिन खोज़ मिले आदमी विभिषण, . फुटपाथ पर न *थू... Read more

जागरण शुद्धावस्था

कर ले रे बंदे *भक्ति, भक्ति में है ***शक्ति, उम्र दराज नहीं मैं *व्यक्ति, *जागरण ही मेरी अभिव्यक्ति. * खुद का संग कर ले, *ठोकर... Read more

ठग वो भी है जो मनुष्य की व्यवस्था को ईश्वर की बताते हैं

किसी दूसरे ने गलत किया, इसलिये हम सही हैं, को जायज ठहरा कर, काम करनेवाले भी, #धार्मिक होते है #व्यंग्य. . किसी की गलतियों पर, ... Read more

टूट गई माँ की ममता

गिरकर उठना उठकर गिरना गिरकर उठना उठकर चलना . दर्शक का हँसना खुशी में नहीं समाती है, *अपाहिज़ नहीं हैं *वह, यह बात *पक्की जब... Read more

परमार्थ

अपने घर की छाछ को खट्टा कौन बतावे, अनेक घरों की छाछ जब घुल मिल जावे, तब हकीकत सामने आने से छुपती जावे, कढ़ी बाजरे से गोवर्धन स्वाद... Read more

वसुधैव कुटुम्बकम

आदमी खड़े होकर चले, रेंगते हुए आगे बढ़े. रंगीन कपड़े कब से खरे. प्राकृतिक चक्र अचूक बडे, राष्ट्रवाद बडा के वसुधैव कुटुम्बकम बडा, ... Read more

एक अबूझ पहेली

*त्रिदेव (ब्रह्मा/विष्णु/महेश) *श्रीकृष्ण *श्रीराम * सतयुग *त्रेतायुग *द्वापरयुग *कलयुग *सनातन *शाश्वत क्या है ? मुक्ति/मोक्ष क... Read more

विचार प्रवाह

प्रेरित होकर जो बढ़े, नहीं रहता मोहताज़, सफलता वा की दासी,सदा सजे सिरताज़ . वार त्यौहार इतवार, कैसे मनोरोग उपचार, एक दिन की व्यवस्थ... Read more

अनपढ़ क्यों है खरा

क्या क्या लिखकर भेजा है, देखो पढ़कर भेजा भरने भेजा है, हैं जो अनपढ़ वे ही सुनते हैं. कहते भी हैं, बहुत खरा-खरा, जिस किसी को भी... Read more

भक्तिभाव एक लकवा

गिरे तो गिरे पर इससे ज्यादा और ना गिरें, पदासीन लोगों को हमदर्दी इसमें भी चाहिए, उठाने दौड़ी जनता, झट से फिर धड़ाम गिरे, ... Read more

रहस्य दर्शन

चुन चुनकर बुने बुनाये खुद ही पैदा कर डोर लिये खुद के हाथ पारस भी हंसा जहां तक सबकुछ खुद ही व्यवाहरिक विध्वंसक रचनात्मक ... Read more

सुनो अवश्य समझा पावोगे

डरा सो मरा ✍️ मृत्यु सबको आती है. सबको पढ़ाया जाता है. मानने को कोई तैयार नहीं. गीता सिर्फ़ हाथ रखकर मौके भुनाने के लिये है. ... Read more

सत्ताविहीन

कुछ रचनाएं हो बहुत कुछ घटे तभी तो होगी. मिला है सभी को संभाल पाओगे तभी तो अपनी होगी. गुजार दिया हर मंजर देखते देखते कोई व... Read more

एकमात्र सत्य

असत्य और सत्य अज्ञान और ज्ञान नफरत और प्रेम कमजोर वा प्रबल . द्वंद्व वा द्वैत. ये ही तो वो दो छोर है. इस और हैं या उस उस ओर ... Read more

राष्ट्रवाद में उदाहरण

कौआ सुनावे कर्कश मधुर संगीत कोयल करती कूँ कूँ काँव काँव ऋतु बसंत सी नहीं बहार. जो सजाये राग मलहार. जो आये पसंद आपको. छद्म राष... Read more

संवैधानिक ईकाई *वोट

लोकतंत्र संविधान *ईकाई /वोट/समर्थन/निर्णायक/पक्षधर अधिकार/अधिकारी कर्तव्य/लॉयब्लिटी/जिम्मेदारी या यूं कहे साक्षरता के लिए. ... Read more

अधिकार और कर्तव्य/गणतंत्र के कसीदे.

मनाता तो हूँ पर मना कहाँ पाता हूँ. आज की जय जयकार कल फिर वही अत्याचार व्याभिचार. खड़े होकर द्वार से खाली लौट आता हूँ. जिनकी हूँ... Read more

धार्मिक अवधारणा और इंसानियत

इंसानी फितरत और धर्म - - - - - - - - - - - - - - - *इंसानियत की पहचान होते ही तो सब *तथाकथित *धर्म सब गिर जायेंगे. इन पाखंडियो... Read more

स्वतंत्र है फितरती सफ़र

धार्मिकता एक तर्ज, भूल गये सब *फर्ज, खुद पर ही चढे कर्ज, खोजते रहे अब मर्ज, पैदा करने होंगे *तर्क. बहुत होगा इनसे फर्क, झड ज... Read more

अमावस्या और पूर्णिमा

एक खगोलीय घटना अमावस्या/पूर्णिमा/सूर्य-ग्रहण/चंद्र-ग्रहण विचारक/दार्शनिक व्यक्तित्व की देन, धर्म/धार्मिक/अंधभक्त कल भी/ आज भी वंच... Read more

मन और अनुबंध

मनुष्य एक मात्र विचारवान/ निर्णय-सम्मत/कल्पनाशील/याद्दाश्त/बुद्धिजीवी प्राणी है. ये सबमें व्यक्तिगत तौर से किसी मनुष्य में इक्ट्ठ... Read more

प्रेम जीवनाधार

प्रेम कहानी बनता है प्रेम परमात्मा का द्वार. प्रेम इक परम उपहार. प्रेम फितरत से निपजे, जाने कोई जाननहार. प्रेम होता है यह आ... Read more

कैसा इत्तेफाक

आजकल के नंदलाल बेरा नहीं किस भांति/ गडती नाल, थोथे बजावे गाल, खाणनै चाहिए माल़, आँखया मह नहीं लाज. औरां कै बाँधे ताज, बाह... Read more

व्यवाहरिक छलावा और गुलाम भारत.

एक *व्यवहार एक *वाद और एक ही *विवाद एक *जरूरत एक *आदत और एक ही *फसाद धर्म और उसके उत्पाद. -----////--//-/-------//-- इन सबसे जन... Read more

छद्म राष्ट्रवाद

देखकर तुम्ही से सिखा, सवाल पूछना गुनाह है ! पूछने जो चाहे पूछ लो, देशद्रोही से *दाग होंगे, राष्ट्रवाद में *फरमान है. अभिव्य... Read more

व्यवस्था और लोकतांत्रिक सुविधाएं

व्यवस्था कई भांति की होती है. एक सार्वजनिक व्यवस्था जिसका संबंध सीधे प्रकृति और अस्तित्व से है उससे इंसान केवल सगज रहकर आपदाओं से ... Read more

व्यवस्था और जनप्रतिनिधि

लघुकथा ******* आज सुबह करीब 9 बजे बेटे हर्ष को लेने. जिसने मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया था. हुड्डा ग्राउंड जाना हुआ, वहीं पर एक ... Read more

आदत

बदली है ये तो बदलेगी, न बदली तो, तुम्हें बदलेगी, दावाग्नि है ये, नहीं बुझी तो, हम सबको, बदलेगी, बदली है ये तो, बदलेगी. ... Read more

कुछ सवाल

क्या एक अच्छा वक्ता ? अच्छा शासक हो सकता है. क्या नींव भरने के बाद ? मकान के डिजाइन में संभावनाएं बचती हैं ? क्या धर्म/मजहब... Read more

राष्ट्रवाद और भेष

कितनी अच्छी लगती है राष्ट्रवाद की बातें ....आ..हा.. मैं तो कहता हूँ ..हो सिर्फ़ देशहित की बातें हो सिर्फ़ गौदान की बातें, क्य... Read more

बिन जीव सब कंकाल

ये आस्था/विश्वास/ये ट्रेंडिंग जिस इंसान को खुद ईश्वर ने पैदा किया, उसी इंसान ने मतलबी भगवान. जो देख नहीं सकता उसे आँखें, जो द... Read more

झाडफूंक और चिकित्सा

भारत विभिन्नताओं का देश है. यह परिवेश हर क्षेत्र में झलकता है. चिकित्सा के क्षेत्र में ईलाज में भी. ईलाज से पहले बीमारी का उद्गम/... Read more

राष्ट्रवाद या देशद्रोह

जला करते थे जो दीपक इन हवाओं में खिलते है जो फूल इन फिज़ाओं में दरकिनार है आज तूफानों की परवाह किसे इनकी मूल जड़ें बहुत ... Read more

परिपक्वता

पापा के दोस्त और बेटे के दोस्त, एक लघुकथा जो परिपक्वता पर आधारित, एक रात मैंने अपने बेटे गौरव को शिक्षार्थ नींद से जगाया, और एक... Read more

प्रकृति राष्ट्रवाद से अनभिज्ञ

लघुकथा :- ******* वह देश के साथ बिलकुल नहीं था, एक बार के विद्रोह ने ही पोल खोल दी वह तिलमिला गया, उसने अब जो भी प्रस्तुतियां द... Read more

मेरा भारत महान

धातु धातु होती है द्रव गैस गैस द्रव पानी पानी है सभी द्रव्य नीचे धरातल ऊपर आकाश, लहू लहूलुहान हुआ, बताओ अब इनकी जाति ज... Read more

कवाब पर हड्डी

माना की बहरे हो पर अन्धे भी हो ये तुमने सिद्ध कर दिया, अब दिमाग कोई मायने नहीं रखता, जो मन आये वो करो ऐसा भी हरगिज़ नहीं होग... Read more

रहस्य बेनकाब

मत दे *जवाब भले चुप रह, तेरा *आगाज़ तो बता दिखा, कैसे है तू सरताज़ बना हुआ, काबिल तू नहीं न ही काबिज, हरेक लेता तेरा नाम क्यों भला... Read more

जरूरत @लघुकथा

एक दिन रास्ते से गुजरते हुए बस यूं ही देखते हुए गुजर रहा था जिन लोगों ने कूड़ा समझकर डाल दिया था, कुछ लोग उसे इकट्ठा कर रहे थे, य... Read more

उतावला बहुमत

सरकार के उतावलापन या पूर्ण बहुमत के फैसले 👇 ( उदाहरण नंबर 1 ) वैद्य जी बहुत बार मरीज आकर आपसे पूछते है. मुझे नहीं मालूम मुझे क... Read more

नजरिये नजरअंदाज नहीं होते

वो शासक ही क्या ? जिससे प्रजा नाराज न हो ? उठे विरोध और भी ज्यादा ? जो लगे काम हुये ! और भी ज्यादा ! जो माँगे रोटी दिखाक... Read more