Mahender Singh

महादेव क्लीनिक, मानेसर 122051

Joined August 2017

स्नातक(आयुर्वेदाचार्य) विधा:- कविता, हास्य- व्यंग्य, शेर,गजल, कहानी,मुक्तक,लेख,

Books:
जीवन एक अभिव्यक्ति
Jivan ek Abhivyakti

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देश की मुख्यधारा ही दोषपूर्ण

आजादी से पहले का हिंदुस्तान संवैधानिक देश भारत से पहले यह मुल्क कैसा रहा होगा जब आजादी के 73वें वर्ष सभ्यता, संस्कृतिवान्, सना... Read more

गुरुपद

एक रुपये की माचिस दस रुपये की धूपबत्ती दूजे स्थापित हो अराध्य देव की मूर्ति ! हों न भले कोई संस्कार चलेगा जरूर व्यापार. अनपढ़... Read more

कारवाँ रुकता नहीं

कारवाँ चले सिलसिलेवार चले कभी पतवार संग कभी लहर चले होंगे विरोध बडे कोई बीच मझदार कुछ किनारे खडे फिर भी कारवाँ चले सिलसिलेव... Read more

कुछ लोग ज्यादातर गलत समझते हैं

जी हाँ दुनिया का एक बहुत बड़ा तबका ऐसा है, खासकर भारत में जहाँ धर्म धार्मिकता के नाम पर लोगों को सोच को सीमित किया गया है, ऐसा इसलिय... Read more

जीवन परमात्मा है

कुछ बोझ मेरे अपने हैं, एक ओर जमाना दूसरी तरफ़ मेरे चाहने वाले हैं. चाहत सबको है. कुछ देकर चुकाते है, कोई लेकर छुपाते है. ... Read more

आदमी परिचय का मोहताज़ है

*लोग यानि भीड़ *आदमी यानि बोझ तले दबा हुआ, *मनुष्य मतलब मन-अनुकूल *व्यक्ति यानि एकल *इंसान मतलब प्रकृति पर्सनैलिटी के दायरे स... Read more

गुरुपूर्णिमा

उपदेश की नींव पर यह प्रचारक समाज क्या कभी उदाहरण बन पायेगा. तुलसी, वट,पीपल को पूजने वाले लोग. क्या कभी इनके गुणों से लाभान... Read more

नास्तिकता नकार या स्वीकार

धर्म की स्थापना वा धर्म की हानि दोनों का प्रकृति वा अस्तित्व पर एक समान नुकसान. मनुष्य किसी भी विचारधारा का हिस्सा बनकर सर्व... Read more

बज़्म

इन पत्थरों में अल्लाह ईश्वर. खोजने वालों.. थोडा संभलों जरा.. इन बस्तियों में कौन बसता है. . 🇮🇳ये भी कोई राज है. बहुमत नाराज है... Read more

अंधभक्ति और उसका कहर

भक्त अपने भगवान के बारे में अलग अलग समय पर विभिन्न मुद्राओं विभिन्न स्थानों पर विभिन्न कल्पनायें करता है..वह कभी उसे आसमां में निहार... Read more

असाध्य महामारी

कौओं की पंचायत चौकीदारों की जमात फफूँद का रोग बेमौसम पनपती खरपतवार ऐसे महामारी रोग हैं जो लाइलाज़ प्रचंडता पर है. ... Read more

जादूगरी और हकीकत

जादूगरी एक खेल है या हकीकत या हाथ की सफाई या नजरों का खेल शायद सबको मालूम है. और जिसे मालूम नहीं है वह भी जानता है. उसका हकीकत से ... Read more

आज फिर धुंधले हुऐ आईने समाज के.

आज फिर धुंधले हुऐ, आईने समाज के.... प्रेम प्यार सहयोग सहजता हैं गहने मानवीय मूल्यों में ... झलकते थे दिखते थे अंधकार में. ... Read more

जीवन की शवयात्रा

कुछ कदम ओर, कुछ दूर ओर, हार नहीं मानी, थका नहीं, हररोज़ बीच भंवर जाना नहीं स्तर. पहले से बेहतर, चाह में अक्सर, भोर में उठकर, ... Read more

गूँगे और गुड़ का स्वाद.

यह देश कुछ चालाक/शातिर लोगों का है. यहाँ पर बुद्ध बुद्धू समझे जाते है अधिकतर लोग जानते है. समझता कोई कोई है. और जो जानता है सम... Read more

हमारी तो आदत है पुरानी (तुम न फँसना)

ये भी एक कला है. रामकला कहे. या कहे चन्द्रकला.. . कुछ ऐसा करना. एकदम लगे नया. हो बहुत पुराना.. ठगों की भांति.. मुद्दों से भट... Read more

आतंकवादी चेहरे और समाधान.

आतंकवाद तेरा अंत निश्चित ही होगा. कैसे पनपा क्यों बढ़ रहा. खरपतवार सम आतंकवाद. इसे उखाड़ फेंकना ही होगा. . हमें इसका आकलन करना हो... Read more

चुनें सही दिशा सुधरेगी दशा

चाहते किसे नहीं होती. ख़्वाहिश कौन नहीं रखता. पर पूरी उनकी कैसे होती. जो सिर्फ़ उस पर निर्भर है. कहकर छोड़ देता. न खुद को परखा .... Read more

चुनें दिशा सुधरेगी दशा

चाहते किसे नहीं होती. ख़्वाहिश कौन नहीं रखता. पर पूरी उनकी कैसे होती. जो सिर्फ़ उस पर निर्भर है. कहकर छोड़ देता. न खुद को परखा .... Read more

गणतंत्रता दिवस पर एक संदेश

कुछ अल्फ़ाज़ों से चिढने लगा हूँ अखंड भारत को टुकड़ों में बँटते देख रहा हूँ.. हो रही हैं मजहबी बातें.. जबकि तुमने किये है असाम्... Read more

विचार-मंथन

आदमी हमेशा कुछ समझाने की कोशिश करता है, यद्यपि वह समझने की कोशिश करता है.. लेकिन आफत पड़ने पर, और उसे कामयाबी मिलती है, लोकतंत्... Read more

इंसान की मनुष्य से अरदास

भले गरीब हैं अशक्त असहाय नही, इंसान ही हैं बस इतना सा संभलकर बोल लेना, इंसाफ की जुर्रत नहीं है मुझे, हो सके तो खुद को परख ल... Read more

खुद को अभिव्यक्त करने के लिये पढ़ें

स्वप्न दो किस्म के होते है, एक जिनको हकीकत में बदला जा सके, दूसरे जो सिर्फ खयाली पुलाव हो, विचारों के साथ भी कुछ ऐसा ही है, एक... Read more

नव-वर्ष और भारत-वर्ष

कुछ बदला है शायद आया है सुकून लेकर अवसर ही सही .. भाग्योदय होगा अगर है ये शुरुआती शुभ् खबर परिवर्तन का हो गर जिक्र बदलाव को ... Read more

2018 का समापन नववर्ष का आगाज़ है,

जाते जाते साल अठारह एक संदेशा देती जा, हो न कोई अकाल मौत जाते जाते इतनी अक्ल देती जा. . हो न कभी धर्म में हानि, जीवन में आस्... Read more

परिवर्तन समय पर है भारी.

समय बदलता है बदलाव नियति है पकडता है मन उसी को छोड़ देता है ऊभ गया जिससे, . रोना भी हंसा देता हंसना भी रुलाता गालियाँ भी ... Read more

जीवन से संबंधित कुछ तथ्य.

*जो इंसान समयानुसार अपडेट नहीं रहते बिछुड़ जाते है, *जो समुदाय संघठित नहीं रहते वे टूट जाते है ... *जो संघर्ष नहीं करते लुप्त हो जा... Read more

तमस् से जागरण की ओर.

आये है हम प्रेमी बनकर, हर नफरत को मिटा देंगे, लाख फैला दो पाखंड आज, हम जागरण मनाने आये हैं , जल रहा शहर आज क्रोध से, प्रेम ... Read more

कौन धर्म कैसी मानसिकता.

भारत संभावनाओं का देश है । राष्ट्रीयता भले भारतीय हो । भारतीयता के तात्पर्य से अनभिज्ञ हैं । हम एक दूसरे को रोकते जरूर है । भल... Read more

#ज़िंदगी तू ही दाता और विधाता.

सिखाया ज़िंदगी ने जो मुझे, मिला है जो #प्रेम मुझसे, उसे बाँटता चल, जीवन जीने का नाम है, दूसरों के लिये प्ररेणा बन, तू महक तू... Read more

सनातन और बाबा साहेब

जी हाँ ठीक सुना आपने, सनातन हमारा जीवन है, सनातन हमारी जीवनशैली है, लेकिन क्या तना-तनी और क्या ताना-बाना है .. मर्ज क्या है ... Read more

जय माँ भवानी :- एक आदर्श.

करते हैं वंदन आज भी भले कलियुग हो माँ, हो आदि शक्ति कलियुग में भी हो सहारा माँ, जगत जननी हो जगदम्बा तेरो नाम है माँ, जय भवानी त... Read more

परिंदे

दीवाने तुम नहीं परवाने हम नहीं, कम से कम परिंदे ही बन देख लेते. . कभी प्रभावी कभी प्रवासी तनिक, सरहदें तोड़ कर जीना सीख लेते .. ... Read more

माँ की अलंकार महिमा

माँ लफ्ज़ जब भी बोला जाता है ! जननी तेरा ही चेहरा नजर आता है ! माँ एक अलंकार संपूर्ण समर्पण ! प्राकृतिक चरित्र तेरा ही नज़र आता है... Read more

मुशायरे का जुनून

हजार मिटाओ यादें हमारी हम भी दाग हैं .. जुगनू बन रात पर भारी हैं. . दामन पर है दाग दूसरों को भारी हैं. . जीवन एक अभिनय. होना... Read more

क्या है भ्रांति.. क्यों है हम अशांत

प्रशंसा या निंदा प्रसंशक या निंदक पूर्णिमा या अमावस्या उजाले वा अंधेरे लेखन या रिक्तता आधा या खाली खाली के भरा प्रश्न क... Read more

समय और परिवेश

समय की कुछ आदत ऐसी रही. खुद बदलता गया .. मुझे बदलता रहा. न खुद रुका .. न मुझे महसूस होने दिया. कभी काल बनकर गरजता. कभी प्रेम ब... Read more

कुण्डलिया ..हरियाणवी

इब के नया होग्या जिब के पुराना था, हांगे आले मारैं मसकोड़ा हाल बुरा होग्या, हाल बुरा होग्या फैला अखत अंधकार, माणस माणस क... Read more

रक्षा में सूत्र

गिरे हैं मानवीय मूल्य घटा है जीवन में स्तर जरूरी है अहसास रिश्तों में उभरे गगन नभ इंद्रधनुष सा आभास .. झुक जाये जो प्रेम की ... Read more

दोहों के शौकीन पढ़ें.. मेरी कलम से निकले कुछ दोहे

1. नफरत पलभर की चले ........क्रोध के संग, परमाणु सम अति सुक्ष्म है मार करे अतिदूर. 2. आतम तेरा नेह नहीं .....इस देह के संग, तेर... Read more

हास्य और व्यंग्य आखिर कबतक नासमझी का ढोंग करोगे ?

बहकावण की भी हद होवै सै, जिद्दी ऐसे कि मानते कोनी. इब थम ही देख लो 👇 लोग नाम के सामने. भारती भारतीय सरनेम ऐसे लगाते हैं जै... Read more

अस्तित्व के प्रकृति स्त्रीत्व की पुकार

सजी है संवरी है आज फिर से, तू फिर भी उदास है, खामोशी तेरी नाखुश में हाँ है, मालूम है मुझे, तू बलात्कारी बना है ..जब से .। ~डॉ_म... Read more

गुरु तत्व और समीक्षा

जन्म हुआ निर्बोध आज, बोध ! जब लखावण लाग्या. रहग्या रहप जब दूध मायत .. तेरी छाती माहि आवण लाग्या. जुड़े थे सांस मह सांस. रोम र... Read more

नाज़ है ..तुझ पर 'अ जिंदगानी'

शीर्षक:- #नाज़ है तुझ पर 'अ जिंदगानी' नाराज न हो 'अ जिंदगानी. तुझ पर ही तो #नाज़ है . चमन में खिले कंटक पुष्प. हररोज इक नई कहान... Read more

जागरण ही मुक्ति द्वार है..एक प्रयास इस ओर.

मैं कुछ कहता. इससे पहले सबकुछ कहा जा चुका था. कुछ ने अमल कर नकार दिया. अपने निज अनुभव से काम लिया. कुछ अनसुने रह गये. कुछ को ... Read more

स्वाध्याय !

हाँ मुझे नफरत है तुमसे ! मेरे अंदर भी प्रेम की ललक है ! हाँ मैं गुस्सैल हूँ ! शांति चाहिये मुझे ! हाँ शैतान हूँ मैं, इंसानी... Read more

लौट आओ ..अब शाम हुई.

सिमट जाती है दिनभर की यादें ! चलो अब घर लौट चले .. शाम जो हुई , हर जीव हर पंछी हर पथिक तलाश है जिन्हें, आशा है उन्हें, सुख... Read more

पहचान, समझ और जागरण.

पहचान,समझ और जागरण ******************* पकड़ लिया जकड़ लिया उन्हीं संवेदनाओं ने, जिन्हें हम धर्म और स्वराज के लिये फैली हैं , समझ... Read more

विश्व पर्यावरण दिवस और ये अल्फाज़

पर्यावरण बचाओ ! तभी जिंदा रह पावोगे ! ये एक समन्वय है ! इसके बिन ! कहाँ जिंदा रह पावोगे ! . गर लिया ! लौटा नहीं पाये ! कर्जद... Read more

"जीवन एक अभिव्यक्ति"

एक चालाक शातिर आदमी की कहानी में मैंने सुना है, आज चरितार्थ देख भी रहा हूँ 👇 . चार आदमियों ने दिन स्वादिष्ट खीर बनाई. और एक शर्त... Read more