होली मुक्तक : मुझे चुमकार होली में ॥

रहूँगा मैं नहीं तैयार खाने मार होली में ॥ लगा फटकार निसदिन पर मुझे चुमकार होली में ॥ तू मुझसे दूर रहले साल भर भी मत मुझे तक तू , ... Read more

मुक्त-ग़ज़ल : पूछना तुम तीन होली में ॥

उसका मन इस बार हम बन दीन होली में ॥ दान ले लेंगे या लेंगे छीन होली में ॥ श्वेत हों या श्याम हों ; कितने भी हों बेरंग , करके रख दे... Read more

*मुक्त-ग़ज़ल : दिल लगाने चल पड़ा हूँ मैं ॥

हथेली पर ही सरसों को जमाने चल पड़ा हूँ मैं ॥ कि बिन पिघलाए पत्थर को बहाने चल पड़ा हूँ मैं ॥ नहीं हैं आँखें जिसकी और न जिसके कान भी उ... Read more

*मुक्त-ग़ज़ल : रावण भी रहता है मुझमें !!

तू क्या जाने क्या है मुझमें ? सिंह है या चूहा है मुझमें !! इत सीतापति बसते हैं उत , रावण भी रहता है मुझमें !! बूढ़ा हूँ पर सच नटख... Read more

*मुक्त-मुक्तक

जब मुझको ज़रूरत थी तेरी दैया रे दैया ! उस वक़्त तो कुछ और ही था तेरा रवैया ॥ अब चाहिए तुझको मेरी इमदादो-मदद तो , तू हो रहा ह... Read more

*हाइकु-माला

============ तन से काली ॥ पर हिय से वह - शुभ्र दिवाली ॥ ============ मेरी मंज़िल ॥ ग़ैर मुमकिन सा – आपका दिल ॥ ============ अ... Read more

गीत : प्रेम धुन में प्रीत लय में

प्रेम धुन में प्रीत लय में गुनगुनाएगी ॥ लेखनी मेरी उसी के गीत गाएगी ॥ दृष्टि में मेरी सदा रहता है मुख उसका । और मुझको ताकते रहना ... Read more

गीत : तुम क्या जानो दुख पायल का ?

तुम क्या जानो दुख पायल का , तुमको तो छन – छन से मतलब ? चूड़ी कितनी चिटके – टूटे , तुमको बस खन – खन से मतलब ? तुमको बस अच्छे लगते ... Read more