साहित्य अध्येता

Books:
साझा संकलन
कुंडलिनी लोक (संपादक – ओम नीरव)
संपादित
दोहा संगम (दोहा संकलन)
तुहिन कण (दोहा संकलन)
समकालीन कुंडलिया ( कुंडलिया संकलन)
मौलिक
स्वांतः सुखाय (दोहा संग्रह)
शब्दों का अनुनाद ( कुंडलिया संग्रह)
Awards:
दोहा शिरोमणि सम्मान
मुक्तक शिरोमणि सम्मान
कुंडलिनी रत्न सम्मान
काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान
साहित्यदीप वाचस्पति सम्मान

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जनहरण घनाक्षरी

जनहरण घनाक्षरी ( 30 लघु वर्ण चरणांत 1 वर्ण दीर्घ। 8,8,8,7 पर यति) घन नभ गरजत ,रिमझिम बरसत, अनुपम छवियुत ,सब हरित धरा। तरु... Read more

कृपाण घनाक्षरी

कृपाण घनाक्षरी - 8,8,8,8 वर्णों पर यति और अंत्यानुप्रास, अंत में गुरु लघु अनिवार्य । (1) रूपराशि बनी ... Read more

मनहरण घनाक्षरी

मनहरण घनाक्षरी -8,8,8,7वर्णों पर यति,चरणांत में लघु ,गुरु । छंदबद्ध करने हैं,शब्द काव्य नाम यदि, मात्रा विधान पहले,सभी सीख ल... Read more

देव घनाक्षरी

देव घनाक्षरी - 33वर्ण 8,8,8,9 पर यति; अंत में लघु,लघु ,लघु अनिवार्य । (1) भीगती है गोरी जब,सावन की बारिश में... Read more

रूप घनाक्षरी

रूप घनाक्षरी मापनी- 8,8,8,8 वर्ण पर यति, अंत में गुरु लघु अनिवार्य लगा है आषाढ़ मास,शुरू बरसात हुई, धानी ओढ़ चुनरिय... Read more

विजया घनाक्षरी

विजया घनाक्षरी- ( 32 वर्ण।8,8,8,8 पर यति। यति के अंत में नगण अनिवार्य ) (1) बजें चूड़ियाँ खनन,घूमे सजनी ... Read more

जलहरण घनाक्षरी

जलहरण घनाक्षरी 8,8,8,8 पर यति; अंत में लघु लघु अनिवार्य आया है सावन मास ,शुभ दिन सोमवार, गूँज रहा चहुँदिशि, महाद... Read more

सर्वगामी सवैया

सर्वगामी सवैया (तगण ×7+ गुरु गुरु) जाते नहीं जो कभी दूर देखो ,वही लोग होते नहीं साथ मेरे। संसार साथी किसी का नहीं है ,यहाँ भो... Read more

महाभुजंग प्रयात सवैया

महाभुजंगप्रयात सवैया (यगण×8) महा नीच पापी पुजारी न ध्यानी, प्रभो चाह मेरी तुम्हें मात्र पाना। पता है मुझे अल्पज्ञ... Read more

महामंजीर सवैया

महामंजीर सवैया- मापनी - सगण×8+ लघु गुरु (1) नित सैनिक मार रहे अपने सरकार नहीं उनको सहलाइए। जग म... Read more

कुंतलता सवैया

कुंतलता सवैया मापनी- सगण×8+2 लघु (1) अभिलाष यही उर भाव भरो हर गीत बनें नित मातु सुहावन। छल दंभ मिटे अभिमान घटे करुणा भर दो कर दो... Read more

मंदारमाला सवैया

मंदारमाला सवैया - विधान-तगण×7+गुरु वागेश्वरी प्रार्थना ये सुनो, चेतना में मुझे शुद्ध संसार दो। वीणा बजे राग सारे सजे,हो अँधेरा... Read more

वागीश्वरी सवैया

वागीश्वरी सवैया -(यगण×7+ लघु गुरु) 1) कृपा ये करो मातु वागीश्वरी छंद का पूर्ण ज्ञानी बना दो मुझे। मिले ज्ञान जो भी रहूँ बाँटता मा... Read more

सुंदरी सवैया

सुंदरी सवैया - (सगण×8+ गुरु) सब संकट दूर करे नित जो, वह प्राप्त करे यश और बड़ाई। नित कर्म सभी तज स्वार्थ करे, ... Read more

गंगोदक सवैया

गंगोदक सवैया(ऽ।ऽ रगण×8) मातु हंसासना पाणि वीणा सुनो भक्त तेरा पुकारे तुझे शारदे! ज्ञान दे दो मुझे मेट अज्ञानता ... Read more

मत्तगयन्द सवैया

मत्तगयंद सवैया छंद- भगण×7+गुरु गुरु ग्वाल सखा सब संग चले,सिगरे ब्रज घूमि मनावन होली। छेड़ि सबै मुसकाय कहैं ,कुछ ढंग विचित्र सुनावत... Read more

सुमुखी सवैया

सुमुखी सवैया (जगण×7+ लघु गुरु) पयोधर पीन दिखा त्रिबली ,हर अंग अनंग जगावति है। चले गजगामिनि-सी सजनी,कटि केहरि- सी लचकावति ह... Read more

अरसात सवैया

अरसात सवैया- (भगण×7+रगण) पावनता घर द्वार बढ़े मम, माँ घर में जब आप विराजती। धूप सुवासित हो घर आँगन,दीप जला करते तव आरती। की... Read more

चकोर सवैया

चकोर सवैया (भगण ऽ।।×7+ गुरु लघु) खोकर सैनिक मुश्किल है अब,भारत को धरना उर धीर। काट करें तन के टुकड़े हम, दें रिपु को हर निर्मम... Read more

मुक्तहरा सवैया

मुक्तहरा सवैया (जगण।ऽ।×8) ( 11,13 पर यति) न देश पुरातन भारत-सा ,जग में अब भी जिसकी पहचान। बसा उर अंतर त्याग जहाँ ,सुख वैभव का कर द... Read more

अरविंद सवैया

अरविंद सवैया ( सगण×8+लघु) अतिवृष्टि अकाल कभी करते ,नव रोग धरा पर क्रूर प्रहार। जन मानस व्याकुल पीड़ित है,अवसाद रहा उर पैर पसार... Read more

दुर्मिल सवैया

दुर्मिल सवैया ( सगण× 8) पहचान यही नर कर्मठ की वह बैठ नहीं कर को मलता। रह धीर गँभीर करे हर काम दिखे न कभी अति आतुरता। जिसक... Read more

किरीट सवैया

किरीट सवैया (भगण×8) बात करें सब कष्ट नहीं जब नेह दिखा निज गेह बुलाकर। आदर मान मिले सबसे यश - वैभव में नित शीश झुकाकर। स्वा... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

8,8,8,8 सभी शब्द बिना मात्रिक श्रृंगारिक डमरू घनाक्षरी पवन परस तन,मचलत हर मन, बहकत चहकत,मनमथ वश सब। नयन मदन मद,अधर अनघमय... Read more

घनाक्षरी

डमरू घनाक्षरी-8/8/8/8 अमात्रिक शब्द घटत अतल जल,बढ़त उमस पल, जलत अचर चर,गरम सहत जग। चम चम चमकत,नज़र न ठहरत, तन ... Read more

घनाक्षरी

कृपाण घनाक्षरी - 8,8,8,8 वर्णों पर यति और अंत्यानुप्रास, अंत में गुरु लघु अनिवार्य । (1) रूपराशि बनी ... Read more