साहित्य अध्येता

Books:
साझा संकलन
कुंडलिनी लोक (संपादक – ओम नीरव)
संपादित
दोहा संगम (दोहा संकलन)
तुहिन कण (दोहा संकलन)
समकालीन कुंडलिया ( कुंडलिया संकलन)
मौलिक
स्वांतः सुखाय (दोहा संग्रह)
शब्दों का अनुनाद ( कुंडलिया संग्रह)
Awards:
दोहा शिरोमणि सम्मान
मुक्तक शिरोमणि सम्मान
कुंडलिनी रत्न सम्मान
काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान
साहित्यदीप वाचस्पति सम्मान

Copy link to share

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

8,8,8,8 सभी शब्द बिना मात्रिक श्रृंगारिक डमरू घनाक्षरी पवन परस तन,मचलत हर मन, बहकत चहकत,मनमथ वश सब। नयन मदन मद,अधर अनघमय... Read more

घनाक्षरी

डमरू घनाक्षरी-8/8/8/8 अमात्रिक शब्द घटत अतल जल,बढ़त उमस पल, जलत अचर चर,गरम सहत जग। चम चम चमकत,नज़र न ठहरत, तन ... Read more

घनाक्षरी

कृपाण घनाक्षरी - 8,8,8,8 वर्णों पर यति और अंत्यानुप्रास, अंत में गुरु लघु अनिवार्य । (1) रूपराशि बनी ... Read more