साहित्य अध्येता

Books:
साझा संकलन
कुंडलिनी लोक (संपादक – ओम नीरव)
संपादित
दोहा संगम (दोहा संकलन)
तुहिन कण (दोहा संकलन)
समकालीन कुंडलिया ( कुंडलिया संकलन)
मौलिक
स्वांतः सुखाय (दोहा संग्रह)
शब्दों का अनुनाद ( कुंडलिया संग्रह)
Awards:
दोहा शिरोमणि सम्मान
मुक्तक शिरोमणि सम्मान
कुंडलिनी रत्न सम्मान
काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान
साहित्यदीप वाचस्पति सम्मान

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छंद

शुभमाल छंद 121,121 भजो प्रभु नाम। सदा सुख धाम। धरो मन धीर। हरें हर पीर।।1 प्रदूषण रोक। हरो सब शोक। करो जब सैर... Read more

छंद

शुभमाल छंद 121,121 भजो प्रभु नाम। सदा सुख धाम। धरो मन धीर। हरें हर पीर।।1 प्रदूषण रोक। हरो सब शोक। करो जब सैर... Read more

कहमुकरी

कहमुकरी- सबसे पहले कपड़ा खोले। इंच इंच फिर बदन टटोले। पूछे वह क्या मेरी मर्जी। क्या सखि साजन? नहिं सखि दर्जी।।1 जाड़ा उसस... Read more

दोहे

दोहे फटती नहीं बिवाइयाँ, जब तक अपने पैर। ज्ञात नहीं होता कभी,क्या दुख सहता गैर।।1 ओखल के अंदर रहें ,और चोट से दूर। जिनको आ... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद आया मौसम शीत का, ठिठुर रहे हैं गात। उछल- कूद बच्चे करें ,दें ठंड़क को मात। दें ठंडक को मात ,सभी को ये समझा... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद- खोया - सा मन बावरा, तके बैठकर राह। सूना- सूना जग लगे ,मिले न दुख की थाह। मिले न दुख की थाह,पिया की याद सताती। ब... Read more

मुक्तक

मुक्तक- दिया उम्मीद का भगवन,कभी बुझने नहीं देना। बढ़े हैं जो कदम आगे, उन्हें रुकने नहीं देना। मुबारक साल हो सबको,दुआ दिल से ह... Read more

मुक्तक

मुक्तक- मज़ा आए भला कैसे जगत की आशनाई में। लगा हो ध्यान जब सबका यहाँ केवल बुराई में। दुखों की शीत में बाँटा अमीरी ने न... Read more

मुक्तक

मुक्तक- मज़ा आए भला कैसे जगत की आशनाई में। लगा हो ध्यान जब सबका यहाँ केवल बुराई में। दुखों की शीत में बाँटा अमीरी ने न... Read more

दोहे

दोहे- राजनीति ने कर दिया,कितना काम महान। जाति-धर्म में वोट हित,बाँट दिए भगवान।।1 शैशव प्यारी भोर है,यौवन दिन अभिराम। वृद्धावस्... Read more

दोहे

दोहे भावों की बिंदिया लगा,कर भाषिक सिंगार। आई कविता कामिनी,सज धज मन के द्वार।।1 शब्दों के लालित्य की,अधर लालिमा साज। कविता बन ... Read more

मुक्तक

मुक्तक- नज़र झुकाकर गलियों से जो,आया जाया करते हैं। कभी भूलकर चाहत को वे, नहीं नुमाया करते हैं। सब देख फिदा हो जाते हैं,उनकी ... Read more

गीतिका

गीतिका- ढोंग कपट को पूज्य बनाते ,मैंने अनुचर देखे हैं। बिना किए विषपान बने जो, ऐसे शंकर देखे हैं।।1 निद्रा से साधन का नाता,जो क... Read more

भूल मत जाना

गीतिका मिला है कोष जो प्रभु से लुटाना भूल मत जाना। किसी रोते हुए को तुम हँसाना भूल मत जाना।।1 बड़े अनमोल होते हैं ,सभी सं... Read more

गीतिका

गीतिका- (आधार छंद-मंगलवत्थू) कहता है संसार, चुनौती दे डालो। कभी न मानो हार,चुनौती दे डालो।।1 बनो स्वयं में सुदृढ़,त्याग दो ... Read more

गीतिका

गीतिका (आधार छंद- मंगलवत्थू) ऐसा हुआ कमाल,चुनावी मौसम में । बदली सबकी चाल,चुनावी मौसम में।।1 खींचें नेता टाँग ,मढ़ें आरोप स... Read more

मुक्तक

मुक्तक- जिसे दे खून पुरखों ने सजाया है सँवारा है। वहां पर बह रही देखो चतुर्दिक पाप धारा है। नहीं है काम हाथों को भ्रमित ह... Read more

गीतिका

गीतिका आधार छंद- विधाता मापनी- 1222, 1222, 1222, 1222 समांत- आर, पदांत- करना तुम। समय है कीमती इसको नहीं बेकार करना तुम। गव... Read more

गीतिका

आधार छंद- सिंधु समांत - अर , पदांत- नहीं है मापनी- 1222, 1222, 122 किसी का देश ये अनुचर नहीं है। यही है बात हमको डर नहीं है... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद- माना ये इस जगत में,फल हैं खास तमाम। कहते हैं पर सब यही,फल का राजा आम। फल का राजा आम,सभी को सदा लुभाए। बालक वृद्ध ... Read more

मुक्तक

नशा हर चीज़ में था पर मुझे पीना नहीं आया । सलीके से कभी ऐ जिन्दगी जीना नहीं आया। मुसीबत रोज़ आ करके खुशी हर चाक कर देती, रफू ... Read more

सवैया

महाभुजंगप्रयात सवैया (यगण×8) सभी का सहारा कन्हैया हमारा, सदा भाग्य देखो इसी ने सँवारा। न डूबा कभी भक्त कोई दुखों में,... Read more

समारोह (लघुकथा)

समारोह (लघुकथा) ट्यूब वेल चल रहा था और चार लड़के बाल्टियाँ भर भर कर मैदान का छिड़काव कर रहे थे। टेंट वाले का सामान पड़ा हुआ था, इतन... Read more

गीतिका

गीतिका- काव्य को अनुभूति का अध्याय लिखते रह गए। हर दुखी की पीर का व्यवसाय लिखते रह गए।।1 लोग आए निर्धनों की फूंक डाली झ... Read more

शिव ताण्डव स्तोत्रम् का भावानुवाद

शिव ताण्डव स्तोत्रम् सरसी छन्द- जिनकी सघन जटाओं से है,निःसृत गंगा धार। पड़े गले में रहते जिनके, नित सर्पों के हार। बजा बजा ज... Read more

घनाक्षरी

8,8,8,8 सभी शब्द बिना मात्रिक श्रृंगारिक डमरू घनाक्षरी पवन परस तन,मचलत हर मन, बहकत चहकत,मनमथ वश सब। नयन मदन मद,अधर अनघमय... Read more

भ्रूण हत्या (लघुकथा)

भ्रूण हत्या ( लघुकथा) -------- पटल पर पोस्ट की गई रचना को पढ़कर एडमिन महोदय बुदबुदाए- लोग कुछ भी लिखकर पोस्ट कर देते हैं और समझत... Read more

गीतिका

आधार छंद- हरिगीतिका मापनी- 2212, 2212, 2212, 2212 समांत- आर, पदांत- कर सकता नहीं जो भाव भाषा शब्द पर अधिकार कर सकता नहीं। वह... Read more

घनाक्षरी

डमरू घनाक्षरी-8/8/8/8 अमात्रिक शब्द घटत अतल जल,बढ़त उमस पल, जलत अचर चर,गरम सहत जग। चम चम चमकत,नज़र न ठहरत, तन ... Read more

गीत

एक गीत ( ताटंक छंद आधृत) कब तक यूँ ही गद्दारों पर, दया दिखाते जाएँगे। भारत के माँ लाल दुलारे,कफन ओढ़ते जाएँगे।। धींगामुश्ती क... Read more

कविता

देश का बचपन ------------------- आँखों में मासूमियत चेहरे पर भोलापन, कंधे पर डाले एक फटी पुरानी बोरी गली- गली घूमता, हर कूड... Read more

तकदीर

तकदीर- ----------- चमचमाती मर्सिडीज में मेम साहब की गोदी में बैठे हुए डाॅगी को गली के कुत्ते ने देखा- जो पास में खड़े हुए ... Read more

मालती माधव छंद

माधव मालती छंद 2122, 2122, 2122, 2122 नेह निर्मल दृष्टि ने जब इस वदन तन को छुआ है। प्रेम का अंकुर हृदय में प्रस्फुटित तब से हु... Read more

गीतिका

गीतिका - जीवन में हर रंग चाहिए। जीने का भी ढंग चाहिए।।1 तंग भले कपड़े हों लेकिन, नहीं नजरिया तंग चाहिए।।2 निर्मलता हो जिसकी... Read more

गीतिका

गीतिका - जीवन में हर रंग चाहिए। जीने का भी ढंग चाहिए।।1 तंग भले कपड़े हों लेकिन, नहीं नजरिया तंग चाहिए।।2 निर्मलता हो जिसकी... Read more

ग़ज़ल

ग़ज़ल - ऽ।ऽ, ऽ।ऽ चाँदनी रात है। प्यार की बात है।।1 याद आती बहुत, हर मुलाकात है।।2 सच सियासत हुआ, झूठ जज़्बात है।।3 ... Read more

घनाक्षरी

कृपाण घनाक्षरी - 8,8,8,8 वर्णों पर यति और अंत्यानुप्रास, अंत में गुरु लघु अनिवार्य । (1) रूपराशि बनी ... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद- मिलना मुश्किल हो गया,जग में अच्छे मित्र। अंकित सबके हृदय में,एक स्वार्थमय चित्र। एक स्वार्थमय चित्र,करे बस चिंता अप... Read more

गीतिका

गीतिका - आधारछंद - विधाता समांत -अना, पदांत - आ गया हमको। मापनी - 1222, 1222, 1222, 1222 मिला जब साथ प्रियतम का सँवरना आ गया हम... Read more

कुंडलिनी छंद

कुंडलिनी छंद - ठाढ़ी आँगन रूपसी,ज्यों खोले घन केश। ऐसा मादक लग रहा, घटा सँग परिवेश। घटा सँग परिवेश,देख रति इच्छा बाढ़ी। धरकर ... Read more