साहित्य अध्येता

Books:
साझा संकलन
कुंडलिनी लोक (संपादक – ओम नीरव)
संपादित
दोहा संगम (दोहा संकलन)
तुहिन कण (दोहा संकलन)
मौलिक
स्वांतः सुखाय (दोहा संग्रह)
शब्दों का अनुनाद ( कुंडलिया संग्रह)
Awards:
दोहा शिरोमणि सम्मान
मुक्तक शिरोमणि सम्मान
कुंडलिनी रत्न सम्मान
काव्य रंगोली साहित्य भूषण सम्मान
साहित्यदीप वाचस्पति सम्मान

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लघुकथा

जिम्मेदारी ( लघुकथा) हैलो सुधा, माँ ने अपनी बेटी को फोन करके पूछा- बेटा ऑफिस से कितने बजे निकलोगी? सुधा ने माँ को उत्तर दिया- माँ,... Read more

लघुकथा

पन्द्रह दिन बाद ( लघुकथा) ------------------- मैंने अपने मित्र कमरुद्दीन को ईद की बधाई देने के लिए सुबह नौ बजे के आस-पास फोन लगाया... Read more

लघुकथा

सन्नाटा (लघुकथा) ऑफिस में गार्ड की नौकरी करने वाले राम बाबू को उदास बैठे देखकर मैंने पूछा- क्या हालचाल है रामबाबू? तबियत तो ठीक है?... Read more

लघुकथा

आहट (लघुकथा) ----- शाम को चाय पीते वक्त जब तारा ने अपनी सास की साँस फूलती हुई देखी तो कहा- अम्मा जी आप अपने खान-पान का ध्यान रखा क... Read more

गीतिका

गीतिका- व्यक्त करें आभार,ज़िंदगी में। मिले जीत या हार,ज़िंदगी में।।1 थोड़ी रखना लाज,ज़माने से, जब हों आँखें चार,जिंदगी में।।2 ... Read more

गीतिका

गीतिका आधार छंद- त्रिलोकी मात्रा विधान- 20 मात्रा। 11,10 पर यति। यति के पूर्व पश्चात त्रिकल, अंत में लगा। उठ प्रातः लो नित्य,ना... Read more

गीतिका

गीतिका आधार छंद- त्रिलोकी मात्रा विधान- 20 मात्रा। 11,10 पर यति। यति के पूर्व पश्चात त्रिकल, अंत में लगा। उठ प्रातः लो नित्य,ना... Read more

दुख का मोड़

गीतिका- अहीर छंद- 11 मात्रा, अंत 221/ 121 आया दुख का मोड़। दिया सभी ने छोड़।।1 मज़बूरी का मेल, गठबंधन बेजोड़।।2 हो भगवा ... Read more

दोहे

दोहे- इस तकनीकी दौर ने ,बदल दिए हालात। रखता कौन सहेज अब,चिट्ठी में जज़्बात।।1 भौतिक सुख की लालसा,करवाती है पाप... Read more

गीतिका

गीतिका- कठिन साधना सी मेहनत है,पर लाचारी गाँवों में। नहीं मिटाए मिटती फैली, हर दुश्वारी गाँवों में।।1 हरे - भरे हैं खेत च... Read more

गीतिका

गीतिका- जिनमें धैर्य पराक्रम है वे,लोग शिखर चढ़ते हैं। आपाधापी करने वाले ,बस नीचे गिरते हैं।।1 मातृभूमि की रक्षा के हित ,ज... Read more

आया नवल बसंत

गीत सखी री आया नवल बसंत। हुए हैं सुरभित सभी दिगंत।। सजीले दिखते हैं तरु गात। बढ़ाते शोभा उनकी पात। छटा यह ... Read more

आया नवल बसंत

गीत सखी री आया नवल बसंत। हुए हैं सुरभित सभी दिगंत।। सजीले दिखते हैं तरु गात। बढ़ाते शोभा उनकी पात। छटा यह ... Read more

आया नवल बसंत

गीत सखी री आया नवल बसंत। हुए हैं सुरभित सभी दिगंत।। सजीले दिखते हैं तरु गात। बढ़ाते शोभा उनकी पात। छटा यह ... Read more

मुक्तक

मुक्तक- यौवन जिसके साथ सदा ही ,करता है अठखेली। यादों का मधुमास लिए वह ,बैठी निपट अकेली। मिटा महावर चूड़ी टूटी , गला हुआ है ... Read more

गीत

गीत - सखी री आया नवल बसंत। हुए हैं सुरभित सभी दिगंत।। सजीले दिखते हैं तरु गात। बढ़ाते शोभा उनकी पात। छटा यह र... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद बनकर मत रहना कभी,कोई सूखी डाल। जीवन में नमनीयता,करती बड़ा कमाल।। करती बड़ा कमाल ,राय सब यह ही देते। विनयी शांत स्व... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद बनकर मत रहना कभी,कोई सूखी डाल। जीवन में नमनीयता,करती बड़ा कमाल।। करती बड़ा कमाल ,राय सब यह ही देते। विनयी शांत स्व... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद- लगते हैं अब तक हरे, जाति- धर्म के घाव। नमक छिड़कने आ गए,फिर से आम चुनाव। फिर से आम चुनाव , करेंगे पैदा ... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलियां छंद- होता है जब नित्यप्रति ,अपनों से संपर्क। तभी चढ़े आकाश में ,संबंधों का अर्क। संबंधों का अर्क , सदा खुशहाल... Read more

कुंडलिया छंद (युवा दिवस पर)

कुंडलिया छंद- तन पर शोभित था सदा,जिनके भगवा रंग। उनकी वाणी सुन सभी ,हो जाते थे दंग। हो जाते थे दंग , देख कर धर्म पताका... Read more

कुंडलिया छंद

भिक्षा दर- दर माँगते ,नाम रखा है भूप। प्यारे सुन्दर लाल जी,दिखते बड़े कुरूप। दिखते बड़े कुरूप,लगाते फेयर लवली। पर देखो दुर्भाग्य... Read more

गीतिका

गीतिका- समरांगन सा है यह जीवन ,करो इसे स्वीकार। कभी विजय का वरण यहाँ है,और कभी है हार।।1 माता-पिता सोचते बैठे,हुए आज कंगाल, ... Read more

छंद

शुभमाल छंद 121,121 भजो प्रभु नाम। सदा सुख धाम। धरो मन धीर। हरें हर पीर।।1 प्रदूषण रोक। हरो सब शोक। करो जब सैर... Read more

छंद

शुभमाल छंद 121,121 भजो प्रभु नाम। सदा सुख धाम। धरो मन धीर। हरें हर पीर।।1 प्रदूषण रोक। हरो सब शोक। करो जब सैर... Read more

कहमुकरी

कहमुकरी- सबसे पहले कपड़ा खोले। इंच इंच फिर बदन टटोले। पूछे वह क्या मेरी मर्जी। क्या सखि साजन? नहिं सखि दर्जी।।1 जाड़ा उसस... Read more

दोहे

दोहे फटती नहीं बिवाइयाँ, जब तक अपने पैर। ज्ञात नहीं होता कभी,क्या दुख सहता गैर।।1 ओखल के अंदर रहें ,और चोट से दूर। जिनको आ... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद आया मौसम शीत का, ठिठुर रहे हैं गात। उछल- कूद बच्चे करें ,दें ठंड़क को मात। दें ठंडक को मात ,सभी को ये समझा... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद- खोया - सा मन बावरा, तके बैठकर राह। सूना- सूना जग लगे ,मिले न दुख की थाह। मिले न दुख की थाह,पिया की याद सताती। ब... Read more

मुक्तक

मुक्तक- दिया उम्मीद का भगवन,कभी बुझने नहीं देना। बढ़े हैं जो कदम आगे, उन्हें रुकने नहीं देना। मुबारक साल हो सबको,दुआ दिल से ह... Read more

मुक्तक

मुक्तक- दिया उम्मीद का भगवन,कभी बुझने नहीं देना। बढ़े हैं जो कदम आगे, उन्हें रुकने नहीं देना। मुबारक साल हो सबको,दुआ दिल से ह... Read more

मुक्तक

मुक्तक- मज़ा आए भला कैसे जगत की आशनाई में। लगा हो ध्यान जब सबका यहाँ केवल बुराई में। दुखों की शीत में बाँटा अमीरी ने न... Read more

मुक्तक

मुक्तक- मज़ा आए भला कैसे जगत की आशनाई में। लगा हो ध्यान जब सबका यहाँ केवल बुराई में। दुखों की शीत में बाँटा अमीरी ने न... Read more

दोहे

दोहे- राजनीति ने कर दिया,कितना काम महान। जाति-धर्म में वोट हित,बाँट दिए भगवान।।1 शैशव प्यारी भोर है,यौवन दिन अभिराम। वृद्धावस्... Read more

दोहे

दोहे भावों की बिंदिया लगा,कर भाषिक सिंगार। आई कविता कामिनी,सज धज मन के द्वार।।1 शब्दों के लालित्य की,अधर लालिमा साज। कविता बन ... Read more

दोहे

दोहे भावों की बिंदिया लगा,कर भाषिक सिंगार। आई कविता कामिनी,सज धज मन के द्वार।।1 शब्दों के लालित्य की,अधर लालिमा साज। कविता बन ... Read more

मुक्तक

मुक्तक- नज़र झुकाकर गलियों से जो,आया जाया करते हैं। कभी भूलकर चाहत को वे, नहीं नुमाया करते हैं। सब देख फिदा हो जाते हैं,उनकी ... Read more

गीतिका

गीतिका- ढोंग कपट को पूज्य बनाते ,मैंने अनुचर देखे हैं। बिना किए विषपान बने जो, ऐसे शंकर देखे हैं।।1 निद्रा से साधन का नाता,जो क... Read more

भूल मत जाना

गीतिका मिला है कोष जो प्रभु से लुटाना भूल मत जाना। किसी रोते हुए को तुम हँसाना भूल मत जाना।।1 बड़े अनमोल होते हैं ,सभी सं... Read more

गीतिका

गीतिका- (आधार छंद-मंगलवत्थू) कहता है संसार, चुनौती दे डालो। कभी न मानो हार,चुनौती दे डालो।।1 बनो स्वयं में सुदृढ़,त्याग दो ... Read more

गीतिका

गीतिका (आधार छंद- मंगलवत्थू) ऐसा हुआ कमाल,चुनावी मौसम में । बदली सबकी चाल,चुनावी मौसम में।।1 खींचें नेता टाँग ,मढ़ें आरोप स... Read more

मुक्तक

मुक्तक- जिसे दे खून पुरखों ने सजाया है सँवारा है। वहां पर बह रही देखो चतुर्दिक पाप धारा है। नहीं है काम हाथों को भ्रमित ह... Read more

मुक्तक

मुक्तक- जिसे दे खून पुरखों ने सजाया है सँवारा है। वहां पर बह रही देखो चतुर्दिक पाप धारा है। नहीं है काम हाथों को भ्रमित ह... Read more

गीतिका

गीतिका आधार छंद- विधाता मापनी- 1222, 1222, 1222, 1222 समांत- आर, पदांत- करना तुम। समय है कीमती इसको नहीं बेकार करना तुम। गव... Read more

गीतिका

आधार छंद- सिंधु समांत - अर , पदांत- नहीं है मापनी- 1222, 1222, 122 किसी का देश ये अनुचर नहीं है। यही है बात हमको डर नहीं है... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

कुंडलिया छंद

कुंडलिया छंद- माना ये इस जगत में,फल हैं खास तमाम। कहते हैं पर सब यही,फल का राजा आम। फल का राजा आम,सभी को सदा लुभाए। बालक वृद्ध ... Read more

मुक्तक

नशा हर चीज़ में था पर मुझे पीना नहीं आया । सलीके से कभी ऐ जिन्दगी जीना नहीं आया। मुसीबत रोज़ आ करके खुशी हर चाक कर देती, रफू ... Read more