मैं कौन हूँ यह जानने आया धरा पर।
जाने कहाँ अस्तित्व है जाने कहाँ दर।
कोई मुझे अब राह मिल जाए अगर तो।
मैं ढूंढ लूँगा स्वयं मंजिल पास जाकर॥

दिनेश कुशभुवनपुरी

Copy link to share

ओज वाणी लिखूँ

देश के नाम अपनी जवानी लिखूँ। वीरता की जहाँ में निशानी लिखूँ॥ बोस आजाद सुखदेव औ राज गुरु। फिर भगत सिंह की मैं कहानी लिखूँ॥ त्... Read more

हिंदी तो है शान हमारी

विश्व के सभी हिंदी भाषियों को समर्पित- गीत - हिंदी तो है शान हमारी। हिंदी हम सबको है प्यारी। हिंदी तो है शान हमारी॥ ????... Read more

काव्यमय जीवन

विधा- गीतिका आधार छंद- लावणी छंद समांत- आर, पदांत- दिया। बहुत दिनों के बाद मीत मैं, लेखन को फिर धार दिया, भूल नहीं पाया हूँ या... Read more

काला धन

गजल : काला धन रात रात भर सपना दिखता रहता है। काले धन में जी बस अटका रहता है। कैसे सारे काले नोट चलाऊंगा। चोरों का मन इसमें उ... Read more

मैं कौन हूँ

मैं कौन हूँ यह जानने आया धरा पर। जाने कहाँ अस्तित्व है जाने कहाँ दर। कोई मुझे अब राह मिल जाये अगर तो। मैं ढूंढ लूँगा स्वयं म... Read more