नाम: डी. के. निवातिया
पिता का नाम : श्री जयप्रकाश
जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत)
शिक्षा: एम. ए., बी.एड.
रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य
समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है.
मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com

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गिला कैसा

सभी को यार मन माफिक नहीं मिलते, अगर धोखा दे जाए तो गिला कैसा ! तुझे समझा खुदा मैंने, खता मेरी, मेरी किस्मत मुझे साथी मिला कैसा ... Read more

तुम बहुत याद आते हो - डी के निवातिया

तुम बहुत याद आते हो, तुम बहुत याद आते हो,क्यों इतना सताते हो जीने देते,न मरने देते हो क्यो इतना रुलाते !! जब से तुम चले गए द... Read more

पितृ पक्ष

पितृ पक्ष को पूजते, तन मन धन से लोग । जीवित तरसे भोज को, मरे को पंच भोग ।। Read more

गुरु चालीसा - डी के निवातिया

।।दोहा।। गुरु चरणों में शीश रख, करता हूँ प्रणाम। कृतज्ञ मुझको कीजिये, आया तुमरे धाम।। मूरख मुझको जानके, गलती जाना भूल। झोली ... Read more

मदारी या फ़रेबी - डी के निवातिया

मदारी या फ़रेबी *** मदारी हर दफ़ा कोई नया खेला रचाता है फँसाकर जाल में अपने हमें बुद्धू बनाता है सुई की छेद में हाथी घुसाता है... Read more

कोई गोरी ऐसी मिले जो - डी के निवातिया

कोई गोरी ऐसी मिले जो, मेरे दिल की रानी हो चतुर चपल चंचल हो चितवन, सुंदरता की नानी हो, देव लोक में धूम मचाती, काम देव पर... Read more

मातृभूमि का श्रृंगार करो

आज़ादी के पावन दिन पर, मातृभूमि का श्रृंगार करो देश ध्वजा का संदेश यहीं, वैर भाव का संहार करो।। जो मिट गए, जो खो गए, हाथ थाम तिरं... Read more

हुई महंगी मुबारकबाद

हुई महंगी मुबारकबाद *** हुई महंगी बहुत ही मुबारकबाद, के सोच समझ कर दिया करो, देना हो जरूरी,तो रखना हिसाब, हर घड़ी हर शख्स क... Read more

ताटंक छंद

ताटंक छंद *** *** *** चले गए गोरे भारत से, डोर थाम ली कालो ने, गोरो ने था इस को लूटा, खूँ चूसा घर... Read more

तब तुम कविता बन जाती हो

तब तुम कविता बन जाती हो *** *** *** झरनें की कल कल में, खग चहके जल थल में, सूर्य किरण तेज़ फैलाये पवन भीनी सुगंध बहाये जब प्र... Read more

आदमी है, खाता है,

आदमी है, खाता है, *********** आदमी है, खाता है, खाकर भी गुर्राता है, करता है खूब चोरी साथ में सीना जोरी कर के गर्व से चौ... Read more

रिश्ते

रिश्ते *** *** रिश्ते वही मगर, रिश्तो में रिश्तो की वो बात नहीं है, सम्बन्ध वही, मगर सम्बन्धो में ज़ज्बात नहीं है, घर में बैठ... Read more

कैसा ये सावन आया,

कैसा ये सावन आया, मुझको अबकी ना भाया, बारिश की इन बूंदों ने जी भर मुझको तड़पाया ।। बागों में कोयल बोले, कानो में मिश्री घोले, ... Read more

तू कैसा प्रेमी है

तू कैसा प्रेमी है *** देता है न माँगता सोता न जागता न रोता न हँसता भागता न थकता देखता न तकता, बोलता न बकता, सभी को लगता ... Read more

दे देना हमको माफ़ी - डी के निवातिया

मैं पतझड़ की पाती, तुम हो उपवन का फूल ! दे देना हमको माफ़ी, जो हो जाए हमसे भूल !! मै गाँव का देशी छोरा तुम ठहरी शहरी मेम, वार्ता... Read more

कोरोना वीरो को प्रणाम

कोरोना वीरो को प्रणाम *** कोरोना वीरो का अमिट बलिदान, याद रखेगा बच्चा बच्चा हिंदुस्तान, इनकी मेहनत औ दरियादिली का, गुणगान य... Read more

खुराफात हो जाए - डी के निवातिया

खुराफात हो जाए *** शैतानों की भीड़ में अगर इंसान से मुलाक़ात हो जाए, मैं समझू, की मेरी ईश्वर , अल्लाह से बात हो जाए !! झूठ... Read more

चना - स्वरचित – डी के निवातिया

*चना* ‘चना’ अपने नाम के जैसे भी खुद भी छोटा सा ही है, हाँ है तो छोटा ही मगर अपने गुण, प्रकृति, स्वभाव व आचरण से उतना ही विशाल है।... Read more

प्रेम कविता

प्रेम कविता *** जिसका प्रदर्शन हो, वो प्रेम नहीं, नयनों से दर्शन हो, वो प्रेम नहीं !! ! जो हम-तुम करते है, प्रेम वो नही... Read more

खुला आसमान चाहिए

खुला आसमान चाहिए *** *** *** चन्द ज़मीं का टुकड़ा नहीं मुझे पूरा जहान चाहिए, मैं बेख़ौफ़ परिंदा हूँ मुझको खुला आसमान चाहिए !! ! क... Read more

मिट रहा प्रकृति श्रृंगार – डी के निवातिया

****** ऋतुओं के संग-संग मौसम बदले, बदल गया धरा पे जीवन आधार, मानव तेरी विलासिता चाहत में, उजड़ रहा है नित प्रकृति का श्रृंगार, द... Read more

करवा चौथ – डी के निवातिया

सोलह श्रृंगार, सुहागिनी गहना, प्रीतम प्यार !! ! करवा चौथ अनुपम त्योंहार महत्ता प्यार !! ! याम को मात, बचायें पति प्राण, ... Read more

तेरी नज़रो में

विषय : लेखन विधा : ग़ज़ल /गीतिका शीर्षक : तेरी नज़रो में तिथि : २६/०६/२०१९ तेरी नज़रो में मेरी कीमत रही कुछ ख़ास नही, इसलिए मै... Read more

प्यारे प्यारे पापा जी

प्यारे प्यारे पापा जी *** मुझको परी बुलाता कौन प्यार से गले लगाता कौन आसमान की दुनिया के मुझे स्वप्न दिखाता कौन पापा जी, ह... Read more

बाली उम्र

बाली उम्र *** ये किस मोड़ पे जिंदगी ने खड़ा कर दिया बाली उम्र में हमे तज़ुर्बे से बड़ा कर दिया उम्र अठखेलियों की न जाने कब बीत गई न... Read more

"माँ"

***जय माता दी*** "माँ" किसी भी हाल में, हर पल खुशी देती है माँ, अपनी ज़िंदगी से सबको जीवन देती है माँ, भगवान से पहले, माँ की ... Read more

मैं होली कैसे खेलूँ

शीर्षक :- मैं होली कैसे खेलूँ रचनाकार:- डी के निवातिया ! विषय : - होली कोई रंग न मोहे भाये, मोरा दिल चैन न पाएं मै होली क... Read more

आज की नारी

आज की नारी घूँघट त्याग नज़र से नज़र मिलाने लगी है, नारी शक्ति अपनी ताकत दिखाने लगी है !! घुट-घुट के जीना बीते दिनों की बात हु... Read more

वैलेंटाइन-डे

वैलेंटाइन-डे *** देशी चमड़ी को विदेशी पहरन से सजाते है, प्रेम नाम पर पार्को होटलो में रंग जमाते है, सरेआम अश्लील फूहड़ता का नंगा न... Read more

माँ की याद

माँ की याद *** मिलता है बहुत कुछ आज नए जमाने में, फकत इस दिल को तसल्ली नहीं मिलती, पेट तो जैसे तैसे भर लेता हूँ हर रोज़ मगर, म... Read more

विजय पर्व - डी. के. निवातिया

रावण का अंत… सदियों पहले हो गया था उसके अनगिनत पुतले हम वर्ष दर वर्ष जलाते है .. पर वो मरा कहाँ ? आज भी जीवित है ! हम इंसानो के... Read more

नज़ारा - डी के निवातिया

नज़ारा *** कुछ इस तरह मुझ से किनारा कर लिया ! मेरे अपनों ने घर-बसर न्यारा कर लिया !! समझता रहा जिन्हे ताउम्र मै खुद का हमदर... Read more

कैसे कह दूँ - डी के निवातिया

कैसे कह दूँ *** *** *** कैसे कह दूँ उसको मै बेवफा, नब्ज चलती है हर पल मेरी उसका नाम पर ! कभी मुलाकात नही हुई तो क्या, मेरे दि... Read more

लिख नहीं पाता हूँ - डी के निवातिया

लिख नहीं पाता हूँ *** लिखना चाहता हूँ पर लिख नहीं पाता हूँ आँखों के सामने तैरते कुछ ख्वाब, कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ आते है क्षण भर के... Read more

“पायल”

“पायल” *** तुम जितना धीरे चलती हो, पायल उतना शोर करती है ! धड़कने दिल कि बहक जाती है, ये गज़ब का जोर करती है !! रह-रहकर यूँ सतात... Read more

काम बाकी है

अभी बहुत से काम बाकी है जुड़ना नाम से नाम बाकि है ! अपने हौसलों को उड़ान दे अभी पाना मुकाम बाकी है ! लुटाई है जो नेमत बेपना... Read more

ज़लवा दिखाओ तो जाने

ज़लवा दिखाओ तो जाने *** आज भी पहले सा मुस्कराओ तो जाने फिर से वही ज़लवा दिखाओ तो जाने !! मुहब्बत को तरस गयी है प्यासी निगाहे... Read more

ज़रा खुलने तो दो - डी के निवातिया

शेर सारे पढ़े जायेंगे तुम्हारे मतलब के ज़रा खुलने तो दो बाते तमाम होंगी वफ़ा संग बेवफाई की ज़रा घुलने तो दो !! हर रंग के गुलों से सज... Read more

धैर्य की परीक्षा – डी के निवातिया

धैर्य की परीक्षा *** अब न खाली हो किसी माँ की गोद, कोई लाल अब न फ़ना हो कब तक देनी होगी धैर्य की परीक्षा, अब कोई नियम बना दो ... Read more

हाँ मैं वही बसंत हूँ

हाँ मैं वही बसंत हूँ ...... जो कभी नई कोंपलो में दिखता था कलियों में फूल बनकर खिलता था हवाओ संग ख़ुशबू लिए फिरता था चेहरों पे ... Read more

शिक्षा ही वरदान है – डी के निवातिया

शिक्षा ही वरदान है *** कल ही की बात है गावं से मैं गुज़र रहा था बुजर्गो की जमात से चौपाल जगमगा रहा था चर्चा बड़ी आम चली थी ... Read more

गुनगुनी सी धूप — डी के निवातिया

गुनगुनी सी धूप शरद ऋतू में पीली सुनहरी गुनगुनी सी धूप कुहासे की श्वेत चादर में लिपटे रवि का रूप फुर्रफुराती कलँगी में डाल-डाल फ... Read more

शब्द विवेचन- मेरा आईना- प्रेम

शब्द विवेचन – “प्रेम” शब्द माला के “प” वर्ग के प्रथम और व्यंजन माला के इक्कीस वे अक्षर के साथ स्वर संयोजन के बना “अढाई अक्षर” ... Read more

यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला - डी के निवातिया

यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला *** हलधर का भाई, नन्द का लाला, यशोदा तेरा ललन बड़ा निराला, बड़ा निराला, मैया बड़ा निराला, यशोदा तेरा ल... Read more

काहे भरमाये - डी के निवातिया

काहे भरमाये *** काहे भरमाये, बन्दे काहे भरमाये नवयुग का ये मेला है बस कुछ पल का खेला है आनी जानी दुनिया के रंग मंच पे नहीं... Read more

अफ़सोस न कर - डी के निवातिया

अफ़सोस न कर *** मेरे वतन के हिस्से ये सौगात हर बार मिली है ! कभी गूंगो की कभी बहरो की सरकार मिली है !! किसी में हुनर सुनने ... Read more

दिवंगतों को मत बदनाम करो

दिवंगतों को मत बदनाम करो *** अपने पूर्वजो की गैरत कटघरे ला दी तुमने आकर मीठी बातो में ! सत्तर साल की कामयाबी मिटा दी तुमने ... Read more

बार-बार - गज़ल/गीतिका - डी के निवातिया

बार-बार *** वो कौन है जो दिल को दुखाता है बार-बार ! अश्क बहते नहीं दिल कराहता है बार-बार !! वफ़ा संग बेवफाई दस्तूर पुराना ह... Read more

आला-रे-आला

आला-रे-आला *** आला-रे-आला, सुन मेरे लाला, लगा ले अपनी जुबान पे ताला जो बोलेगा सच्ची सच्ची बाते, किया जायेगा उसका मुँह काला ... Read more

दो दूना बाईस

दो दूना बाईस --- बेवजह में वजह ढूंढने की गुंज़ाइश चाहिये ! काम हो न हो पर होने की नुमाइश चाहिये !! कौन कितना खरा है, किसमे कितन... Read more