Divya Ambedkar

झाँसी ,लखनऊ

Joined April 2017

जो तुम हो वो मैं नहीं
जो मैं हूँ वो तुम नहीं,
मैं सिर्फ मैं हूँ।।

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कोई अपना नहीं

कहने को तो सब अपना है, कितना सुंदर यह सपना है, मायका है ,ससुराल भी है, फिर भी कोई अपना ठिकाना नहीं, अपना बना कर कोई अपनाता नहीं,... Read more

रोशनी का देवता

रोशनी का देवता -------------------------- सूरज पहले भी उगता था,रोशनी भी होती थी,,,,,लेकिन ये रोशनी सिर्फ एक वर्ग के हिस्से आती... Read more

सुबह की चाहत

सुबह की मंद मंद ठंडक जब मुझको छूती है,, अलसाई सी मेरी आँखें बस तुमको ही खोजा करती है,, मिश्री सी मीठी बोली कानों में घुल जाती है,,... Read more

संविधान

●●●●●●●●●●●●●●●● मैं भारत का संविधान मैं सबसे कुछ बोल रहा हूँ...... चप्पा चप्पा कण कण में अपना रस घोल रहा हूँ..... समानता भाईचा... Read more

डेक्सटर मेरे साथी

जिंदगी में जब अंधेरा था तुम आये तो रोशनी लाये, सुख का साथी तो हर कोई बना तुम दुःख में देवदूत बन आये, अपने संग खुशियाँ हजार लाये,... Read more