दिनेश एल० "जैहिंद"

मशरक, सारण ( बिहार )

Joined January 2017

मैं (दिनेश एल० “जैहिंद”) ग्राम- जैथर, डाक – मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन को अपने जीवन का अंग बना लिया और निरंतर कुछ न कुछ लिखते रहने की एक आदत-सी बन गई | फिर इस तरह से लेखन का एक लम्बा कारवाँ गुजर चुका है | लगभग १० वर्षों तक बतौर गीतकार फिल्मों में भी संघर्ष कर चुका हूँ ।

Books:
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Awards:
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[[[ ग़ज़ल ]]]

ग़ज़ल / दिनेश एल० "जैहिंद" "इरादे को मकसद बनाकर तो देखो" बहर - १२२__१२२__१२२__१२२ कभी भी नजर तुम मिलाकर तो देखो ! किसी हुस... Read more

[[[ ग़ज़ल ]]]

[[[ ग़ज़ल ]]] काफिया -- अट रदीफ -- रहे हैं बह्र -- २२१_२१२२_२२१_२१२२ नेता हमारे कर के वादे पलट रहे हैं ! ये तो हमें भी जैसे... Read more

[[[ ग़ज़ल ]]]

ग़ज़ल --- "मगर वह दबदबा जाता रहा बाजार होते ही" १२२२_१२२२_१२२२_१२२२ काफिया -- बाजार रदीफ -- होते ही अकेले हूँ... गये बेटे.... Read more

छोड़िए भी बहाना चले आइए !

छोड़िए भी बहाना चले आइए // दिनेश एल० “जैहिंद” 212 212 212 212 छोड़िए भी बहाना चले आइए,, दिल में है जो बताना चले आइए ।। ... Read more

काश हम तुम........

काश हम-तुम....... // दिनेश एल० “जैहिंद” 2122 1212 22 काश हम तुम मिले नहीं होते,, फूल अपने खिले नहीं होते ।। आँख जो... Read more

......... सेवा करना आदत है !

.........सेवा करना आदत है ! // दिनेश एल० “जैहिंद” उनको वादा करके मुकरना आदत है । हमें दुष्कर राहों पर चलना आदत है ।। जल्दी... Read more

मैं गिरा इतना नहीं हूँ........

मैं गिरा इतना नहीं हूँ....... // दिनेश एल० “जैहिंद” 2122 2122 2122 22 आज का वादा हुआ है _ मैं ना कल जाऊँगा । मैं भी... Read more

प्यार क्यूँ आजमाया नहीं

प्यार क्यूँ आज़माया नहीं // दिनेश एल० “जैहिंद” 212 212 212 प्यार क्यूँ आज़माया नहीं ।। साथ तुमने निभाया नहीं ।। मैं... Read more

दिलों में कहीं.......

** दिलों में कहीं..... ** // दिनेश एल० “जैहिंद” 122 122 122 122 मिरा दिल तो*अब मनचला हो रहा है । दिलों में कहीं _... Read more

कौन आया ..... ?

कौन आया है.....? // दिनेश एल० “जैहिंद” 2122 2122 212 कौन आया है _ये आकर देखिए । शीघ्र छाती से _लगाकर देखिए ।। ... Read more

ग़ज़ल : .......... मचल मत जाना !

_______ मचल मत जाना ! @ दिनेश एल० "जैहिंद" 21 22 11 22 22 देख गुल कोई मचल मत जाना, समझ रख संग बहल मत जाना । इश... Read more

.......... निगल जाना जरूरी था ।

......... निगल जाना जरूरी था । //दिनेश एल० “जैहिंद” 1222 1222 1222 1222 दिखाकर अक्ल थोड़ी भी निकल जाना जरूरी था । ... Read more

ग़ज़ल : .... दिल पे मेरे गिराके बिजलियाँ !

ग़ज़ल: दिनेश एल० "जैहिंद" एक बुत से हम तो टकराए बहुत । दिन में तारे देख चकराए बहुत ।। दिल की मेरे बात समझे ही नहीं,, प्यार... Read more

#ग़ज़ल मैं गुनगुनाना चाहता हूँ ।

ग़ज़ल मैं गुनगुनाना चाहता हूँ । 2122 2122 2122 क्या कहूँ क्या मैं बताना चाहता हूँ । नाम मैं भी अब कमाना चाहता ह... Read more

ग़ज़ल : ..... बूढ़ा भी जवानी सोचता है ।

….. बूढ़ा भी जवानी सोचता है । वाह ! बूढ़ा भी जवानी सोचता है । देश अपना तो* कुरबानी सोचता है ।। सब्र उसको है नहीं पाया जो* उस... Read more

ग़ज़ल : ..... बिखर गए घर-बार आजकल !!

..... बिखर गए घर-बार आजकल !! दिलों में नहीं है वो प्यार आजकल । गायब है घरों से संस्कार आजकल ।। नेताओं के दबदबे से सारे परेशान... Read more

ग़ज़ल : ..... प्यार तेरा मिला नहीं होता ।

..... प्यार तेरा मिला नहीं होता । 2122 1212 22 प्यार तेरा मिला नहीं होता । खत्म, ये फासला नहीं होता । तुम अगर एक ... Read more

ग़ज़ल : .... बने पहरेदार रहते हो ।

..... बने पहरेदार रहते हो । काम पे मुस्तैद बने पहरेदार रहते हो । फर्ज पे कुर्बान गजब तय्यार रहते हो ।। कीमती मत लेके रहनुमा ग... Read more

ग़ज़ल : ...... तुमको लुभाता कौन है !

..... तुमको लुभाता कौन है ! 2122 2122 212 मर्द का घर फिर बसाता कौन है ।। छोड़कर तुमको लुभाता कौन है ।। प्यार माँ... Read more

ग़ज़ल : ..... आशिक़ तो हारा जाएगा ।

..... आशिक तो हारा जाएगा । 2122 2122 212 दूर जब उनसे किनारा जाएगा । आशिक फ़क़त बेसहारा जाएगा ।। साँस कबतक रोक के र... Read more

ग़ज़ल : ..... सुलगता हुआ दर्द देखा है ।

..... सुलगता हुआ दर्द देखा है । तुम्हारे दर्द में हमने हमारा दर्द देखा है । तुम्हारे फ़र्ज़ में हमने ख़ज़ाने फ़र्ज़ देखा है ।। ... Read more

ग़ज़ल : ..... ले सिसकियाँ रोता रहा !

...... ले सिसकियाँ रोता रहा ! 2122 2122 212 दिल वही खामोशियाँ बोता रहा । तन मिरा तन्हाइयाँ ढोता रहा ।। कब खबर उनको म... Read more

ग़मे इश्क में हूँ बीमार.....

ग़मे इश्क में हूँ बीमार...... // दिनेश एल० “जैहिंद” गमे इश्क़ में हूँ बीमार, चले आइए ।। रहम खाइए हे सरकार, चले आइए ।। लरजत... Read more

ग़ज़ल: मज़ा आ गया ।

ग़ज़ल: मज़ा आ गया // दिनेश एल० “जैहिंद” ग़म जहाँ से छिपाया मज़ा आ गया, गीत खुशी_का गाया मज़ा आ गया । खुद रोया_और लोगों को हँ... Read more

ग़ज़ल: मुझे बहकाने लगी है ।

ग़ज़ल: मुझे बहकाने लगी है । // दिनेश एल० “जैहिंद” जब से खामोशियाँ मुस्काने लगी हैं, मेरी कुछ ख्वाहिशें सुगबुगाने लगी हैं । ... Read more

..... पत्थर हुआ नहीं जाता !

...... पत्थर हुआ नहीं जाता । // दिनेश एल० “जैहिंद” दिल से बाहर हुआ नहीं जाता । ना करो बेघर हुआ नहीं जाता ।। जुबान से दो दु... Read more

...... ये जवानी कुछ नहीं !

ये जवानी कुछ नहीं,,,,, ¡ // दिनेश एल० “जैहिंद” ये जिंदगी चार दिनों की जिंदगानी कुछ नहीं । हमारी जिंदगी में है सादगी कहानी कुछ न... Read more

......देशभक्त पहरेदार रहा हूँ मैं !

........देशभक्त पहरेदार रहा हूँ मैं @ दिनेश एल० “जैहिंद” देश पर कुर्बां होने के लिए बेक़रार रहा हूँ मैं । ना मर सका देश के... Read more

.... दीवानापन छोड़ जाऊँगा !

दीवानापन छोड़ जाऊँगा ! // दिनेश एल० "जैहिंद" भरत-सा अपनापन छोड़ जाऊँगा ।। यादों में रहूँ प्रेमधन छोड़ जाऊँगा ।। कृष्ण-सा... Read more

..... मोम-सा वो पिघलता ही रहा !

मोम-सा वो पिघलता ही रहा ! // दिनेश एल० "जैहिंद" हाल-ए-जिंदगी पर सुबकता ही रहा ।। चक्षु से झर-झर अश्क बहता ही रहा ।। लिया क... Read more

ग़ज़ल : इस तरहा छाए न होते !

इस तरहा छाए ना होते ! आप जो मुझको इतना.. भाए न होते । आप.. मेरे जीवन में... आए न होते ।। अगर मैं अपनी जुल्फों को ना झटकत... Read more

ग़ज़ल : बच... के चली आया करो !

बच... के चली आया करो ! 223 223 223 223 आने का मन न हो फिर भी मेरी गली आया करो । दीदार तुम्हारा हो कि ... Read more

ग़ज़ल : दिल में आता कभी-कभी

दिल में आता कभी-कभी जग न भाता कभी-कभी । दिल में आता कभी-कभी ।। देख छल-कपट बे-शर्मी,, मन तो रोता कभी-कभी ।। आकर फँसा जह... Read more

ग़ज़ल : ...... हादसा हो जाने दो ।

...... हादसा हो जाने दो । आज कोई गजब हादसा हो जाने दो ।। दो दिलों को यूँ आपस में टकराने दो ।। ख्वाहिशें दिलों में जब्त थीं ... Read more

....... झूठ मुआ रह गया !

..... झूठ मुआ रह गया ! बीत गया अच्छा वक्त बुरा रह गया, चली गयी सच्चाई झूठ मुआ रह गया ।। आदमी की भीड़ में कोई इंसान नहीं, ई... Read more

? वो माँ को ढूढ़ता रहा ?

? वो माँ को ढूढ़ता रहा ? ?दिनेश एल० “जैहिंद” वो पत्थरों में ही खुदा को पूजता रहा । मोहब्बतों में उसकी वो डूबता रहा ।। करत... Read more

..... मुहब्बत मेरी पुरानी मिल गयी !

..... मुहब्बत मेरी पुरानी मिल गयी ! @@@@ दिनेश एल० “जैहिंद” बरसों खोई मोहब्बत मेरी पुरानी मिल गयी । मुरझाई मेरी काया को फिर ज... Read more

ग़ज़ल : वो मेरा साया है......

ग़ज़ल / दिनेश एल० "जैहिंद" अलग नहीं मुझसे वो मेरा साया है । मैं आधा वो आधा हम इक काया हैं ।। तू बायाँ मैं दायां दोनों इक तन ह... Read more

गजल / मद में नहीं.....

गजल / दिनेश एल० "जैहिंद" मद में नहीं आनंद तो सादगी में है सादगी का मोल बड़ा ज़िंदगी में है !! यूँ तो पैसे की क़ीमत कुछ... Read more

**** आसमां भी नीचे झुक जायेगा_____ !!!!

गजल /दिनेश एल० "जैहिंद" आसमां भी नीचे झुक आएगा जो दिल में भर लो उमंग | बेजां इंद्रधनुषी तस्वीर में भी भर लोगे तुम जी भरके रंग ||... Read more

#### रिश्तों से भी कटकर कोई सजता है क्या,,,,,,,,

#ग़ज़ल /दिनेश एल० "जैहिंद" 2222 2222 2222 परिवारों से भी हटकर कुछ बनता है क्या ! रिश्तों से भी कटकर कोई सजता है क्या !! इन ख... Read more

*** नादानी में नादानी कर बैठे ***

ग़ज़ल/दिनेश एल० "जैहिंद" नादानी में नादानी कर बैठे | अन्जाने में शैतानी कर बैठे || डूबे हम ऐसे आँखों में उनकी,, मोहब्बत हम त... Read more

बेटियाँ

#बेटियाँ / दिनेश एल० "जैहिंद" ( १ ) बसी है इनमें मानव जन्म की कुंडलियाँ | छुपी हैं आदि से अंत तक की कहा... Read more