जाता हुआ दिसम्बर

मयस्सर डोर से फिर एक मोती झड़ रहा है , तारीखों के जीने से दिसम्बर उतर रहा है कुछ चेहरे घटे , चंद यादे जुड़ी गए वक़्त में, ... Read more

में रात भर लिखता रहा

​दर्द कागज़ पर,​ मेरा बिकता रहा,​ ​मैं बैचैन था,​ रातभर लिखता रहा..​ ​छू रहे थे सब,​ बुलंदियाँ आसमान की,​ ​मैं सितारों के बीच... Read more