Durga Bondopadhay

Ranchi

Joined November 2018

कभी कभी मुक्कमल नहीं हो पाता एहसासों को लवसों से बायां करना,तब लिख लेती हूँ।

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काश!

काश! मैं भाँप होती ,और तुम हवा उड़कर तुममें समा जाती।। काश! मैं रेत होती, और तुम समन्दर किनारे में तुमसे मिल जाती।। काश! ... Read more

माँ

लल्ला बोला, माँ से, माँ मैं चाँद से खेलूंगा।। माँ बोली, प्यारा लल्ला मेरा, तू चाँद कैसा लेगा??? लल्ला था बड़ा हठी, चाँद से... Read more