Vikas Sharma Daksh

अम्बाला कैंट

Joined March 2017

अम्बाला कैंट हरियाणा में रहने वाले, विकास शर्मा ‘दक्ष’, हिमाचल विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। निजी क्षेत्र की कंपनियों में सेल्स विभाग में तीस साल तक कार्यरत रहे। इन्होने भारत भर में भ्रमण कर ज़िन्दगी को करीब से देखा है। आज़ाद ग़ज़ल के माध्यम से इन्होने अपने खट्टे-मीठे अनुभवों को पाठकों तक पहुँचाने का प्रयत्न किया है।
इनकी आज़ाद ग़ज़लें और कविताएं देश-विदेश की कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। साँझा काव्य संग्रह “मुसाफिर”, “मृगनयना” और साँझा ग़ज़ल संग्रह “गुलजार” का सत्यम प्रकाशन द्वारा प्रकाशित । साहित्य सागर द्वारा “काव्य गौरव” सम्मान । भोपाल की अग्रणी साहित्यिक संस्था रंजन कलश के आगामी काव्य संग्रह में भी इनकी रचनाएँ सम्मिलित की गयी हैं । इसके इलावा एकल ग़ज़ल संग्रह “ज़र्द पत्ते” भी जल्द प्रकाशित हो रहा है।

Books:
साँझा काव्य संग्रह
मुसाफिर
मृगनयना
सांझा ग़ज़ल संग्रह
गुलज़ार

Awards:
काव्य गौरव ……. साहित्य सागर द्वारा

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आफत में जान

हजूर, बिला वजह जो मुस्कराए जा रहे हो, आफत में क्यों अपनी जान लाए जा रहे हो, ये आँखों की शोखीयाँ, वो लबों की लरजिश, अजाब तो सब ह... Read more

तन्हाईयाँ

नाम लिख के मिटाने का अज़ाब तो नहीं किया, कहीं फिर हमें भुलाने का ख्वाब तो नहीं किया, आईने में से इक अजनबी सा शख्स झाँकता है, कही... Read more

हबीब

ये मुहब्बत करने वाले भी अजीब निकले, जज़्बातों के रईस, दिल के ग़रीब निकले, झूठे थे वो तमाम अफ़साने सच्चे इश्क़ के, हकीकत से दूर, ख्व... Read more

रतजगे

सरक के तकिये ने ख्वाब जो तोडा, नाता करवटों ने बिस्तर से जा जोड़ा, बेवज़ह नाराज़ और लौटती ही नहीं, क्यों मैंने ठीकरा नींद के सर फोड़... Read more

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी भी अब चाय की प्याली सी है, चुस्कियां लेते लेते ये थोड़ी खाली सी है, वक़्त के साथ ठंडे होते गर्म अहसास, शक्ल-ओ-सूरत भी ज़रा... Read more

मय-ए-मुहब्बत

भूली जाती नहीं मुहब्बत इस ज़माने में, कोशिश तो बहुत की हमने भी मैखाने में, आ आ के तंग करती थीं तन्हाइयों में, बहुत मर्तबा बंद की... Read more

घर आ गया

मैं यूँ खुद के बिखरे पुर्ज़े सिमटाता, घर आ गया, ज्यों चरवाहा अपनी भेड़ें लौटाता, घर आ गया, हर बशर बिकने को बैठा है, रिश्वत के बाजा... Read more

किताब

जाने पढ़कर आयें हैं आज वो कौन किताब, उनके हर जवाब पर हो रहे हैं हम लाजवाब, ख़ामोशी से चले गए, तिरछी निगाह से देखकर, खुदा जाने अब ... Read more

यादों को तुम्हारी.......

यादों को तुम्हारी बड़े करीने से संजो लेता हूँ मैं, आँखों को जुदाई में अश्कों से भिगो लेता हूँ मैं, मौसमे-हिज़्राँ में वक़्त गुज़ारना... Read more

लिपट जाएं !

आएं आगोश में और बाहों में सिमट जाएं, सुबह की रौशनी जैसे अँधेरे पर लिपट जाएं, मुद्दतों बाद वो हों रूबरू हमसे, और आते ही हमसे चिप... Read more

चाँद बनके जो उतरे हो ज़मीं पर,

चाँद बनके जो उतरे हो ज़मीं पर, किसी कि नज़र ना लगे, चुपके से आ जाओ छत पर, किसी को ख़बर ना लगे, चुराया है तुमने, यह रूहानी नूर कहाँ ... Read more

आइना

आइना भी अब मुझसे पहचान मांगता है, चेहरे पर पहले सा ईमान मांगता है, बेशक़ रहे हम उम्र भर सफर में, रास्ता क़दमों के निशान मांगता है... Read more

इक गुलाब दे जाओ,

खार बहुत हुए अब इक गुलाब दे जाओ, ताउम्र की वफाओं का हिसाब दे जाओ, तपते सहरा सी खुश्क हुई पड़ी हैं आँखें, इन्हें अश्कों का मौसमी ... Read more

बर्बादियों को जा गले मिले !

जो फेर लेते हो चेहरा ज्यों ही नज़र मिले, लगता है कि हम हैं कहीं पर पहले मिले, इत्तेफ़ाक़न या गहरी साज़िश है कोई, फिर जो आ चाहतों के... Read more

मुहब्बत, इक एहसास

मुहब्बत इक एहसास, के इलावा क्या है, समझो तो सब कुछ, वर्ना क्या है, ज़ज्बा है किसी की चाहत का, चाहने का, उसे हासिल करने के सिवा ... Read more