Chandrvir Solanki

Joined November 2018

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जब तक दुःखी जगत की जननी

जब तक दुःखी जगत की जननी। जग की किस्मत नहीं सुधरनी।।,,,1 हाहाकार मचा है जग में। पापों का बंधन है पग में। दूर तलक उम्मीदें धुंध... Read more