Chhaganlal garg

जीरावल , सिरोही , राजस्थान !

Joined December 2017

छगन लाल गर्ग “विज्ञ”!
जन्मतिथि :13 अप्रैल  1954
जन्म स्थान :गांव -जीरावल तहसील – रेवदर जिला – सिरोही  (राजस्थान )
पिता : श्री विष्णु राम जी
शिक्षा  : स्नातकोतर  (हिन्दी साहित्य )
राजकीय सेवा :  नियुक्ति तिथि 21/9/1978 (प्रधानाचार्य, माध्यमिक शिक्षा विभाग, राजस्थान )
30 अप्रैल  2014 को राजकीय सेवा से निवृत्त ।
प्रकाशित पुस्तके :  “क्षण बोध ” काव्य संग्रह गाथा पब्लिकेशन,  लखनऊ  ( उ,प्र)
“मदांध मन” काव्य संग्रह,  उत्कर्ष प्रकाशन,  मेरठ (उ,प्र)
“रंजन रस” काव्य संग्रह,  उत्कर्ष प्रकाशन,  मेरठ (उ,प्र)
“अंतिम पृष्ठ” काव्य संग्रह,  अंजुमन प्रकाशन,  इलाहाबाद  (उ,प्र)
“तथाता” छंद काव्य संग्रह, उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ (उ.प्र.)
“विज्ञ विनोद ” कुंडलियाँ संग्रह , उत्कर्ष प्रकाशन मेरठ (उ.प्र. ) ।
“विज्ञ छंद साधना” काव्य संग्रह, उत्कर्ष प्रकाशन!
साझा काव्य संग्रह – लगभग १५
सम्मान :  विभिन्न साहित्यिक मंचो से लगभग सौ के आस-पास!
वर्तमान मे: बाल स्वास्थ्य  एवं निर्धन दलित बालिका शिक्षा मे सक्रिय सेवा कार्य ।अनेकानेक साहित्य पत्र पत्रिकाओ व समाचार पत्रों में कविता व आलेख प्रकाशित।
वर्तमान पता : 2 डी 78 राजस्थान  आवासन मंडल,  आकरा भट्टा, आबूरोड जिला – सिरोही  (राजस्थान )307026
मोबाइल 9461449620
व्हाट्सअप नंबर – 9694728934
EMAIL: Chhaganlaljeerawal@gmail.co

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प्रभात

||मतगयंद सवैया || लोचन रश्मि निहार मनोहर ,अंतर नेह अलौकिक जागे ! क्षीर प्रभात चिरंतन बिंबित, नूतन अंबर निश्छल लागे ! नागर श्याम... Read more

आँखें

विषय - नयन / आँखें विधा - गीत ! वृहद स्वप्न ले उड़ती पाँखे ! देखी है मैंने वे आँखें !! संमोहन जादू से लज्जित ! निखरे नित न... Read more

मेला

विषय- मेला ! विधा - मंदाक्रांता छंद! विधान~ [{मगण भगण नगण तगण तगण+22} ( 222 211 111 221 221 22) 17 वर्ण, यति 4, 6,7 वर्णों... Read more

आलस

||विधाता छंद || विधान - २८ मात्रा, १४- १४ मात्रा पर यति,चार चरण, दो दो चरण समतुकांत, अंत गुरु गुरु ! ( १,८,१५ व २२ वी मात्रा लघु) ... Read more

श्रृद्धांजलि

श्रृद्धांजलि विधाता छंद! जवानों की दिलेरी में सदा आधार पाया है! रखी है लाज माता की सदा वादा निभाया है! लड़े हैं देश रक्षा म... Read more

नैन

विषय- नैन! विधा- छंद आधारित गीतिका! मापनी- 2122,2122,2122,2122 हैं कटीले नैन तेरे देख प्रेमी भूल जाते ! रोशनी के तेज से ही ... Read more

बंधन

विषय - बंधन! विधा - छंद आधारित गीतिका 2122,2122, 2122, 2122 देह बंधन प्राण से मन पिंजरे में कैद साथी ! बदलते प्रिय रात दिन है... Read more

भोर का श्रृंगार

||गीतिका आधार छंद मनोरम || वाचिक मापनी : 2122, 2122 =14 मात्रा भोर का श्रृंगार साथी नेह की आभा नवेली ! गूंजते पक्षी निराले क... Read more

बाँसुरी

विषय - बाँसुरी! विधा - विधाता छंद ! विधान - २८ मात्रा, १४- १४ मात्रा पर यति,चार चरण, दो दो चरण समतुकांत, अंत गुरु गुरु ! ( १,८,१५... Read more

नील गगन

विषय- नील गगन! विधा - विधाता छंद ! विधान - २८ मात्रा, १४- १४ मात्रा पर यति,चार चरण, दो दो चरण समतुकांत, अंत गुरु गुरु ! ( १,८,१५ ... Read more

बहारें

विषय - बहारें ! विधा - कुकुभ छंद ! विधान – ३० मात्रा, १६, १४ पर यति l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l अंत मे २,... Read more

चंचल

विषय- चंचल !! हंस दोहा विधान - १४ गुरु २० लघु ! मृदुल मुदित मन माधुरी, नैना घेरी लाज! मुग्धा मधुमय मोहिनी , चंचल चित अंदाज !!... Read more

रोटी

||रोटी || लघुकथा पुलियें की चढान घुटनों के दर्द को बढा देती है पर मंदिर जाने की आस्था नयी तरावट के साथ कदमो में जोश भरने लगती है... Read more

कुहासा

विषय - कुहासा! विधा -कुकुभ छंद ! विधान – ३० मात्रा, १६, १४ पर यति l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l अंत मे २,२!... Read more

भक्ति गीत

||सरसी छंद पर आधारित गीतिका|| प्राण चहे माधव प्रियवर को, धूप खिली नव भौर! धर्म कर्म की किरणें उठती , बढ़ा भक्ति का ज़ोर !! शा... Read more

किसान

विषय- किसान !! ||कलाधर छंद|| विधान---गुरु लघु की पंद्रह आवृति और एक गुरु! अर्थात 2 1×15 तत्पश्चात एक गुरु। इस प्रकार 31 वर्ण प... Read more

माँ

विषय - मां ! विधा- दुर्मिल सवैया ! दुर्मिल सवैया । विधान - ८ सगण, २४ वर्ण । ममता चित मे रहती नित मां , तुम हो अवलंब अलौकिक ... Read more

आँधी

कुण्डलियाँ छंद । आँधी अंतर में उठी ,देखा जड संसार । नैनो की आशा गयी ,लूटा मन व्यवहार । लूटा मन व्यवहार, देह छल ठहरे कैसे । मिल... Read more

अभिनय

संस्मरण विस्मित सा उस नौजवान को गौर से देखने पर भी यादास्त में नही आ रहा , वह पैरो मे झुकने के बाद बोला "सर , मै विक्रम हूँ , आप... Read more

किशोरावस्था तनाव ।

विषय किशोरावस्था मे मानसिक तनाव व कारण । विधा - गद्य । किशोरावस्था जीवन का परम मंगल काल हैं मनुष्य की श्रेष्ठता की शुरुआत का शुभ द... Read more