ख़्वाहिश है कि खुद को लिखूँ मैं

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प्रतिबंधित बेटियाँ

मेरी कलम से... कितनी प्रतिबंधित होती है बेटियाँ जन्म से ही परम्पराओं का आवरण पहना कर कितनी आसानी से छली जाती है पूरी उम्र ... Read more

सुनो रंगबाज

सुनो रंगबाज तुम आदत से बाज नहीं आओगे अपनी कला दिखाते रहे कभी रंगों से कभी रेतों पे उस से भी मन ना भरा तो सीख लिए पानी में कला... Read more

सुनो रंगबाज

मेरी कलम से... सुनो रंगबाज अशोक हाँ, मैं तुम्हारी माँ गंगा नहीं पहचान पाये ना तुम अपनी माँ को भी थोड़ी कुरूप हो गई हूँ ... Read more