मैं वर्ष 2000 का आईआर टी एस (Indian Railway Traffic Services) का अधिकारी हूँ| मैं वर्ष 2016- अप्रेल में अपर निबंधक, रेल दावा अधिकरण (Railway Claims Tribunal) अहमदाबाद से सेवानिवृत्त हुआ|
मेरी दो पुस्तकें- “भाषाई हुड़दंग” और “मैखाने की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं” प्रकाशित हो चुकीं हैं एवं तीसरी पुस्तक “They Said It” प्रकाशन के लिए तैयार है|

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सत्यनारायन की कथा

सत्यनारायन की कथा कथावाचक पंडित की पूजा विधि से, तंग आकर, तिलमिलाकर | दस यजमान भाग गए, ‘क... Read more

अलगाववादी

काश्मीर में बरस रहे हैं, पत्थर फौज-रिसालों पर, सत्तलोभी मस्त कलंदर, खुश हैं अपनी चालों पर| जाता है तो जाय भाड़ में, देश हमारा क्या ... Read more

बुलावा

बुलावा मौत ने इक दिन कहा सपने में आ कर, मैं तुझे आई हूँ लेने, सामना कर| काम सारे पूरे कर ले, जो बचे हों, अन्यथा ले जांयगे,... Read more

नज़्म - मिलन

मिलन छोड़िये भी, क्या करेंगे उनसे मिल कर, बात ना की जायगी, हम से सम्हल कर| बात भी करली, तो समझूँगा मैं कैसे, मायने हैं दोहर... Read more

नज़्म -- "वो"

अगर इमकान भी होता, ठिकाने लग अक़ल जाती, न जाता ज़ानिबे क़ातिल, तो कैसे कर क़तल जाती? न जाने क्या हुआ जाता है, मेरी सख़्त तबियत को, क... Read more