एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण !
सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन !
एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित !
e काव्यसंग्रह “कहीं धूप कहीं छाँव” एवं “दस्तक समय की ” प्रकाशित !

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" कल की चिंता कौन करे " !!

" कल की चिंता कौन करे " !! आज तुम्हारे नाम है अपना , कल की चिंता कौन करे ! समय यहाँ अठखेली करता , अपने सारे सपन झरे !! हाड़त... Read more

" फसलें खूब धुली इस बार " !!

पानी ने सब पानी फेरा , फसलें खूब धुली इस बार ! हाथ सभी के खाली खाली , वाह रे खूब करी करतार !! आँखों में कुछ दिवास्वप्न थे , उ... Read more

" चलना बड़ा कठिन है " !!

नई राह है नई डगर है , चलना बड़ा कठिन है !! रिश्तों के अनुबंध नये हैं , नई नई सौगंध ! देह सजी है मनसिज नाचे , टूट गये कसे बंध !... Read more

" आँखों से मोती ढलते हैं " !!

पीड़ा से अनबन हो जाये , आँखों से मोती ढलते हैं ! आशाओं के दर्पण चटके , छन से तो आवाज हुई ना ! यायावर सा जीवन भटके , कभी कोइ मन... Read more

" जीवन इक मधुगान है " !!

मौन निमंत्रण हमें मिल रहा , अधरों पर मुस्कान है !! मन की बात कही ना जाये , ऐसे धड़के प्राण हैं !! सभी सुधारस यहाँ चाहते , यह न... Read more

" मुस्कानें हैं खोई खोई " !!

कहीं सोच में डूबे डूबे , मुस्कानें हैं खोई खोई !! कदम मिलाकर साथ चले तो , कभी डगर अनजान मिली है ! जिन सपनों को बुन डाला था , ... Read more

" मैं हार नहीं मानूँगी " !!

मैं हार नहीं मांनूगी !! गिद्ध दृष्टि देखी है , बचपन से पचपन तक ! आँखें भेद रही हैं , अंदर तक , चिलमन तक ! ना हारी हूँ , हारूँ... Read more

" भूल रहे हैं आज ठगन को " !!

हुए मुक्त फिर चले गगन को !! कैद किया था जिसने हमको , उसका मन बदला बदला है ! जी भर पहले खेला हमसे , आज उसी का मन मचला है ! खूब... Read more

" फूल खिले हर डाली " !!

समय फिसलता बालू जैसा , हम देते हैं ताली ! घड़ी , प्रहर , रात - दिन , बीते , हाथ सदा हैं खाली !! नियति से सब बंधे हुए हैं , हाथ... Read more

" भाग बदा भी यहाँ टरे " !!

आज तुम्हारे नाम है अपना , कल की चिंता कौन करे ! समय यहाँ अठखेली करता , अपने सारे सपन झरे !! हाड़तोड़ मेहनत करते तब , अपनी यहाँ ... Read more

" आओ मेरे प्यारे लल्ला " !!

मेरी अँखियाँ करें इंतज़ार , आओ मेरे प्यारे लल्ला !! दूध बिलोया माखन काढ़ा ! मेहनत का रंग होता गाढ़ा ! चखो माखन तो मेरो सरकार , च... Read more

" पलक चढ़ी आशाओं में " !!

जंजीरों से हाथ बंधे हैं , पड़ी बेड़ियाँ पाँवों में ! पीड़ा झेल रहे बरसों से , खुशबू नहीं हवाओं में !! भेदभाव बचपन से पाया , नज़रे... Read more

" मैं तो बस मनुहार करूँ हूँ " !!

नख शिख तक श्रंगार करूँ हूँ ! जी भर तुझको प्यार करूँ हूँ !! चाँद सलोना घर उतरा तो , महक उठी घर की फुलवारी ! तुझको पाना एक तपस्य... Read more

" मन टेढ़ा चलता है " !!

हम तुम सारे दौड़ा करते , चैन किसे मिलता है ! समय यहाँ पर भरे कुलाँचे , पग पग पर छलता है !! कुछ पाने की सदा लालसा , मन में जाग... Read more

" सताने लगे हैं " !!

ग़ज़ल / गीतिका बाते ही बातें , बनाने लगे हैं ! यादों में अकसर , सताने लगे हैं !! अवसर को खोना , नहीं जानते वे ! सोये जो उनको... Read more

" सताओगे कब तक " !!

इरादे तुम अपने , बताओगे कब तक ! हमें यों ही जालिम , सताओगे कब तक !! अभी कहने को तो , बहुत कुछ है बाकी ! फसाना ये दिल का , सुनाओ... Read more

" इसे लाज कह दें " !!

ग़ज़ल / गीतिका ज़रा समय ठहरे , चलो आज कह दें ! छिपाये कभी जो , सभी राज़ कह दें !! तुम्हारी खरीदी , हमारे बिके हैं !! अनायास हम प... Read more

" गढ़ते नई कहानी हैं " !!

मदहोशी का नशा चढ़ा तो , कहते इसे जवानी हैं ! लहरों का उन्माद यहाँ है , सिर पे चढ़ता पानी है !! जब किशोर से हुए जवां तो , दुनिया... Read more

" अधरों पर मनुहार है " !!

गीत बरस गये हैं जम के बदरा , बरखा संग बहार है !! पुलक रही है धरा हरित हो , खुशियों का त्यौहार है !! चेहरे की रंगत बदली है ... Read more

" पीड़ा किसे सुनाऊँ " !!

होंठ सिले हैं मेरे देखो , पीड़ा किसे सुनाऊँ !! इस पीड़ा में घुटता दम है , व्यक्त नहीं कर पाऊँ !! अधरों का कम्पन खोया है , इनको ... Read more

" सांझ ढलती है चले आना " !!

सांझ ढलती है चले आना !! डूबा डूबा है रवि , झुकी सी पलकें कहीं ! हवाएं थम गई हैं , नहीं थोड़ी सी नमी ! गगन भी झुक सा गया , छा ... Read more

" खूब संभाला था " !!

हालात जहाँ बदले , हर ओर उजाला था ! जो खूब हँसा हम पर , उस मुँह पर ताला था !! मेरे खेत पड़े सूने , टपरी खाली खाली ! उस द्वार पे ... Read more

"" फिर उठी नहीं नज़र " !!

ग़ज़ल / गीतिका आपसे मिली नज़र , फिर उठी नहीं नज़र !! क्या कहें , सुने भला , कुछ नहीं मिली खबर !! चढ़ रही खुमारियाँ , दिख रहा... Read more

" आँख में आँसू मगर रोना नहीं " !!

चैन रातों का कहीं खोना नही ! दूर हमसे आप बस होना नहीं !! ठोकरें कितनी मिली हैं थक चुके ! आज सपने फिर कहीं बोना नहीं !! खो गय... Read more

" खूब सहेजें प्यार से " !!

स्वाति बूँद बनी मोती तो , खूब सहेजें प्यार से ! और आँख से ढलते मोती , बहते हैं निस्सार से !! दर्द छलकता यहाँ वहाँ है , अनुभूत... Read more

" बना रहे उत्साह यही " !!

पहुंच रहे हैं तुम भी आना , विद्यालय की राह यही . बस्ता काँधे पर अपने है , खेल छूटते अभी यहीं ! राह अभी लगती है लम्बी , इंतज़ार... Read more

" समय यहाँ बहलाता है " !!

कोई भी हम काज करें वह , कृत्य यहाँ कहलाता है ! चिंतन , मनन , सलीके से हो , संस्कारों में आता है !! काज हमारे प्राकृत हैं कुछ ,... Read more

" गुनाह छोड़ता छाप है " !!

पलते हैं अपराध जहाँ पर , जीवन इक अभिशाप है !! निर्धनता जहाँ द्वार खड़ी हो , अँधियारों के डेरे हो ! खुशियाँ जहाँ चिकोटी काटे , ... Read more

" तुमको नाज़ ज़रूरी था " !!

रहमत बरसी तुम पर रब ने , तुमको नाज़ ज़रूरी था ! चाँद अगर शरमाया है तो , कह दो आज ज़रूरी था !! नज़रें थक आई देखा तो , ऊँचाई पर तुम इत... Read more

"अँखियाँ भेद कहे हैं " !!

सेवा से संतोष मिले हैं , अँखियाँ भेद कहे है !! बैठ झरोखे आज उमरिया , जल का पात्र गहे है !! जीवन भर श्रम की गठरी ने , साथ नहीं... Read more

" कहर न अब ढाने देंगें " !!

कहाँ जा रहे कारे बदरा , यों ना हम जाने देगें ! बिन बरसे ही चले गये तो , तुमको हम ताने देगें !! सूख रहे हैं हलक हमारे , पैर... Read more

" उत्सव रोज़ मनाएं " !!

प्रजातन्त्र जन जन का शासन , जन जन को है भाये ! वोटों का अधिकार मिला बस , सत्ता है दुलराये !! पाँच बरस में अवसर आये , नेताओं क... Read more

" ऋतु भी इठलाती है " !!

पावस की बूंदें कमाल है , मन को बहलाती हैं ! इंद्रधनुष भी रंग बिखेरे , उसमें ढल जाती हैं !! रीते बादल लौट चले जब , संध्या घूंघ... Read more

" तम के बाद उजास है " !!

तुम चुग लो ममता का दाना , इसमें बड़ी मिठास है !! यहाँ वहाँ मैं आस जगाती , दौड़ रही हूँ इत उत को ! भूख प्यास को भूली अपनी , करूँ... Read more

" जीवन के मधुगान हैं " !!

हलधर की बेटी ठहरी मैं , हँसी लगे पहचान है !! हरे भरे खेतों में रमती , वहन करूँ जिम्मेदारी ! हरी चुनरिया माँ धरणी की , उस पर म... Read more

" किस्मत में कहाँ छप्पन भोग " !!

आग बरसती बड़ी तपिश है , चमकी से चमके हैं लोग !! खड़े कुपोषण और गरीबी , भाषण से कुछ ना होगा ! स्वास्थ, चिकित्सा , शिक्षा सस्ती , ... Read more

" इच्छाएं सब चेरी " !!

योगा में आसन अनेक हैं , मुद्राएँ बहुतेरी ! साँसें वशीभूत होती हैं , इच्छाऐं सब चेरी !! रोग ग्रसित है जीवन सबका , चिंता बड़ी सत... Read more

" प्यासे पानी चाहें " !!

जम के बरसो कारे बदरा , तुम पर टिकी निगाहें !! प्यासे प्यासे अधर हमारे , धरती भी है प्यासी ! सूखे सूखे खेत पड़े हैं , हरियाली न... Read more

" प्रजातंत्र की मार बड़ी है " !!

कैसी यह तकरार छिड़ी है , प्रजातन्त्र की मार बड़ी है !! सब अपने , समभाव दिखे ना , व्यापकता का भाव कहाँ है ! सबके अपने स्वार्थ सज... Read more

" हर पल मेरा ही खयाल है " !!

नयन पिरो रहे अश्रु माल हैं ! कदम कदम पर साथ मिला औ , काँधे पर चढ़ना , इठलाना ! दूर दूर तक रखी निगाहें , पलकों में सब सिमटा आना ... Read more

" अब मतदान ज़रूरी है " !!

अब मतदान ज़रूरी है !! परख लिया , सबको पहचाना , लोकतंत्र होता क्या जाना ! एक दूजे के गले मिले सब , भाषा की गरिमा को माना ! उतरे... Read more

" आये फिर मनुहार के दिन हैं " !!

आये फिर मनुहार के दिन हैं !! बरसों बीते महक वही है ! बातों में भी चहक वही है ! हँसी लगे है आज खनकती , पाये वह झनकार के दिन है ... Read more

" मैं हूँ और मेरी तन्हाई " !!

मैं हूँ और मेरी तन्हाई !! जीवन क्या आपा धापी है , खुद से भी ना मिल पाते हैं ! कुछ पाना है इसी दौड़ में , बस दौड़े दौड़े जाते हैं ... Read more

" हम पर हैं उपकार बड़े " !!

पृथ्वी , धरा , भू , धरती के , हम पर हैं उपकार बड़े !! जननी सा लालन पालन है , भूख प्यास सब दूर करे ! धूप घनेरी सही न जाये , वृक... Read more

" खुशियों के पल साँचे हैं " !!

कोई बंधन बांध न पाये , तब मन मयूर नाचे है !! पावस ऋतु जब मन हरषाये , हरी चुनरिया को लहराये , लेता मौसम अंगड़ाई है , खुशियों के... Read more

" बिखर बिखर गये अरमान " !!

तिनके तिनके बिखरे सपने , बिखर बिखर गये सामान ! आज चली फिर ऐसी आंधी , हम निर्बल समय बलवान !! दो गज़ धरती अगर मिली तो , पर्ण कुट... Read more

" निर्वासित हम " !!

चोका ढूढें अँखियाँ ताल तलैया पानी हुई उदास फिर वही कहानी जलधारा हैं सूखी खुद प्यासी सी कुँए अकेले पनिहारिन भागी बरसे... Read more

" हम तो बस लाचार हैं " !!

धरती फटती जाती है जी , पानी की दरकार है ! सब कुछ दाँव लगा बैठे हैं , खड़ी सामने हार है !! कदम कदम पर जगत कुएं की , खुदे हुए नल... Read more

" मौसमी दोहे " !!

हाथ जोड़ नेता खड़े , करे वोट की मांग ! सूरज गुस्से में तपे , घुली कुएं में भांग !! तीखी तीखी धूप है , तल्खी दिखती साफ ! जनता सी न... Read more

" संघर्षों की राह कठिन है " !!

हँसते गाते खुशी मनाते , हमने चलना सीख लिया है ! हमको सदा पीर सहना है , यह कह मन को जीत लिया है ! काम अगर बोझा समझा तो , काट रहे... Read more