एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण !
सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन !
एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित !
e काव्यसंग्रह “कहीं धूप कहीं छाँव” एवं “दस्तक समय की ” प्रकाशित !

Copy link to share

" मैं तो बस मनुहार करूँ हूँ " !!

नख शिख तक श्रंगार करूँ हूँ ! जी भर तुझको प्यार करूँ हूँ !! चाँद सलोना घर उतरा तो , महक उठी घर की फुलवारी ! तुझको पाना एक तपस्य... Read more

" मन टेढ़ा चलता है " !!

हम तुम सारे दौड़ा करते , चैन किसे मिलता है ! समय यहाँ पर भरे कुलाँचे , पग पग पर छलता है !! कुछ पाने की सदा लालसा , मन में जाग... Read more

" सताने लगे हैं " !!

ग़ज़ल / गीतिका बाते ही बातें , बनाने लगे हैं ! यादों में अकसर , सताने लगे हैं !! अवसर को खोना , नहीं जानते वे ! सोये जो उनको... Read more

" सताओगे कब तक " !!

इरादे तुम अपने , बताओगे कब तक ! हमें यों ही जालिम , सताओगे कब तक !! अभी कहने को तो , बहुत कुछ है बाकी ! फसाना ये दिल का , सुनाओ... Read more

" इसे लाज कह दें " !!

ग़ज़ल / गीतिका ज़रा समय ठहरे , चलो आज कह दें ! छिपाये कभी जो , सभी राज़ कह दें !! तुम्हारी खरीदी , हमारे बिके हैं !! अनायास हम प... Read more

" गढ़ते नई कहानी हैं " !!

मदहोशी का नशा चढ़ा तो , कहते इसे जवानी हैं ! लहरों का उन्माद यहाँ है , सिर पे चढ़ता पानी है !! जब किशोर से हुए जवां तो , दुनिया... Read more

" अधरों पर मनुहार है " !!

गीत बरस गये हैं जम के बदरा , बरखा संग बहार है !! पुलक रही है धरा हरित हो , खुशियों का त्यौहार है !! चेहरे की रंगत बदली है ... Read more

" पीड़ा किसे सुनाऊँ " !!

होंठ सिले हैं मेरे देखो , पीड़ा किसे सुनाऊँ !! इस पीड़ा में घुटता दम है , व्यक्त नहीं कर पाऊँ !! अधरों का कम्पन खोया है , इनको ... Read more

" सांझ ढलती है चले आना " !!

सांझ ढलती है चले आना !! डूबा डूबा है रवि , झुकी सी पलकें कहीं ! हवाएं थम गई हैं , नहीं थोड़ी सी नमी ! गगन भी झुक सा गया , छा ... Read more

" खूब संभाला था " !!

हालात जहाँ बदले , हर ओर उजाला था ! जो खूब हँसा हम पर , उस मुँह पर ताला था !! मेरे खेत पड़े सूने , टपरी खाली खाली ! उस द्वार पे ... Read more

"" फिर उठी नहीं नज़र " !!

ग़ज़ल / गीतिका आपसे मिली नज़र , फिर उठी नहीं नज़र !! क्या कहें , सुने भला , कुछ नहीं मिली खबर !! चढ़ रही खुमारियाँ , दिख रहा... Read more

" आँख में आँसू मगर रोना नहीं " !!

चैन रातों का कहीं खोना नही ! दूर हमसे आप बस होना नहीं !! ठोकरें कितनी मिली हैं थक चुके ! आज सपने फिर कहीं बोना नहीं !! खो गय... Read more

" खूब सहेजें प्यार से " !!

स्वाति बूँद बनी मोती तो , खूब सहेजें प्यार से ! और आँख से ढलते मोती , बहते हैं निस्सार से !! दर्द छलकता यहाँ वहाँ है , अनुभूत... Read more

" बना रहे उत्साह यही " !!

पहुंच रहे हैं तुम भी आना , विद्यालय की राह यही . बस्ता काँधे पर अपने है , खेल छूटते अभी यहीं ! राह अभी लगती है लम्बी , इंतज़ार... Read more

" समय यहाँ बहलाता है " !!

कोई भी हम काज करें वह , कृत्य यहाँ कहलाता है ! चिंतन , मनन , सलीके से हो , संस्कारों में आता है !! काज हमारे प्राकृत हैं कुछ ,... Read more

" गुनाह छोड़ता छाप है " !!

पलते हैं अपराध जहाँ पर , जीवन इक अभिशाप है !! निर्धनता जहाँ द्वार खड़ी हो , अँधियारों के डेरे हो ! खुशियाँ जहाँ चिकोटी काटे , ... Read more

" तुमको नाज़ ज़रूरी था " !!

रहमत बरसी तुम पर रब ने , तुमको नाज़ ज़रूरी था ! चाँद अगर शरमाया है तो , कह दो आज ज़रूरी था !! नज़रें थक आई देखा तो , ऊँचाई पर तुम इत... Read more

"अँखियाँ भेद कहे हैं " !!

सेवा से संतोष मिले हैं , अँखियाँ भेद कहे है !! बैठ झरोखे आज उमरिया , जल का पात्र गहे है !! जीवन भर श्रम की गठरी ने , साथ नहीं... Read more

" कहर न अब ढाने देंगें " !!

कहाँ जा रहे कारे बदरा , यों ना हम जाने देगें ! बिन बरसे ही चले गये तो , तुमको हम ताने देगें !! सूख रहे हैं हलक हमारे , पैर... Read more

" उत्सव रोज़ मनाएं " !!

प्रजातन्त्र जन जन का शासन , जन जन को है भाये ! वोटों का अधिकार मिला बस , सत्ता है दुलराये !! पाँच बरस में अवसर आये , नेताओं क... Read more

" ऋतु भी इठलाती है " !!

पावस की बूंदें कमाल है , मन को बहलाती हैं ! इंद्रधनुष भी रंग बिखेरे , उसमें ढल जाती हैं !! रीते बादल लौट चले जब , संध्या घूंघ... Read more

" तम के बाद उजास है " !!

तुम चुग लो ममता का दाना , इसमें बड़ी मिठास है !! यहाँ वहाँ मैं आस जगाती , दौड़ रही हूँ इत उत को ! भूख प्यास को भूली अपनी , करूँ... Read more

" जीवन के मधुगान हैं " !!

हलधर की बेटी ठहरी मैं , हँसी लगे पहचान है !! हरे भरे खेतों में रमती , वहन करूँ जिम्मेदारी ! हरी चुनरिया माँ धरणी की , उस पर म... Read more

" किस्मत में कहाँ छप्पन भोग " !!

आग बरसती बड़ी तपिश है , चमकी से चमके हैं लोग !! खड़े कुपोषण और गरीबी , भाषण से कुछ ना होगा ! स्वास्थ, चिकित्सा , शिक्षा सस्ती , ... Read more

" इच्छाएं सब चेरी " !!

योगा में आसन अनेक हैं , मुद्राएँ बहुतेरी ! साँसें वशीभूत होती हैं , इच्छाऐं सब चेरी !! रोग ग्रसित है जीवन सबका , चिंता बड़ी सत... Read more

" प्यासे पानी चाहें " !!

जम के बरसो कारे बदरा , तुम पर टिकी निगाहें !! प्यासे प्यासे अधर हमारे , धरती भी है प्यासी ! सूखे सूखे खेत पड़े हैं , हरियाली न... Read more

" प्रजातंत्र की मार बड़ी है " !!

कैसी यह तकरार छिड़ी है , प्रजातन्त्र की मार बड़ी है !! सब अपने , समभाव दिखे ना , व्यापकता का भाव कहाँ है ! सबके अपने स्वार्थ सज... Read more

" हर पल मेरा ही खयाल है " !!

नयन पिरो रहे अश्रु माल हैं ! कदम कदम पर साथ मिला औ , काँधे पर चढ़ना , इठलाना ! दूर दूर तक रखी निगाहें , पलकों में सब सिमटा आना ... Read more

" अब मतदान ज़रूरी है " !!

अब मतदान ज़रूरी है !! परख लिया , सबको पहचाना , लोकतंत्र होता क्या जाना ! एक दूजे के गले मिले सब , भाषा की गरिमा को माना ! उतरे... Read more

" आये फिर मनुहार के दिन हैं " !!

आये फिर मनुहार के दिन हैं !! बरसों बीते महक वही है ! बातों में भी चहक वही है ! हँसी लगे है आज खनकती , पाये वह झनकार के दिन है ... Read more

" मैं हूँ और मेरी तन्हाई " !!

मैं हूँ और मेरी तन्हाई !! जीवन क्या आपा धापी है , खुद से भी ना मिल पाते हैं ! कुछ पाना है इसी दौड़ में , बस दौड़े दौड़े जाते हैं ... Read more

" हम पर हैं उपकार बड़े " !!

पृथ्वी , धरा , भू , धरती के , हम पर हैं उपकार बड़े !! जननी सा लालन पालन है , भूख प्यास सब दूर करे ! धूप घनेरी सही न जाये , वृक... Read more

" खुशियों के पल साँचे हैं " !!

कोई बंधन बांध न पाये , तब मन मयूर नाचे है !! पावस ऋतु जब मन हरषाये , हरी चुनरिया को लहराये , लेता मौसम अंगड़ाई है , खुशियों के... Read more

" बिखर बिखर गये अरमान " !!

तिनके तिनके बिखरे सपने , बिखर बिखर गये सामान ! आज चली फिर ऐसी आंधी , हम निर्बल समय बलवान !! दो गज़ धरती अगर मिली तो , पर्ण कुट... Read more

" निर्वासित हम " !!

चोका ढूढें अँखियाँ ताल तलैया पानी हुई उदास फिर वही कहानी जलधारा हैं सूखी खुद प्यासी सी कुँए अकेले पनिहारिन भागी बरसे... Read more

" हम तो बस लाचार हैं " !!

धरती फटती जाती है जी , पानी की दरकार है ! सब कुछ दाँव लगा बैठे हैं , खड़ी सामने हार है !! कदम कदम पर जगत कुएं की , खुदे हुए नल... Read more

" मौसमी दोहे " !!

हाथ जोड़ नेता खड़े , करे वोट की मांग ! सूरज गुस्से में तपे , घुली कुएं में भांग !! तीखी तीखी धूप है , तल्खी दिखती साफ ! जनता सी न... Read more

" संघर्षों की राह कठिन है " !!

हँसते गाते खुशी मनाते , हमने चलना सीख लिया है ! हमको सदा पीर सहना है , यह कह मन को जीत लिया है ! काम अगर बोझा समझा तो , काट रहे... Read more

" पोस्ट कार्ड से मन हैं खाली " !!

पोस्टकार्ड से , मन हैं खाली !! अपनी चिंता जुटे सभी हैं ! याद सताये कभी कभी हैं ! संदेशे अब शीघ्र पहुंचते , हरकारे देते हैं त... Read more

" फिर चुनाव आये हैं " !!

फिर चुनाव आये हैं !! महासमर का बिगुल बजा है , नायक रथ चढ़ बैठे ! मान मुन्नवल शुरू हो गई , रहे न अपने ऐंठे ! घर घर जाकर मनुहारे... Read more

" दीप जलता रहे " !!

दीप जलता रहे !! फैली चंहु और , गंध मादक सी! श्रृंगारित तन मन , प्यास चातक सी ! अलसाया तम है , हाथ मलता रहे !! चूड़ी करे खन... Read more

" किस्से इन्हें सुनाने हैं " !!

पांसे गर पड़ जाये उल्टे , हाथ लगे अफसाने हैं ! नींद उड़ चले रातों की फिर , किस्से तो मनमाने हैं !! नफरत की आंधी जब चलती , सोच स... Read more

" कदम कहाँ रूकते हैं " !!

मन को रोको बरबस चाहे , कदम कहाँ रुकते हैं !! कई पड़ाव उम्र के देखे , नहीं थकन से नाता ! मौसम तो है एक छलावा , रोज़ तानता छाता !... Read more

" नयनों में ढलते दृग " !!

है स्वार्थ की , दुनियादारी , पग पग पर , बैठे ठग !! अपनों से , रिश्ते गहरे से , कहाँ नेह , मिलता है! मुस्कानें बस , सौदाई... Read more

" बढ़ गये हैं जीत कर " !!

साध कर निशाने हम , चल पड़े हैं जीत कर !! चीर कर अंधेरों को , लक्ष्य सभी भेदे हैं ! आतंकी , अधमों के , सीने भी छेदे है ! रिपुद... Read more

" आवारा बादल हुई है " !!

याद करवट ले चुकी जो , चाह में पागल हुई है !! रात काटे से कटे ना , पल पल ठगी करने लगे ! सपन जागे हुए अपने , अपने हँसी करने ... Read more

" लगे सुहानी नित है भोर " !!

कदम बढ़े हैं ,शहर की ओर !! गांवों में पसरा सन्नाटा , लघु किसान के हिस्से घाटा , सब्ज़ी भाजी उगा रहे हैं , पेट पालना हुआ कठोर !! ... Read more

" ममता का उपहार यही है " !!

नमन देश को करते हैं ये , सैनिक के संस्कार यही है !! मातृभूमि की रक्षा करना , जिनका केवल ध्येय यही है ! आँख मिचौली करे मौत है ,... Read more

" मनुहार है " !!

थाम लो हाथ फिर से , उपकार है !! दो कदम तुम चले हो , मैं भी चला ! फासले मिटते गये , फिर क्या गिला ! मोह का यह पाश है , दीदा... Read more

" फिर हुए कुर्बान हैं " !!

हम वतन के नाम पर , फिर हुए कुर्बान हैं !! हम लड़ाई लड़ रहे , इस पार , उस पार भी ! जान जाती , है जाये , हम भरें हुँकार भी ! न... Read more