लुटे गुलशन में तुम आए

लुटे गुलशन में तुम आए चमन में बहार बन छाए। कहीं था कोई न सहारा, तुम खेवनहार कहलाए। रहे जो बन्द अधर मेरे, कली सी खिल के छितर... Read more

माँ की ममता

माँ ममत्व की मूर्ति सदा तुम, धार पीयूष की बूँदें। निमिष मात्र में संकट टाले, शीत तपन आँचल मूँदें। असहनीय पीड़ा सहकर भी, आनन्द... Read more