अविवाहित, पसंद ग्रामीण संस्कृति, रूचि आयुर्वेद में
MA HINDI
B.ed,CTET
NET 8time
JRF
Hindi Phd scholar महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर राजस्थान
साहित्यकार

Copy link to share

13 अप्रैल 1919 जलियाँवाला बाग

धुल जाएगा ऐसा तो ये दाग नहीं। कुछ गाऊँ मैं इस पर, ऐसा मेरा राग नहीं । हूक उठती एक ह्रदय में, जिसने दी पीड़ा उन फिरंगी लाटो को। ... Read more

जन-गण-मन

जन-गण-मन अधिनायक जय हे ! भारत भाग्य विधाता ' संसद के ऊपर लहराए तिरंगा, पूछ रहा ये कौन मेरा भाग्य विधाता ? ' विजयी विश्व तिरंगा ... Read more

ऐ हवा !

ऐ हवा ! तू क्यों खामोश है ? क्या तू भी किसी के प्यार की मोहताज है । प्यार वफा इस दुनिया में, सब बेईमानी के नाते हैं । चल-चल ओ... Read more

भारत-जननी

आदित्य का तेज जहाँ हो,टिक सकता क्या महाकाल भला ? भरी जवानी,उबाल नसों में,फिर मिटा सकता क्या महाकाल भला। भीख माँगती अमरता रोती,प्रा... Read more

शहीद-ए-वतन

शहीद-ए-वतन, बलिदान है ये तन। खुशियों के चमन, तुम्हें मेरा नमन। हम सरहदों पर लड़े,मौत पर हैं खड़े। रही कटती धड़े, फिर भी हम हैं लड़े... Read more

मैं हूँ आरक्षण !

"मैं हूँ आरक्षण !" तुम क्या जानो इतिहास मेरा, रक्षा करना धर्म है मेरा, यहीं परिचय और इतिहास मेरा। उत्पन्न कैसे,कब हुआ ? महत... Read more

नारी सृष्टि

नारी ! जान न पाये भेद तुम्हारा,ब्रह्मा विष्णु महेश। रहस्य तुम्हारा जानने को, नारी ! हुआ होगा उनमें महा क्लेश। पार न पाया होगा तु... Read more

ऐ गुलाब !

" गुलाब " क्या डर है गुलाब तुझको ? जो कांटो के बीच खिला है । अरे ! हुस्न के दिवानोंं को तू ही तो मिला है। तुझ पर फिद... Read more

सुन सखे !

कुछ देख सोचकर तेरा हृदय तो जलता होगा । सूने तन में मन से,कोई भाव तो पलता होगा। नदियाँँ ही नहीं, समुद्र भी तो चलता होगा। सोच जरा !... Read more

# चाह गई, चिंता मिटी #

दिल की बाते उतर गई, कागज कलम के साथ से। नहीं चाहते इसे हम कहना उतर गई मेरे हाथ से।। लिख दो यारों काग... Read more

मौन मुग्ध संध्या !

मौन मुग्ध संध्या ! मौन मुग्ध संध्या में ,रह-रह उठती आशंका अम्बर में धूम -धुवारे कजरारे मेघा गर्जन के तेज तमाचे पड़ते,बिजुरी डंडे... Read more

तेरे नाम-मेरे गीत

खुशदिल था इतना,इन फिजाओं में। गुमशुम न था इतना,इन हवाओं में। ऐ मुकद्दर ! मेरे क्यों इतना बेवफा है। खुदगर्ज नहीं मैं इतना,फिर क्यो... Read more

भूख

शीर्षक - भूख रचना - कविता संक्षिप्त परिचय- राजेश कुमार बिंवाल 'ज्ञानीचोर' शोधार्थी व कवि साहित्यकार मु.पो. रघुनाथगढ़, जिला सी... Read more

जय-जय राजस्थान

जय - जय राजस्थान आओं बच्चों तुम्हें दिखायें,माटी राजस्थान की। जिस माटी में हुए है पैदा,इला रेगिस्तान की। ... Read more

बातें : इधर की उधर की या ज्ञानीचोर का दिल

एक आशियाना खोज के,मैं लौट आया। आँखों ही आँखों में खा के चोट आया।। टेक।। बातों ही बातों में दिल में खोट आया। नजरों ही नजरों में प्... Read more

पंक्तियों में ज्ञानीचोर

हम दिवानें है नये हुए। सफर में बसर करने चले हुए।। 1 बसी हुई बस्ती मन की , उजड़ी हुई है बस्ती दिल की। तिल को ताड़ बनाते कैसे, शब... Read more

मोदीकाण्ड/नोटबंदी और ज्ञानीचोर

सुनसान डगर की टापो से ,खटका होता भय का। कोई उपाय तो होता होगा,मन के इस संशय का। चोटों पर चोटे सहकर भी,सरहदें पर डटे है वो। अनजान ... Read more

गजल ज्ञानीचोर की

चाँद तारों की महफिल छोड़। चलो अब आग से घर को सजाते है।। 1 टूटे तार जोड़ने को। चलो! अब घर बसाते है।। 2 मिलेंगे रास्तें तन्हा। ... Read more