शिवकुमार बिलगरामी : जन्म 12 अक्टूबर : एम ए (अंग्रेज़ी ): भारतीय संसद में संपादक पद पर कार्यरत । शिवकुमार बिलगरामी आज के दौर के मशहूर शायर और गीतकार हैं। आपकी ग़ज़लें देश विदेश के कई ग़ज़ल गायकों द्वारा गाई जा रही हैं । इनका एक ग़ज़ल संग्रह नई कहकशां प्रकाशित हो चुका है।

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सभी मिलकर कहो , जयहिन्द वन्दे मातरम

कोई भी पन्थ हो अपना कोई भी हो धरम सभी मिलकर कहो जयहिन्द वन्देमातरम हमारे देश ने दी है हमें ये ज़िन्दगी हमारे देश से हमको मिली है... Read more

मेरे दिल में जो है

मेरे दिल में जो है तुमको वो बताऊँ कैसे दिल की सरहद से ज़ुबाँ तक इसे लाऊँ कैसे एक तस्वीर जिसे दिल में छुपा रक्खा है चीरकर दिल क... Read more

नई दिल्ली

हज़ारों ख़्वाब जनता को दिखाती है नई दिल्ली मगर जनता को अक्सर भूल जाती है नई दिल्ली न तो रहने न ही खाने का बंदोबस्त है कोई मगर फि... Read more

बड़े भाई

मेरी उलझन को इतना क्यों बढ़ाते हो बड़े भाई तुम अपना दर्द मुझसे क्यों छुपाते हो बड़े भाई अकेले में तुम्हे पाया है मैंने सिसकियाँ भरत... Read more

युद्ध के उन्माद

न जाने कौन सा आनन्द इस अतिवाद में है जिसे देखो वही अब युद्ध के उन्माद में है कभी भी युद्ध से होती नहीं है हल समस्या समर्थक युद्... Read more

सैंकड़ों गोते

सैंकड़ों गोते समुन्दर में लगाये हैं तब कहीं दो चार मोती हाथ आये हैं ज़िन्दगी अपनी भी जैसे आक्टोपस हो रंग इसने भी उसी जैसे दिखाये ... Read more

जहाँ भर में

जहां भर में अमन का ग्राफ़ नीचे जा रहा है जिसे देखो वही तलवार खींचे जा रहा है क़लम से काटनी थी नफ़रतों की पौध जिसको वही अब नफ़रतों क... Read more

तुम्हें बादल दिखायेगा

तुम्हें बादल दिखायेगा तुम्हारे वोट ले लेगा मगर कोई सियासतदां तुम्हें बारिश नहीं देगा गरीबों के लिए जब भी कोई योजना आये तो तुम... Read more

मुश्किलों के दौर को

मुश्किलों के दौर को हम खुद पे ऐसे सह गए कुछ तो आँसू पी लिए कुछ एक आँसू बह गए उम्र भर आँखों में पाला था जिन्हें अपना समझ ख्व़... Read more

अपनों से न गैरों से

अपनों से न ग़ैरों से कोई भी गिला रखना आँखों को खुला रखना होंठों को सिला रखना जो ज़ख्म मिला तुमको अपने ही अज़ीज़ों से क्या ख़ूब मज़... Read more

हमदर्द कैसे कैसे

हमदर्द कैसे कैसे हमको सता रहे हैं काँटों की नोक से जो मरहम लगा रहे हैं मैं भी समझ रहा हूँ मजबूरियों को उनकी दिल का नहीं है रिश... Read more

मेरी सोच

मेरी सोच मेरी हदों का निशां है मगर इसके आगे भी कोई जहां है सितारों को शायद पता हो न इसका सितारों से आगे नई कहकशां है न निकल... Read more