हे शिक्षे !

हे शिक्षे, तू भ्रष्ट हुई बनकर बनिकों की मुँहबोली वैभव की अभिप्राय हुई रुपयों की थैली । सर्वसुलभ थी समाधान थी दीन-हीन वंच... Read more