ठाकुर भवानी प्रताप सिंह

58, छोला मंदिर कालोनी भोपाल (462010)

Joined March 2018

हिन्दी साहित्य विध्यार्थी – स्वतंत्र लेखन
कविता, कहानी, लेख एवं नाटक लेखन
समाचार पत्रों एवं विभिन्न पत्रिकाओं हेतु लेखन
जन्मतिथि :- 23-8-98
संपर्क :- 8989100111
ई-मेल : – Thakurbhawani66@gmail.com
Books: 1
2

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कुछ नादानी कुछ शैतानी

मेरी चाहत जरा अलग है मुझे पसंद कुदरत की झलक है जंगल झाड़ी नदी पहाड़ इन सबसे है मुझको प्यार आवारा पंछी जैसा हूँ जंगल के रस... Read more

खूबसूरत एक गज़ल वो

खूबसूरत एक गज़ल वो खूबसूरत एक गज़ल वो, झील का खिलता कंवल है चेहरे पर मासूमियत है, नैन पर चंचल चपल है रूप सुंदरता की मूरत, सा... Read more

एक वर्ष आज फिर बीत गया

एक वर्ष आज फिर बीत गया एक वर्ष आज फिर बीत गया एक वर्ष आज और बीत गया काफी कुछ पा लिया हमने पर, कितना कुछ पीछे छूट गया ... Read more

अपने हर एक पल के लिए

आज क्षण दो क्षण को नहीं, आने वाले कल के लिए तुम्हारा साथ चाहता हूँ मैं, अपने हर एक पल के लिए तुम्हारा साथ चा... Read more

ख्वाब और हालात

ख्वाब और हालात कुछ ख्वाब सजे हैं आँखों में जिन्हें हालात तोड़ना चाहते हैं मेरी मंजिल के सफर में पीछे मुझे छोड़ना चाहते हैं ... Read more

मैं और मेरा ईश्वर

मैं और मेरा ईश्वर निरंतर गति से चलने वाले इस जीवन में हर समय मैं और मेरा ईश्वर एक दूसरे के साथ ही रहे बस फर्क इतना था कि कभी मैंन... Read more

*'भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी*

*'भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी* भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्मा एक ऐ... Read more

क्या भाग रहे हैं शब्द

"क्या भाग रहे हैं शब्द" यूँ तो शब्द कभी नहीं भागते किंतु वर्तमान समय में प्रचलित फिल्मी गीतों, फिल्मी कहानीयों और उनके डायलॉग सु... Read more

*तुम संग बातें कर सब कुछ*

*तुम संग बातें कर सब कुछ* तुम संग बातें कर सब कुछ क्यों अच्छा लगने लगता है तुम संग बातें कर सपना भी क्यों सच्चा लगने लगता ह... Read more

*चला गया दरवाजे का अनुभव*

*चला गया दरवाजे का अनुभव* शहरों से गाँव की ओर चलें तो आज के इस दौर में भी हमें एक बड़ी ही साधारण सी बात देखने को मिलती है। घर के ... Read more

पेन बेंचती बूढी़ औरत

" पेन बेंचती बूढी़ औरत '' एक बड़े से शहर में रहने वाला एक बालक प्रताप जो आज किसी काम से अपने घर से निकला था। उसी शहर के एक चौराह... Read more

" माँ नर्मदा के किनारे "

" माँ नर्मदा के किनारे " आज अपने घर और शहर के कोलाहल से दूर जीवनदायिनी माँ नर्मदा के किनारे प्रकृति की गोद में आज इस साल की पहली ... Read more

'' तुम साथ नहीं होती हो ''

'' तुम साथ नहीं होती हो '' यार तुमसे बात करने का मन होता है लेकिन, तुम मेरे, साथ नहीं होती हो... जब याद तुम्हारी आती है, आ... Read more

शब्द-शब्द समर्पण

शब्द-शब्द समर्पण हो माँ भारती का वंदन हो जरूरत पड़े तो मस्तक भी सजा थाल में अर्पण हो शब्द-शब्द समर्पण हो ll Read more