Bhaurao Mahant

Joined September 2016

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दोहे (1-55)

कवि का अंतिम लक्ष्य हो, जग के मार्मिक पक्ष। करे जगत के सामने, सर्वप्रथम प्रत्यक्ष।। 1 कविता कवि का कर्म है, करे उसे निष्काम। ... Read more

वियोग शृंगार युक्त दोहे

01 उत्तर भी दक्षिण लगे, पश्चिम लगता पूर्व। परिवर्तन यह विरह में, देह हुआ जस दुर्व।। 02 बालम तुम जब से गये, लगी तभी से आग। ... Read more

विलोम शब्द युक्त दोहे

01 (सत्य/असत्य) कोई कहता सत्य है, कोई कहे असत्य। मुझको भी देते बता, ईश तुम्हारे कृत्य।। 02 (हार/जीत, जीवन/मौत) जीवन में औ... Read more

आप का चारण प्रिये!

आधार छंद - गीतिका मापनी- 2122 2122 2122 212 ============================ गीत मैं तो लिख रहा हूँ, आपके कारण प्रिये। बन... Read more

चन्दा (रेखाचित्र)

चन्दा पशुओं को जब मानवीय प्रेम मिलने लगे तो वे भी मानव के साथ आत्मीय व्यवहार करने लगते हैं। अधिकतर समय यदि मनु... Read more

गहराई तो माप प्रिये

लम्बाई-चौड़ाई छोड़ो, गहराई तो माप प्रिये। माप अचंभित हो जाओगी, थाह हृदय की आप प्रिये।। ............. जीवन की आपाधापी में, भले... Read more

माँ

दोहे - अद्भुत है संसार में, माँ का प्यार महंत। होती है शुरुआत पर, होता कभी न अंत।। माँ की ममता से भरा, अद्भुत यह संसार। खु... Read more

दोधक छंद

211 211 211 22 साजन-साजन रोज पुकारूँ आँगन-आँगन द्वार निहारूँ। पीर नहीं सजना अब जाने भूल गये अब क्या पहचाने।। Read more

मुक्तक

वक्त हँसाता है वक्त रुलाता है। जो वक्त गँवा दे वो पछताता है।। Read more

मुक्तक

आज कैसा सवाल आया है उन अमीरों पे काल आया है। नोट जिनके करीब हैं ज्यादा सीर उनके बवाल आया है।। भाऊराव महंत "भाऊ" Read more

मुक्तक

विलोम शब्द आस्था:- 2122 1212 22 आस्था पे सवाल आया है जाने' कैसा बवाल आया है। आज इंसान में न जाने क्यूँ जानवर सम खय... Read more

मुक्तक

2212 2212 2212 2212 ये भूल मानव की कहूँ ,या काल की मैं क्रूरता। मानव मगर इस चीज़ को,कहता रहा है वीरता।। क... Read more

मुक्तक

समंदर के किनारों पर निशां गर हम बनायेंगे मगर उसकी लहर को हम कभी क्या रोक पायेंगे। निशानी रेत पर रहती नहीं समझा करो "भाऊ" लहर चलते... Read more

मुक्तक

122 122 122 122 मेरे साथ में एक हलचल हुआ है बताऊँ मैं कैसे बड़ा छल हुआ है। दिया है उधारी जिसे कर्ज मैंने कभी आज त... Read more

चौपाई

जीवन अपना फूलों-सा है जीना लेकिन शूलों-सा है। जो भी शूलों पर है चलता जीवन में फूलों-सा खिलता।। Read more

मुक्तक

कोई बादशाह यहाँ, कोई बना गुलाम करे गुलामी रात दिन,करते रहे सलाम। ऐसे ही होता यहाँ, राजनीति का खेल बादशाह के राज में, मरती जनता आ... Read more

उल्टी बात

कुण्डलिया छंद लम्बूजी छोटे दिखे, छोटूजी छह फीट। सीधेजी टेढ़े लगे, जैसे हो अनफीट जैसे हो अनफीट, अंग हैं टेढ़े-मेढ़े नाम समोसा... Read more

मोटूमल का भोजन

खाते रात दिवस रहे, मोटूमल भरपेट। लड्डू पेड़ा और सभी, होता उनको भेंट। होता उनको भेंट, भोग सबका है लगता। जो भी मुख को भाय,सदा थाली म... Read more

आज के गीत

~~~~~~कुण्डलिया छंद~~~~~~ सुनते राम भजन सभी,,,हो जाते हैं बोर चिकनि-चमेली धून पे, होते भावविभोर। होते भावविभोर,,,,सभी को नाच-न... Read more

जीवन सत्य

हुआ प्रस्थान बचपन का हुआ आगाज यौवन का यहीं प्रारंभ होता है यहीं परिवार-उपवन का। बुढ़ापे के लिए रखते कमाई मान धन सेवा यहीं फिर ... Read more

जीत का जश्न

हमारी जीत पर कैसे धमाका हो रहा यारो बजे अब ढोल ताशे नाच गाना हो रहा यारों। मजे लेते रहेंगे देश में हम पाँच सालों तक मचेगी धूम ... Read more

कटे सब पेड़ जंगल के

कटे सब पेड़ जंगल के हुआ अब ठूँठ जग सारा सुहानी इस धरोहर पर गया अब रूठ जग सारा। लगाया जा रहा वन बाग अब कागज़ के पन्नों पर वनों को ... Read more

देश भक्ति ग़ज़ल

221 1222 221 1222 ये खून खराबा अब स्वीकार नहीं होगा गर वार किया तुमने इंकार नहीं होगा ये बंद करो नाटक जो खेल रहे हो तु... Read more

मुक्तक - 2

चुल्हों में सभी के नहीं रोटियाँ बदन पे सभी के नहीं धोतियाँ। हजारों बिना रोटियों के मरे करों में सभी के नहीं बोटियाँ।। भाऊरा... Read more

मुक्तक

माँ को मेरे ऐसा अक्सर लगता है। मेरा बेटा अब तो अफ़सर लगता है सूटबूट से जब भी निकलूँ मैं घर से कहती पूरब का तू दिनकर लगता है।।... Read more