एक राष्ट्रवादी व्यक्तित्व कवि, लेखक , वैज्ञानिक , दार्शनिक, पर्यावरणविद् एवं पुरातन संस्कृति के संवाहक…..संरक्षक…
प्रधान न्यासी –
संस्कृति शोध संस्थान , भारतभूमि
संकेतक-
स्वराज्य आंदोलन

Books:
भारत भारतीयता की ओर, व्यथा काव्य संकलन , अखंड भारत की ओर ,
भग्न-सत्य , क्रांतिस्फुलिंग

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रुके हो क्यों !

रुके हो क्यों ? अभी तक खोते साम्राज्य, ध्वस्त पताकाएं, खंड-खंड होते स्तम्भ, धुंधली दिशाएं ! नहीं दीख रहा ! दग्ध ज्वालाएं , द... Read more

जन-जन प्रिय रामम्

हे रामम् ! जन-जन प्रिय रंजन, नयन अभिरामम् , परात्पर परब्रह्म परमात्मन् प्रणामम् ! सत्-चित्-आनन्द घट-घट नामं सर्वस्व सन्निहित त्व... Read more

कहीं फटे न व्योम अंगार ...!

नहीं रहा अब न्याय धर्म , संकुचित पीड़ित सत्य विचार , पुण्य धरा हो रही आतंकित आक्रांत, झेल जिहादी बौछार , दिशाहीन भ्रष्ट शासनतंत्र ... Read more

क्या लिखूं

सोचता हूं... लिखूं काव्य चतुर्दिक विधाओं पर मुस्कुराती हर छटाओं पर कल कल जलधारों पर मलय की फुहारों पर टुकड़े-टुकड़ों के धर... Read more

तुम आओ !

तुम आओ ! ________ तुम आओ ! देख पथरीली आंखों का नीर , द्रवित हृदयों में पीड गंभीर ! कालाग्नि की दाहकता से वत्स टकराओ ! तुम... Read more

नेत्र

नेत्र ----------- विस्तृत नेत्रों के तरंग, और होंठो की लाली , दाह सा भरता उमंग लहरों की शीतलता संभाली ! भोली सी सरलता रूप ... Read more

आचार्यवर आर्यभट्ट

ग्रह नक्षत्र सूत्र समेकन नदियों का कल कल निनाद , गणित सार ज्योतिष रहस्य करता सदैव हे आर्यभट्ट याद ! है सत्य धरा को तूने शुन्य परिच... Read more

नववर्ष मंगलमय हो

नववर्ष मंगलमय हो ! ______________ सत्य सनातन सभ्यता के रक्षक , हे उन्नत विचारों वाले , क्रुर , दु:सह दु:ख - जड़ता का विध्वंसक , ह... Read more

दालान के वे दिन !

दालान के वे दिन ! _______________ वर्ष के सबसे काठिन्य दिनों में भी , बसंत में परिवेष्टित डूबा हुआ , न कुंठित न स्तम्भित श्वा... Read more

वीरन के होली कब कहलाई !

वीरन के होली कहलाई ! __________ जी चाहत हौ , हे सखे ! मन सरोजु बढ़ी जाई , घटत-घटत दु:सह दु:ख कटुता , वैरु समूल कुम्हिलाई । स्य... Read more

संस्कृति प्रवीर संभालें !

समर साध रहा समय है , सुविचारों संस्कारों का , वीरों के बलिदानों पर , निंदित हर विकारों का ; अपनी छाती पर अपनी संस्कृति नहीं लूटने ... Read more

विध्वंस रोकने को !

बीति रजनी तम से कोसों दूर दीप्त , एक स्वच्छ सुदृढ , सुह्रद उदय नवल प्रभात धरा पर आती- स्वर्णिम रश्मियाँ तप-त्याग प्रखर-पुँज... Read more

डूबता_आतंकिस्तान

डूबता_आतंकिस्तान _______________ जहां सिसकती बचपन दम तोड़े , व्याभिचार के अड्डों में , जहां बच्चे झोंके जाते हों , आतंक के खड्ड... Read more

पाकिस्तानी जनमानस की करूण पुकार

त्राही-त्राही करती मानवता , दशकों से संकुचित दर्द को खोली है , आतंकिस्तान की जनमानस सहमी मौन-स्वर में बोली है । घाटी में आतंक भय... Read more

वीर योद्धा अभिनन्दन

भारतभू के प्रहरी जागे तू स्वदेश हित , धीर वीर तुम , तुम आस अभिमान हो , सत्य संधान , विज्ञान अनुसंधान तुम , करोड़ों देशवासियों क... Read more

सुनो सिंहासन के रखवाले !

जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले के अवंतिपुरा में आतंकी हमले में हुतात्मा वीरों के याद में शासनतंत्र को कर्तव्यबोध दिलाती एक कवि की भावप... Read more

कैसे कहूं है हमारा देश गणतंत्र में

७० वीं गणतंत्र दिवस के महान अवसर पर पढ़िए मेरी एक कविता ... 🇮🇳 कैसे कहूं है हमारा देश गणतंत्र में ! _______________ जनमानस क... Read more

भारत की बेटियां

जिसने भारत की दिव्यता की प्रखर शक्ति बढायी परतंत्रता की संकट में अटूट विरक्ति दिखायी , जिनके अप्रतिम शौर्य - धैर्य से मिली स्वाधीन... Read more

पूछ रहा मूझसे स्वदेश !

पूछ रहा मुझसे हिमालय, पूछ रहा वैभव अशेष, पूछ रहा क्रांत गौरव भारत का, पूछ रहा तपा भग्नावशेष ! अनंत निधियाँ कहाँ गयी, क्यो... Read more

विक्षोभ

विक्षोभ ——————– स्तब्धित दिशाएँ बेकली हवाएँ व्यथित अंबर कह रहा आज – बेहद निर्मोही , बडी निर्दयता से ‘ कैसी ‘ – मिट रही , क्य... Read more

नवल प्रभात

बीति रजनी तम से कोसों दूर दीप्त एक स्वच्छ सुदृढ , सुह्रद उदय नवल प्रभात धरा पर आती स्वर्णिम रश्मियाँ तप-त्याग प्रखर-पुँज की... Read more

माँ तूझे भूला ना पाया !

माँ! एक दिवस मैं रूठा था बडा ही स्वाभिमानी बन , उऋण हो जाने को तुमसे भी विरक्त हो जाने को, त्यागी बन जाने को ! घर त्याग चला कही... Read more

रसिक मित्र

कुछ हैं मेरे रसिक मीत कुछ जिन्हें भाता संगीत कुछ अन्याय से होते विभीत स्वभाव से कुछ हैं विनीत| देख ललनाओं का सौम्य श्रृंगार मिल... Read more

धरणी नववर्ष

क्रुर संस्कृति, निकृष्ट परंपरा का यह अपकर्ष हमें अंगीकार नहीं, धुंध भरे इस राहों में यह नववर्ष कभी स्वीकार नहीं । अभी ठंड है ... Read more

स्वतंत्रता के स्वर्ण विहान हिन्दुस्थान

गीत,अगीत,अनुगीत के विधान तुम , कविता की शब्द-चारूत्ता के शोभा-धाम हो , भूधर-विपिन-लतादिक,भूति-भावित , स्मरण बारंबार , दिव्य-शक्ति... Read more

रक्तिम - भँवर

🌾रक्तिम - भँवर🌾 -------------------- --------------------- भर - भर आँसू से आँखें , क्या सोच रहे मधुप ह्रदय स्पर्श , क्या सोच र... Read more

जीवन की धार समझ

जीवन की धार समझ ================== रूप चमका- चमका के यों ही ज्यों मतंग मलंग घुमत ह्वै फटी गुदरीया , लुटी डुगरिया मनवा फिरंगी... Read more

राष्ट्रोदय

यह राष्ट्र मुझे करता अभिसींचित् प्रतिपल मलय फुहारों से , प्रतिदानों में मिले ठोकरों , धिकारों, दुत्कारों से , जो लूट रहे मुझको हर ... Read more

आहत ग्रामवासिनी मर्माहत कल !

उम्र बीत गयी ज्यों दासता के तले, मरकर यों ही ना दु:ख भूलाया कभी , मरना , है जीवन की एक दृढ कड़ी देखा एक मरा है , अभी-अभी ! ... Read more

कहो सत्य कथा विस्तृत !

अहो बन्धु ! कहो सत्य कथा विस्तृत शुद्ध-भाव,उन्नत विचार लेकर हूँ प्रस्तुत योगिराज की ध्यान सुना दो या सुना दो जयघोष, हिमालय सा अट... Read more

धार में ही मिला किनारा

डूबा हूँ आँसुओं में, ले दर्द का सहारा ये कम क्या मुझ पर अहसान यह तुम्हारा वे और लोग होंगे व्यथित, लहरों के संग भटके मुझको तो धार ... Read more

ज्वार उठाना होगा, मस्तक कटाना होगा

महासमर की बेला है वीरों अब संधान करो, शत्रु को मर्दन करने को, त्वरित अनुसंधान करो | मातृभू की खातिर फिर ल... Read more

आ जाना मेरे पास प्रिये !

अभि कल तक तुमने यूं ही प्यार किया , अहो विलक्षणी ! तुने कैसा श्रृंगार किया, रूपसी! तु मुस्कुराकर यों ही विसार ली, पाँव , चमकती द... Read more

स्वर्णिम भारत की बेटियाँ

संसार की सार अाधार हो तुम जीवन की हर सत्कार हो तुम मंगल शांति सुविचार हो तुम हर वीर मन की पुकार हो तुम प्रतिपल मन कहता हे बेटी... Read more

योग दर्शन

वृहत्तर भारत के अमर वंश की, उच्चत्तम यही कहानी है - ज्ञानी,ध्यानी,व्रती वीरों की योगमय रही जवानी है.. वसुधा सींचित् होती रही प... Read more

धरा का तु श्रृंगार किया है रे !

तू धीर, वीर ,गंभीर सदा जीवन को उच्च जिया है रे, तु दुःखियों को सींचित् कर श्रुति स्नेह से कैसा ,ह्रदय रक्षण किया है रे ! तु भाग्... Read more

ये देशद्रोही कौन हैं !

अभि कल तक जो देशद्रोह फैलाते मानवता पर गौण हैं, सेना को अपमानित करी,लोगों को कटवाया वर्षों से गोवध करने वाले आज मौन हैं; पहचान !... Read more

आर्त्त गैया की पुकार

कंपित! कत्ल की धार खडी ,आर्त्त गायें कह रही - यह देश कैसा है जहाँ हर क्षण गैया कट रही ! आर्त्त में प्रतिपल धरा, वीरों की छाती फट... Read more

वीरव्रती बंटी

तू मानवता के मूर्त्तमान, हे धर्मवीर ! तुझसे सम्मान प्रकृति के सदय पोषक तू, कंपन-व्यथन के अवशोषक तू | नित भिडे धरा पर शोषक से तू... Read more

गौ - चिकित्सा गर्भ समस्या...

गौ - चिकित्सा .गर्भ समस्या । - गौ - चिकित्सा .गर्भ समस्या ।गर्भ सम्बंधी रोग व निदान=======================१ - गर्भपात रोग====... Read more

काहें ! भूल गयले रे भाई !

काहें भूल गयले रे भाई ! अब आपन नया साल के मनाई ! काहें भूल गयले रे भाई ! जीवन के सौम्य - श्रृंगार के प्रकृति के बसंत... Read more

मंगल नववर्ष मनाएंगे

गाँव-गाँव में शहर-शहर में, कैसी छायी उजियाली है; खेतों में अब नव अंकुर , नव बूंद से छायेगी हरियाली है | बहुत कुहासा बीत चुका अं... Read more

वह

वह हर दिन आता सोचता बडबडाता,घबडाता कभी मस्त होकर प्रफुल्लता, कोमलता से सुमधुर गाता... न भूख से ही आकुल न ही दुःख से व्याकुल ... Read more

वीरों नववर्ष मना लें हम

है तिमिर धरा पर मिट चुकी आज भास्वर दिख रहे दिनमान , शस्य - श्यामला पुण्य धरा कर रही ; वीरों तेरा जयगान ! शुभ मुहुर्त्त में,महादे... Read more

आ जा चित्तवन के चकोर

स्वर्णिम यौवन का सागर-अपार टकरा रहा तन से बारंबार विपुल स्नेह से सींचित् ज्वार रसमय अह्लादित करता पुकार अन्तःस्थल में... Read more

तेरी याद सदा आती है

तेरी याद सदा आती है.... मुझको तू हरदम भाती है... रहता हूँ शांत भरोसों से ..... पर विकट व्यथित हूँ झरोखों से... है बहुत अधीर है व... Read more

कष्ट भरा गणतंत्र

जिस मिट्टी को सींचा जिसने लहू से बलिदानी , बचा गये सभ्यता बहु से नयन - नीर भरी , व्यथित ह्रदय , सोच रहा तन मन से कुछ पल कर लूँ ... Read more

आज मेरा मन डोले !

आकुल-व्याकुल आज मेरा मन , ना जाने क्यों डोले..... विघटित भारत की वैभव को ले ले भाषा इंकलाब की बोले आज मेरा मन डोले ! कष्टों का च... Read more

भारत भूमण्डल के मंगलस्वरूप !

संसार की सार आधार हो, स्थूल, सूक्ष्म पावन विचार हो दिव्य शांति सौम्य विविध प्रकार जिनसे सर्वत्र क्लांत , क्रंदन की प्रतिकार ! ... Read more

प्राण कहाँ !

हे मेरे भारत के लोग कैसा दुःखद ये संयोग; सह रहे जो आजतक वियोग, क्या मिल पायेगा कोई सफल योग ! नहीं सफल योग मुस्कान कहाँ जीवन जीन... Read more