परिचय -बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

नाम- बासुदेव अग्रवाल;
शिक्षा – B. Com.
जन्म दिन – 28 अगस्त, 1952;
निवास स्थान – तिनसुकिया (असम)

रुचि – काव्य की हर विधा में सृजन करना। मुक्त छंद, पारम्परिक छंद, हाइकु, मुक्तक, गीत, ग़ज़ल, इत्यादि। हिंदी साहित्य की पारंपरिक छंदों में विशेष रुचि है और मात्रिक एवं वार्णिक लगभग सभी प्रचलित छंदों में काव्य सृजन में सतत संलग्न हूँ।

परिचय – वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। मैं साहित्य संगम संस्थान, पूर्वोत्तर शाखा का सक्रिय सदस्य हूँ तथा उपाध्यक्ष हूँ। हमारी नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठी होती है जिनमें मैं नियमित रूप से भाग लेता हूँ। साहित्य संगम के माध्यम से मैं देश के प्रतिष्ठित साहित्यिकारों से जुड़ा हुवा हूँ। whatsapp के कई ग्रुप से जुड़ा हुवा हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है।

सम्मान- मेरी रचनाएँ देश के सम्मानित समाचारपत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती है। हिंदी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं।

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जनक छंद (2019 चुनाव)

जनक छंद (2019 चुनाव) करके सफल चुनाव को, माँग रही बदलाव को, आज व्यवस्था देश की। *** बहुमत बड़ा प्रचंड है, सत्ता लगे अखंड है,... Read more

ग़ज़ल (तुम्हारे लिए घर सदा ये)

ग़ज़ल (तुम्हारे लिए घर सदा ये) 122 122 122 122 तेरे वास्ते घर सदा ये खुला है, ये दिल मैंने केवल तुझे ही दिया है। तगाफ़ु... Read more

हाइकु (नव-दुर्गा)

हाइकु (नव-दुर्गा) शैलपुत्री माँ हिम गिरि तनया वांछित-लाभा। ** ब्रह्मचारिणी कटु तप चारिणी वैराग्य दात्री। ** माँ चन्द्... Read more

करवा चौथ पर आरती

करवा चौथ पर आरती ओम जय पतिदेव प्रिये स्वामी जय पतिदेव प्रिये। चौथ मात से विनती-2 शत शत वर्ष जिये।। कार्तिक लगते आई, चौथ तिथ... Read more

कामरूप छंद "आज की नारी"

कामरूप छंद "आज की नारी" नारी न अबला, पूर्ण सबला, हो गई है आज। वह भव्यता से, दक्षता से, सारती हर काज।। हर क्षेत्र में रत, कर्म म... Read more

उड़ियाना छंद "विरह"

उड़ियाना छंद "विरह" क्यों री तू थमत नहीं, विरह की मथनिया। मथत रही बार बार, हॄदय की मटकिया।। सपने में नैन मिला, हँसत है सजनिया। ... Read more

मेघ जीवन

"मेघ जीवन" किरणों की मथनी से सूरज, मथता जब सागर जल को । नवनीत मेघ तब ऊपर आता, नवजीवन देने भूतल को । था कतरा कतरा सा पहले, धुन... Read more

इन्द्रवज्रा छंद (शिवेंद्रवज्रा स्तुति)

इन्द्रवज्रा/उपेंद्र वज्रा/उपजाति छंद "शिवेंद्रवज्रा स्तुति" परहित कर विषपान, महादेव जग के बने। सुर नर मुनि गा गान, चरण वंदना ... Read more

सार छंद (पलाश और नेता)

सार छंद (पलाश और नेता) छन्न पकैया छन्न पकैया, टेसू सा ये नेता। सूखी उलझी डालों सा दिल, किसका भी न चहेता।। पाँच साल तक आँसू देता... Read more

माँ तेरी ममता का कोई मोल नहीँ

माँ तेरी ममता का कोई मोल नहीं। भू से भारी वात्सल्य तेरा, जिसका कोई तोल नहीं। माँ तेरी ममता का कोई मोल नहीं॥ हो आँखों से ओझल ला... Read more

वर्ण पिरामिड

रे चन्दा निर्मोही, करता क्यों आंख मिचौली। छिप जा अब तो, किन्ही खूब ठिठौली।।1।। जो बात कह न सकते हैं, हम तुमसे। सोच उसे... Read more

लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)

(सबसे लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल) काफ़िया=आ रदीफ़= *मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खातिर* 1222×4 खता मेरी अगर जो हो, तो हो इस देश की खात... Read more

"कृष्णावतार"

"कृष्णावतार" (रास छंद। 8,8,6 मात्रा पर यति। अंत 112 से आवश्यक और 2-2 पंक्ति तुकांत आवश्यक।) हाथों में थी, मात पिता के, सांकलिय... Read more

"होली" सायलीछन्द

शिल्प- 1 2 3 2 1 शब्द (1) होली का त्योहार जीवन में लाया रंगों की बौछार। (2) होली में जलते अत्याचार, कपट, छल निष्... Read more

फाग-रंग

संयुत छंद "फाग रस" सब झूम लो रस राग में। मिल मस्त हो कर फाग में।। खुशियों भरा यह पर्व है। इसपे हमें अति गर्व है।। यह मास फा... Read more

शारदा वन्दना

"शारदा वंदना" मा वास बना कर मेरे हृदय में श्वेत पद्म सा निर्मल कर दो । शुभ्र ज्योत्स्ना छिटका उसमें अपने जैसा उज्ज्वल कर दो ।।... Read more

भारत यश गाथा

"भारत यश गाथा" ज्ञान राशि के महा सिन्धु को, तमपूर्ण जगत के इंदु को, पुरा सभ्यता के केंद्र बिंदु को, नमस्कार इसको मेरे बारम्बार... Read more

ग़ज़ल (26 जनवरी)

ग़ज़ल (जनवरी के मास की) 2122 2122 2122 212 जनवरी के मास की छब्बीस तारिख आज है, आज दिन भारत बना गणतन्त्र सबको नाज़ है। ई... Read more

ये बेटियाँ हमारी

"ये बेटियाँ हमारी" (22 12122 22 12122 बह्र की रचना) ममता की जो है मूरत, समता की जो है सूरत। वरदान है धरा पर, ये बेटियाँ... Read more