Ashwini sharma

Jaipur

Joined January 2020

Second grade mathematics teacher

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माँ

मानता हूँ मुकद्दर अच्छा नही मेरा, लेकिन मेरी माँ का हाथ मेरे सिर पर है ।। मैं दिखता हूँ दुनिया से अकेला लड़ते हुए, जो बचाती है अं... Read more

कोरोना

एक अदृश्य आफत ने, हमको बहुत डराया है, कोरोना नाम का ये प्राणी, भारत देश में आया है ।। सिमट गये है घर तक अपने, ना कही आना ना जाना ह... Read more

कोरोना

देश में हाहाकार मचा है, आतंक हुआ एक विषाणु का। दहसत ऐसी फैल रही, लगता है की ये अग्रज है परमाणु का।। जाती धर्म और सम्प्रदाय से प... Read more

जीवन

मुकम्मल होने की चाहत ही नही, अधूरेपन में एक अजब सा मज़ा है। बेशक बहारे; सुकून- ओ-चैन देती है, गर खिज़ाँ नही हो तो, बहारों में जीना... Read more

जीवन

चलो आज बेताब मन को थोड़ा विराम दे, बेज़ार धड़कनो को थोड़ा आराम दे, भूल के रस्मे दुनिया की ,खुद को बचपन वाली वो शाम दे।। भीड़ है इर्द... Read more

बचपन

आज मुझे फिर याद आया मेरा वो बचपन, जिन्दगी बोझ नही थी,बेझिझक था ये मन।। खेलना वो मिट्टी में, धूप से दो चार होना,फेंकना वो पत्थर पान... Read more

हौसला

विहंग एक उड़ा नभ में, दूर तक न तरु की छाया थी, धूप घनी थी राह कठिन थी,संघर्षो की सतत माया थी।। फिर भी वह विहंग रुका न थका, अविरल वह... Read more

वतन

ये वो मेरा देश जहाँ बहती है गंगा यमुना, ये वो मेरा देश जहाँ बहे स्नेह समर्पण का झरणा । इस देश की मिट्टी पावन है, जहाँ माँ की बातो... Read more

जीवन

जीवन बना एक मरीचिका इच्छाओं का छौर नही, खुद ही खुद मे सब उलझे है, दोषी स्वयं से बडा कोई और नही।। अब क्या है,आगे क्या होगा जीवन खे... Read more

नियत

पिता लकवा ग्रस्त थे, गर्मियों की रात थी प्यास से व्याकुल थे । पास ही सो रहे बेटे को जगाना चाहा, लेकिन बेटा आवाज सुनकर भी नही उठा औ... Read more

माँ

माँ ही गंगा, माँ ही यमुना, माँ सरस्वती सी पावन है, माँ ही पतझड में एक चलता फिरता सावन है । माँ को देख लिया तो फिर इश्वर के दर्शन क... Read more

मानव

अगर हो हार जीवन में तो गम नही करना, गिर जाओ गर थककर, फिर से मेहनत कम नही करना।। असफलताएं आयेंगी तुम्हे आजमायेगि बहुत, फिर उसी जोश... Read more

दुनिया

दोषी यहाँ बात करते है अपने अधिकारो की, निर्दोष को फिक्र है यहाँ खुद को बचाने की।। उंगलियाँ उठती है यहाँ बेगुनाहो पर, शाजिस होती ह... Read more

दोस्त

उसकी फितरत थी दगा देने की ,फिर सोच ये की मुझे इल्म नही। मुझे पता है बाज़ार के हर एक खरीददार का, बैचेन हूँ, बेखबर नही।। Read more

रिस्ते

इन्सान की कीमत का क्या मोल यहाँ, भगवान खरीदे जाते है । अभिमान भरी इस दुनिया मे रिस्ते ठोकर खाते है ।। पल पल बिगड़ते रिस्तो की हालत... Read more

प्रेयसी

तेरे रुखसार की लाली गुलाबों से भी गहरी है, तेरी आँखो की गहराई,सागर को भी शरमा दे। तेरे कंगन की खनखन मेरे मन को अलंकृत करती है । त... Read more