कथाकार। कवि। संपादक – शब्द शिल्पी पत्रिका और प्रकाशन। सतना मध्य प्रदेश

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मां गंगा का नीर है

मां गंगा का नीर है मां गंगा का नीर है व मां बरगद की छांव. शीश झुकाता मै वहां जहां हैं मां के पांव. जनम दिया बडा क... Read more

गीत

अर्थ के अब अनर्थ हो गये शब्द है मृत्यु के पाश मे।। व्याकरण लापता हो गया मुहावरे भी गति विहीन है सूक्तियां क्यों अब मौन हैं। ... Read more

गीत

मै अपने दिल की रामकहानी लिखता हूं। अपनी पलकों से बहता पानी लिखता हूं। कविता मेरे अंतर्मन की परिभाषा है। कविता मेरे सपनों की ... Read more

गीत

धरती जल रही है औ सूर्य हंस रहा है। वातावरण को देखो ये कैसे डस रहा है। कांक्रीट के वनों में हम अब रह रहे हैं। हरियाली की बाते... Read more

ग़ज़ल।

कोशिश बहुत की बदलाव के लिए। राहत नहीं है दिल के घाव के लिए। वो मुझको बेवफा अब मान बैठी है जगह नहीं दिल मे सद्भाव के लिए। ... Read more