मैं अवधेश कुमार राय आप के लिए अपनी रचना लेकर आया हुं,
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जिद है।

तुमसे मिलने की जिद है हमारी निगेहबान रहे। हम रहे ना रहे आप हमारी शब्दों में पहचान रहे। गुलों से टूट कर हम क्यों न बिखर जाएं यार। ... Read more

थक गया हूं

तुझ पर लिख कर थक गया हूं। सनम सच कहुंगा थम गया हूं। तुझसे मिलने की कोशिश करूं कैसे। कदम तेरे घर की दहलीज पर ठिठक गया हूं। रूबर... Read more

नकाब

इन चेहरों के पीछे कई नकाब है। इन हसरतों के पीछे कई नकाब है। इन चेहरों में होती हैं बांटने की साजिश। इन रकीबों के पीछे कई नकाब ह... Read more

चाचाजान

ऐसे तो हमारे चाचा जी काफी जिंदादिल इंसान हैं, मगर जब से देश में अफजल जिंदाबाद के नारे सुने हैं तब से थोड़े भावुक रहते हैं भावुक हो भ... Read more

उदाश हूँ

सुबह से उदास हूँ, मैं एक ख्याल सा. कुछ खो गया दिल तन्हा उदास सा. ये ख्याल किसी चाहत की जुर्रत। या जुगरे रातों की अनकही कहानी। जो... Read more

कुण्डलीया

तेरी नाजुकाना कलाईयां है. यह लेती मेरी बलाइयां है मेरी बलाइयां ही नहीं. इश्क़ पर चढ़ाती प्रेम की रंगिनीया है. जरा संभल मंजर मेरे ... Read more

मुक्तक

ये मेरी पंक्तियां तुम्हें पुकारती है. हर दिन सिर्फ़ तु याद आती है. बहोत बहलाया हमनें अपनी तजुर्बे से इसे. मगर दिल नादान कहाँ समझ प... Read more

कुण्डलीया

मौसम का उतार चढ़ाव, उफ तेरा उदास होना. एक दिल से दिल का टुकड़ों में इकरार होना. इन टुकड़ों में दे आयें हम इश्क़ आपको. लम्हा तुझ बिन ब... Read more

भूलने की ज़िद

भुलाने की ज़िद तुम्हारी थी. हमें क्यों रखा भुलाने वालो में. शाम क़ातिल थी. क्यू रखा हमदर्दी जताने वालो में. बड़े मुख़तलिफ़ थे हम... Read more

दिल फेक है

बड़े दिल फेक है, साहब. तुम्हारे शहर के चाहने वाले। सब ने दिल में ख्वाहिशे रखी. आपको बेताब चाहने वाले. सब्र रख मेहविश अपने इत्तदा ... Read more

अधरों पर रखी हसरते मुल्तवी

रात की हर पहर ख्वाहिशे ले गई. दिल ने सज़दा किया मेरी ज़िक्र ले गयी. तुम सम्भालो मुझे रात कुछ केह गयी. दिल की तम्मना जवां बात दिल की... Read more

भूलने की अदा सीखी है..

अजामती रही है, मुझे तेरी यादें। तू नहीं हरगिज़ नहीं मानु कैसे। हमें आज़माती रही तेरी यादें.. लाख हम निकलने की कोशिश करे खुद से. ख... Read more

नफ़रत

इतनी गैरत भरी नज़रो से न देख मौकील, मुझे इतनी नफरतों से न देख मौकील, तेरे इत्तिदा के दिन गैर हो रहे है, मुझे तराश रहे तेरे शहर के... Read more

शाम - ए- दिल्ली

अजब सी कैफियत में दिल लिए घुम रहा दिल्ली. शहरी हलचल की तस्ववुर में झुम रही दिल्ली. बैचेन सभी हसीन चेहरे शौख -ए- नजर. कितनी गुमानि... Read more

रुका तो था पुरानी चौक पर

जब से गुजरा हुं तेरी गली से. हर सांस याद आ गई. वो मेरी पहली मोहब्बत थी कभी. मुझे तेरा हर बात याद आ गई. ठहरा तो था तेरे चौक पर. ... Read more

प्रजातंत्र

अब कौन का तंत्र हैं. कहने को प्रजातंत्र है. मौलिकता की खोज में. वादो यादो की सोच में. जरा ठहर अभी तो जागा हैं. मुल्क मेरा क्यो ... Read more

भुला दो

बहुत चाह हैं, भुला दो. मेरे दिल को तुम दुःखा दो. मेरे एतबार की मचलता हुई एहसास हो. मुझे तुम यूँही भुला दो. ये दिल है, ना कोई ... Read more

रेहनुमा

मेरी पिर तुझें क्यों दिखाई नहीं देती. मेरी हसरतो की खीझ तुझे सुनाई नहीं देती. मौला ना रहा मेरे पिर का अब वो. ये रेहनुमा तुझे इस... Read more

सजनी

डुबते सुरज की इस घड़ी में. गोरी ! किस व्यथा के संग. फिर आयेंगे बालम तेरे. फिर जागेगी दिल में मृदुल उमंग. शहरी भिड़ की आपा - धा... Read more

सनम

कोई खता हो सनम तो केह दो. मेरी तमन्ना को रख दो. बाकौल हो रही मेरी आरजु से जुस्तजू. अपनी दिल की गहराईयों को कह दो. उड़ चल तेरे ... Read more

दिल

दिल को थामे रखा हैं. यादों को अंशुमन के धागे में बांधे रखा हैं. कोई जजीरा गिरफ्तार ना हो हुश्न में. दिल को कागज पर टिकाये रखा हैं... Read more

मिट्टी मेरे गांव की

मौज रही गलिया चौबारे. वो धुल सनी कच्ची राहे. हवाओं के संग सरसों गाए. खेतो में सारंगी सरपत बजाए. मौज रही गलिया चौबारे. नहरों म... Read more

शिकवा

भुला दो मेरे महबूब. जो गम के सैलाब उठे हो दिल में. खत्म कर पनाह. जो इनकार किये दिल ने. मैं मौजू हो उठा दिल के. यह दर्द की सिल... Read more

मन का घोषला

मन मोर नहीं बस मन मे मोरे. उङत बहत पनघट पर तोरे. रची सजी मुरत तोरी. कहाँ जाई तोहे छोङ के गोरी. हृदयाघात भए मन मंदिर में. मन क... Read more

नई मुक्तक

दिल पर जमी दर्द का एहसास हो गया. मुझे मेरी इश्क का विश्वास हो गया. जो बनाए हो दायरे मोहब्बत की तुमने. उस पर उम्र तुम्हारी खिलाफ़ ... Read more

अबकी बसंत

आई बसंत की बेला. नभ उपवन में छाई मेला. अमीया पर मंजर ले लाई. पपीहा संग मधुर पवन बहाई. रोम - रोम पुलकित हो जाती. सरसों की बाली ज... Read more

घर से दुर

से़ाचा कुछ दिन गांव चलु. घर से दुर आराम करु. खेतों की पगडंडी पर. बाबा की उस मिट्टी पर. सपनों का दिदार करु. सोचा कुछ दिन गाँव ... Read more

तुम वहीं हो

जो तुम दिल की बात कर रहे हो. मेरी हसरतों को गुलजार कर रहे हो. मुझ से जुङी तेरी मोहब्बत की इनायत. तुम वही हो जो बदनाम कर रहे हो. ... Read more

पलायन

आज के भारत में रोजगार की तलाश में पलायन आम बात हैं, चाहे वो पढ़ा लिखा अभिजात्य वर्ग का हो या अनपढ़ गरीब नागरिक | गाँव से शहर कि ओर ब... Read more

रिश्तो की विडंबना

कभी - कभी इंसान अपनी महत्वआकांक्षाओं में इतना लिन हो जाता हैं, उसे समाज, घर, देश, की परवाह नही होती | रिश्ते ताने - बाने का वह गला ... Read more

कफ़न

चमन खिला रहा हुं, बहारों में अमन खिला रहा हुं. कोई मुद्दत नहीं मेरी महबूब . मैं तो कफन सिला रहा हुं. गौर करना मुझको वतन. तेरे ... Read more

कोयले की कालिख

जब मैं छोटा था, मेरे शहर में कोयले जलाये जाते थे, जलावन के लिए. हर तरफ सिर्फ कोयले का कारोबार नजर आता था, चाहे वो उच्च वर्ग के लोग य... Read more