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ग़ज़ल

रात गहराये डरो मत हौसले छोड़ा करो मत। दर्द जितना भी रुलाए सिसकियां प्यारे भरो मत। लोग जलते हों बला से आप पर जल के मरो मत। दिल र... Read more

विविधता

अलग-अलग उदधि-लहरें,लगतीं हैं पर यार, हिल-मिल सब संग रहतीं,अलग नहीं है यार, विविध-विविध सा बहुत है,रंग,धर्म अरु जात, विविध-विविध ग... Read more

फुटाने

आठ से दस वर्षीय तीन बालक एक किराना दुकान पहुंचे।दूकानदार वृद्ध था। " क्या लेना है ? " " दो रूपये के फुटाने ।" दूकानदार ने कोने मे... Read more

मिलन

मेघराज की बदरी रानी, मेघ-पिया ढूंढत पगलाय। ढूंढ-ढूंढ खुद आप हिरानी, मेघ-सजन कित गये हिराय। श्रम-जल भीगी सारी सारी, सारी... Read more

परिचय

परिचय ख़ुद से कर मना,मिले ख़ुदी का भान । उससे नित हो सामना ,रमे उसी में ध्यान । रमे उसी में ध्यान,होय अजपा- जप अरचय। मिले पर... Read more

माँ भारती

माँ भारती की शान में, ग़ुस्ताख़ियाँ होने न दें। ग़ुस्ताख़ की ग़ुस्ताख़ियों, की माफ़ियाँ होने न दें।। हिंदुस्ताँ को तोड़ने की, भी साजिश... Read more

बेटियाँ

बेटियाँ ठुमकत अँगना,तुतले- तुतले बोल, छम-छम पैंजन की छमक,छिन कितने अनमोल।१। जग में तीरथ बेटियाँ,तारत दो परिवार, है पहिला तो मायरा... Read more

बेटियाँ

बेटियाँ ठुमकत अँगना,तुतले-तुतले बोल, छम-छम पायल की छमक,छिन कितने अनमोल।१। जग में तीरथ बेटियाँ,तारत दो परिवार, है पहिला तो मायरा,द... Read more

अनुरोध सोलह/सतरह से

नमन करहिं नव बरस कहिं,अउर करहिं अनुरोध, सतरह तिहरे शासन हिं ,धन नहि करहिं अबोध।(१) बुरी गयी सोलह सदी ,छिने छिपे सब नोट , देखब क... Read more

नववर्ष २०१७

सलाम करते हम सभी, तुझको ओ नववर्ष। सतरह तेरे राज्य में, सबका हो उतकर्ष। सबका हो उतकर्ष , न हो कोई भी ग़ुलाम। यूँ ना हो अपकर्ष ... Read more

कलियुग-दंश

हे श्याम तुम्हारे राज्य में, कंस ऐंठते मूंछ। सुनें सिंहश्री गीदड़-भभकी, रहें दबाए पूंछ। सज्जन दुर्जन के घर जाके, रोज़ दबाएँ पैर... Read more

पैसा

पैसे से ही जगत में, आन बान और शान। पैसे की ही जुगत में, फिरता है इंसान । फिरता है इंसान , बना यह काशी काबा। थका करत गुणग... Read more

षडपदी

बढ़ती जाय घड़ी की सुइयाँ, पल छिन घटत उमरिया हाय। तौ भी ऐश की फिक्र सतावे, मुफत का माल कब मिल जाय। दाँत बचे नहि मुँह में इक भी, ... Read more

माँ की अभिलाषा

लाल तू भी काम आजा वीरता की जंग में। नाम तू अपना लिखा दे भारती की जंग में। ज़िंदगी तो मातृ-भू की नेमतों की देन है। क्यों न माँ ... Read more

क़तअ

दर्द दिल का बढ़ा अब दवा दीजिए, अपने दामन की थोड़ी हवा दीजिए , मर्ज बढ़ता ही जाता है रफ्ता रफ्ता , अब दवा की ख़ूराकें बढ़ा दीजिए । Read more

मशविरा

दुनिया में सब कुछ पाने की, ख़्वाहिशें जारी रखो, ज़मीं क्या है फलक छूने की, कोशिशें जारी रखो, दम लेना पहुँच कर अवधूत, चाही मंज़िल प... Read more

देशगान

हर दिन उठाएँ ये क़सम, भारत के दिलो जान हम। यह दिलो जान से प्यारा, इसके तो दिलो जान हम।। ये महकता गुलशन रहा, महकता गुलशन ... Read more

गुलाब

अश्को से सींचोगे दहकेंगे , यादों के गुलाब। यादों से सींचोगे महकेंगे , वादों के गुलाब। Read more

समय

समय बदलते देर न लगती, क्यों खोवे है आस ? नव प्रभात फिर से आवेगा, रख रे ऐसी आस । जब झेलेगा सिर पर अपने, श्रम-घन की तू मार। अवधू... Read more

गुण त्रय

हैं रंगत जग जीव सब, सत रज तम गुण तीन, ईष्टमन-गेवा--टेक्नी--, क्या है अदभुत सीन । क्या है अदभुत सीन , रोज़ ही खिलती होली। जीव त... Read more

ग़मो ख़ुशी

रहती नहीं मिठास,ज़ुबाँ पर देर तक, रहती मुई खटास,ज़ुबाँ पर देर तक, ग़मोख़ुशी का मेल,जो काश हो जाता, रहती ग़मोख़ुशियाँ,ज़ुबाँ पर देर तक । Read more

कृष्ण की मुरली

मधुबन बजत मुरलि मधुर, सुनि सुनि सुधि बिसारी है। बजाय पुनि पुनि मधुर धुन, स्व वश करत मुरारी है। गृह तजि तजि धाय मोहन, मुरलिधर ह... Read more

मासूम क़ातिल

क़ातिल कभी मासूम नहीं होता है, मासूम कभी क़ातिल नहीं होता है, मासूम कहीं हो जाए बिसमिल अगर, बिसमिल ख़ूनी,क़ातिल नहीं होता है। Read more

जीवन के धन

जर जोरू और ज़मीन, जीवन के धन तीन, जिनको ये हासिल नहीं, जीवन उनका हीन। जीवन उनका हीन, चलाते चक्कर भारी। रह जाएं ना दीन, झौंकते ... Read more

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी बेवजह हो तो इल्जाम होती है, ज़िन्दगी बावजह हो तो इनाम होती है, जो बना रहे हैं ज़िन्दगी दोजख अवधूत, वो ज़िन्दगी बिलावजह बदनाम... Read more

ज़िंदगी

ज़िंदगी के इतने सवाल क्यों हैं ? ज़िंदगी में इतने बवाल क्यों हैं ? तक़ाज़े तक़ाज़े और तक़ाज़े, इनमें यूँ इतने उछाल क्यों हैं? हैं म... Read more

"श्रीपति दास"

पति जैसे जीव का भैया, इस जग में कोई दूसरा सानी नहीं है। पत्नियों ने इसे आज तक, अनदेखा किया हक़ीक़तें मानी नहीं है। खड़ा बगुले सा ए... Read more

भगवद् गीता के श्लोकों से

(१)अवनि अंबर अनिल अनल, अंतस व अहंकार। मिलकर आप: औ अकल, अपरा अष्ट प्रकार। --(आप:-पानी),(अकल-अक्ल बुद्धि) (२)अष्ट अकार से व... Read more

मशविरा

खाने के मुआमलात में, ज़ुबान काबू रखना। कहने के मुआमलात में, ज़ुबान थामे रखना। बड़ी बेबाक है अवधूत, फिसलती यकायक। बेबाकी करे मनमा... Read more

जज्बा ए मर्दां

मुक्तक,,, तुम्हारा इक इक बोल क़तरा है , शहद का। तुम्हारा इक इक बोल मिसरा है, अहद का। मंज़िल करेगी ख़ैरमक़दम देखना, अवधूत,। तुम्ह... Read more

दोस्त

मुक्तक अपनापन भरपूर दे,सनेह से दे सींच। दिलदारी भरपूर हो,कठिनाई के बीच। उलाहना ना दे कभी,हरे यार का दर्द। मिले तो आतुरता से,बहिय... Read more

यारब

उस रब को तू याद कर , सुबह रहे या शाम। राम नाम सुरसरि बहे, प्रभु जी आठों याम। प्रभु जी आठों याम, भजन की लगन न टूटे। जग में प्य... Read more

""मनुजता""

(१) सुजनता और सुमनता,मनुजता के प्रमाण। मनुजता से हीन मनुज,समझो बस निष्प्राण ।। (२) कुंअर सुँअर में भेद है, समझे वही सुजान। ... Read more

कन्या भ्रूण संरक्षण

कविता क्यों बिटिया तुम्हें रास आती नहीं ? क्यों ख़ुशियाँ तुम्हें यार भाती नहीं ? है बिटिया घरों में चहकती बुलबुल, क्यों बुलबुल तु... Read more

मंहगी सब्ज़ियाँ

दोहे (१)बैठ सब्जी बाज़ार में,अपनी आँखें सेंक। ख़रीदना मुमकिन नहीं ,ख़ाली नज़रें फेंक।। (२)सब्जी जी ही क्रुद्ध नहीं,जिंसों में भी उछाल... Read more