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मतगयंद सवैया

दीप वही तम जो हरता जुगनू जलता न जला तम पाये प्यास हरे हर बूँद सुधा बसुधा हर पीर पिये मुसकाये नीरज कीचड़ अंग लगे अपनी पर कोमलता न भ... Read more

मुक्तक

आँखों के स्वप्न यूँ जले काजल से जा मिले आँसू हमारी आँख के बादल से जा मिले दुनियाँ की बेवफाई से जब दिल ये भर गया थोड़ी सी वफा के ल... Read more

कुण्डलिया छन्द

कोई तो कानून हो, है भारी अपराध मच्छर आदम खूँ पियें, ले ले कर के स्वाद ले ले कर के स्वाद, करें कानों में उँगली रगड़ रगड़ खुजलात, म... Read more

दोहा

पलकें अनशन कर रहीं, आँखें बेउम्मीद अगर मोल मिल जाय तो, ला दो कोई नींद बेलन जब सर पर पड़े, चले न कोई जोर बीबी जब मारन लगी,... Read more

मुक्तक

ये दिल निकाल कर कहीं रख दो दराज में हो गये हैं लोग अब पत्थर समाज में मार कर दिल के जमीरों को खुदा मिलता नहीं बेवजह ही सर झुकाये ब... Read more