ashwini pathak

Joined December 2016

मेरे जज़्बातो को बहने दे ,गले से न लगा
वर्ना मैं सिस्कियाँ लेते हुए मर जाऊँगा

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कविता

शब्द-लेखनी पग-पग चलकर धीरे-धीरे निखर संवर कर चिंतन मन से तल पर उतरो जन मानस के भीतर बिखरो देखें वह जो धरे बोझ सर लगा रहा झाड़ू ... Read more

" लो फिर आ पहुँचा नववर्ष"

लो फिर आ पहुँचा नववर्ष होने लगी बीते साल के लेखे-जोखे की जाँच प्राप्त-अप्राप्त पर विमर्ष हर वर्ष की भाँति फिर होगा निर्धारण ल... Read more