मैं

ऐ ज़िन्दगी तेरे हर हुकुम पे जी गया हूँ मैं। बस यही इक ज़ुर्म है जो कर गया हूँ मैं।। अब इस कारागार से बाहर क्यों निकलू मेरे दोस्त... Read more

छुक छुक रेल

छुक छुक चलती रेल है बच्चों की वो खेल है सबको अपने साथ लिए राहों को भी पास लिए पेड़ों को ना रुकने देती स्टेशन को न छूटने देती... Read more

माँ-ममता का खज़ाना

क्यूँ करता नादानी पगले अपनी माँ का हाल तो देख भीग चुकी जो आँशुओ से उसकी गीली सॉल तो देख तू सोचता है कि उसको तेरी फ़िकर नहीं पर त... Read more

कोई

बे-सबब दिल में बसा जा रहा है कोई लगता है कुछ साजिश रचा रहा है कोई मेरे कूचे में ही है आशियाना उसका फिर भी छुपा छुपा सा जा रहा ह... Read more