अशोक सोनी

भिलाई ।छ .ग.

Joined September 2017

पढ़ने-लिखने में रुचि है
स्तरीय पढ़ना और लिखना अच्छा लगता है
साहित्य सृजन हमारे अंतर्मन को उद्घाटित करने वाला एक सशक्त माध्यम है ।

Copy link to share

आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

हिंदी साहित्य के जिस काल का नामकरण ' द्विवेदी युग ' के नाम से जाना जाता है ,उस स्वर्णिम साहित्य काल के प्रवर्तक आचार्य महावीर प्रसाद... Read more

सरलता

सीधे सुन्दर वृक्ष ही , सहते रहे कुठार । टेढ़े - मेढ़े वृक्ष पर , कौन करे प्रहार ।। *** सीधे जन की नियति है , सह जाएं आघात । क... Read more

नियति चक्र

बसंत व्यतीत हो गया , सुख अतीत हो गया , ग्रीष्म की तपन लिए , दुःख ही गीत हो गया । चैन ,अमन ,शांति सब , जाने कहां चला गया , जग क... Read more

जीवन - पथ

दिग्भ्रमित पथिक , आवारा रास्ता , जीवन में जैसे , भटकाव ही भटकाव । कहां जाएं , किधर जाएं , न कहीं ठिकाना , न कहीं ठांव । चिलच... Read more

भीगी पलकें

तुमको देखा तो भोर हुई , मन में हर्ष हिलोर हुई , विकल हृदय की धड़कन भी , पा तुम्हें भाव - विभोर हुई । रुठी जब प्रिय तुम मुझसे , ... Read more

मां समझ न पाई

अचानक .....बेटे को मां की याद आ गई । मां को लेने गांव पहुंच गया । एक छोटे-से कच्चे मकान में मां अकेली ...। हां अकेली ही रहती थी । बे... Read more

बेरुखी तुम्हारी

मेरी तासीर में तो बस , अहले वफ़ा ही थी । उसमें कहां ज़रा भी ,ज़फा की अदा ही थी । *** कुछ तो तुम्हें भी , मुगालता हुआ ज़रूर । ... Read more

निश्छल चतुराई

सीढ़ी...बस एक ही है । ख्याति.......... सफलता........और... पुरस्कारों की .....। किसी भी कीमत पर...... टिक जाना । और.... । कि... Read more

सारे कुत्ते चुप

सुबह - सवेरे शहर के एक तिराहे पर , चार - छह मरघिल्ले से कुत्ते , भौंक - भौंक कर एक दूसरे से झपट रहे थे । कमजोर होने के बावजूद , ... Read more

मन पुलक-पुलक हुआ

मन ने जब उसके मन को छुआ , मन पुलकित प्रमुदित आज हुआ , मन अभी तलक जो कह न सका , मन विरह ज्वाल जो सह न सका , अन्तर्मन की वह आ... Read more

व्यथा कथा

श्रम नीर लिए , हिय पीर लिए , भाल पे स्वेद बहा के चले , क्षीण यष्टि लिए , सृजन-दृष्टि लिए , छोड़ के गेह कहां को चले , निस्तेज नयन... Read more

दस्तयारी

हर ओर समंदर फैला है , दूर तलक बस पानी है । इकलौती कश्ती छोटी सी , रात बड़ी तूफानी है । दस्तयारी मिलेगी कैसे , और दस्तयार बनेगा... Read more

फितरती

यदि भुजंग विष न पाता , यदि उसे डसना न आता , लोग कंठ में पहन घूमते , बेचारा माला हो जाता । उसका नहीं मनुज से नाता , विष फिर मनु... Read more

जीवन दर्शन

एक नाविक किसी विद्वान को नदी पार करा रहा था । विद्वान ने समय व्यतीत करने के उद्देश्य से नाविक से कुछ बातचीत करना उचित समझा , उसने ना... Read more

आरज़ू

अनचाहे ही याद तुम्हारी आई गुलाब-सी // तुम हो फूलों की रंगत तुम हो शबाब-सी // तुम से ही दिल वाबस्ता ,थीं तुम ही शुर्ख़रू // अखलाक ... Read more

मदिरा मजबूरी या जरूरी

कभी न देखी , सुनी कभी न , ऐसी विपदा भारी // युक्ति और तदबीर निकाली जितनी भी थी सारी // रखना है सबको सुरक्षित और सबको समझाना // भर... Read more

अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ ( व्यंग्य )

*********लम्बी ----- लम्बी लाइनें । सबके चेहरे पर एक सुकून और आशा का संचार होता दिख रहा है । हालांकि सबके चेहरे ढंके हुए हैं लेक... Read more

हंदवाड़ा के वीर सपूतों को नमन

है नमन तुम्हे हे वीर पुरुष भारत का मान बढ़ाया है // मातृभूमि की गरिमा हित जिसने सर्वस्व चढ़ाया है // क्या कहना उन हठधर्मी को जो... Read more

आग

दिल में लगी है आग // कि बुझती नहीं है ।। तुम्हारी यादों की हवा // आखिर जो थमती नहीं है ।। Read more

भावना

न बात तुम कर सके // न बात हम कर सके // भावना को व्यक्त करने // न शब्द एक हर सके // हाथ से कई -कई // शब्दकोश निकल गए ।। Read more

कौन दानी

अनायास ही हमारे सामने एक विकट संकट खड़ा हो गया है। किसी ने कल्पना भी न की होगी कि एक ऐसा भी दिन आ सकता है कि जिससे सारा भूमण्डल ही भ... Read more

याद तुम्हारी

आंखें बार-बार भरमाई , याद तुम्हारी हर पल आई ।। कैसे निर्दयी बन बैठे तुम , पाती तक न एक पठाई ।। Read more

तैराक

डूबा ऐसे नयन झील में , फिर तट पर कभी न आया // तुम तो थे तैराक ग़जब के , मुझे तैरना कभी न आया // Read more

मेरे हिस्से का दुःख

मेरे हिस्से का दुःख था और कहां जाता // आना ही था उसको फिर कैसे न आता // सोचा था सुख सारे दुनिया के हर लूंगा // सोचा ये था दुःख स... Read more

कानून से खिलवाड़

अलीगढ़ से लेकर इंदौर ,लखनऊ तक कुछ लोग कानून व्यवस्था ध्वस्त करने में लगे हैं । विपत्ति के इस कठिन समय में जब पूरा देश ही इससे निज़ात... Read more

हे आदित्य

हे सूर्य देव , हे शक्ति पुंज , भीषण ज्वाला के कराल कुंज , हे सकल सृष्टि के आदि पुरुष , है नमन तुम्हें हे मार्तण्ड , हे प्रभाकर,... Read more

मन है कि मानता नहीं ( व्यंग्य )

मिस्टर मानूराम भी अपनी तरह के अकेले शख्स हैं । लाकडाउन चल रहा है इसलिए वह अपने दोस्तों से मिलने भी नहीं जा सकते और न ही उनके दोस्त म... Read more

बड़ी संजीदगी से

कभी खामोश रहता है , कभी चुपके से कहता है // रवानी ही रवानी है , बड़ी मुश्किल कहानी है // भीतर है कहीं कुछ तो ,जो दरिया बन के बहता ... Read more

ग़म का सुरूर

ग़म मेरा दोस्त न था , पर दोस्त बन आया ज़रूर // आ ही गया है ग़र तो कुछ न कुछ लाया ज़रूर // जाएगा जब भी यहां से यकीनन खुशी देगा ज़रू... Read more

लिखता हूं इसलिए

लिखता कहां हूं यह सोचकर कि , मशहूर हो जाऊं // कुछ पल मिले सुकून के , और कुछ नफासत के // घड़ी दो घड़ी के लिए सही , ग़म से दूर हो जा... Read more

चलना होगा अकेले

न रथ है न कोई पथ है रथ-पथ विहीन दौड़ा चला जा रहा है अश्वमेध यज्ञ के तुरंग-सा अदृश्य निर्जीव एक विषाणु और विस्तारित हो रहा है र... Read more

समय का रथ

रथ समय का निरंतर चल रहा है // कौन जाने गर्भ में क्या पल रहा है // कब कहां कैसे कितना क्रूर हो वह // लेकर विषाणु अहंकार में चूर ह... Read more

खूबसूरत

'"अब शहद लगा कर चाटो , बहुत खूबसूरत है न । लाखों में एक है , यही कहा था न तुमने । रख लो अब शोकेस में । घर की खूबसूरती में और चार चां... Read more

संग-संग लाकडाउन मनाते ( हास्य )

( व्यथा एक कुंवारे की ) सुन रे कोरोना ! ठहर जाता ग़र महीना दो महीना क्या बिगाड़ हो जाता तेरा मुझसे क्या कोई दुश्मनी थी जो चला आ... Read more

कितना अच्छा लाकडाउन

कितना अच्छा लाकडाउन बंद-बंद और सब कुछ बंद चौक चौबारे की चुगली बंद क्रिकेटर की गुगली बंद शराब बीड़ी सिगरेट बंद मेहमानी का गेट बं... Read more

अपना देश बहुत है सुन्दर

दूर देश से मामा आए मेरे प्यारे मामा आए । पहले जब मामा आते थे साथ खिलौने ले आते थे कितना हंसते और हंसाते दूर देश की बात बताते अ... Read more

असली वज़ह

अदिति ने अपने पति विमर्ष से कुछ परेशान होते हुए कहा -" देखिए आजकल कोरोना की बड़ी खबरें आ रही हैं , इसलिए मैंने कुछ सोचा है । यदि बुर... Read more

मेरे अज़ीज़

अभी तो तेरी अलामत ए वफ़ा महफूज़ है मेरे पास , देखना है अज़ीज़ की मुसाफ़ात का हकदार हूं कब तलक । Read more

मान भी जाओ यार

अब तो मान भी जाओ यार थम गई दुनिया की रफ्तार तुम क्यों होते हो बेज़ार अब तो घर में चैन से बैठो संकट में भी यूं न ऐंठो बाहर कोरो... Read more

दर्द

ये चुप की इन्तेहा है कि दिल कहीं और है और दर्द कहीं होता है । Read more

राष्ट्र-धर्म सबसे ऊपर है

आज सारी दुनिया जब अप्रत्याशित और विषम परिस्थितियों से जूझ रही है । देश ही नहीं अपितु समूचा विश्व जब कोरोना के कहर से उबरने में लगा ... Read more

नर्स डाॅक्टर सेवकजन , इन सबका आभार

तब्लीगी मरकज हुआ , कैसा पतित जमात । किया कलंकित राष्ट्र को , और पृष्ठ आघात ।। कोरोना का कोप है , बंद हुए बाजार । सड़क दुकाने... Read more

मन

फिर सपनों की रखवाली में निरत हुआ मन । तुम बिन सूनी फुलवारी से विरत हुआ मन । Read more

खुशियों से नाता जोड़ो

ग़म की उम्र कितनी होती है खुशी कहां ज्यादा सोती है थोड़ा-थोड़ा गम अब छोड़ो और खुशियों से नाता जोड़ो चाहे दुःख की घड़ी रही हो चा... Read more

ग़ज़ल

चलो फिर हालात ए मुल्क बदलते हैं फिर इक नये सवालात पर उलझते हैं कभी कम होती नहीं क्यों दुश्वारियां चलो इन दुश्वारियों को ही बदलते ... Read more

चिड़िया रानी

ओ चिड़िया रानी ! मत आना तुम अब घर आंगन बहुत विषैली हवा हो गई गली - नगर सन्नाटा है रह जाना अब उपवन कानन यहां विषैला कांटा है प... Read more

क्वारंटाइन मनाओ

पूर्व काल में रोम में हुए महान एक संत प्रेम से वैलेंटाइन कहलाए दुनिया में प्रेम का संदेशा लाए बोले बनो सामाजिक दुनिया में प्र... Read more

सुख सुन्दर संसार करो

हे राम जगत के सूत्रधार जगती पर उपकार करो हे ! दिशा-दिशा में धरा-व्योम में कण-कण में और रोम-रोम में बसते हो परिपालक बनकर अपने ... Read more

विश्वास सदा विजयी होता है

विश्व के अंतहीन जनशून्य परिपथ में मंगल और अमंगल के मध्य तीव्र वेग से संचलित होता नि:शब्द , सारथी रहित एक रथ । सारथी का न होना ... Read more

अकल ठिकाने आ गई बेटाराम

सात दिनों से घर में बंद हैं मिस्टर भोंदूराम घर से बाहर निकलें कैसे बंद हुए सब काम ध्यान से ये सब देख रहा था मिट्ठू तोताराम... Read more