भूगोलवेत्ता, रचनाकार, आध्यात्मिक व्यक्तित्व और प्रेरक वक्ता
लेख और रचनाओं का प्रकाशन वर्ष 1997 से अनवरत
रचना-कर्म का संसार:- काव्य, कहानी, एकांकी, निबंध, उपन्यास, यात्रा साहित्य इत्यादि।
अभिरुचि के क्षेत्र- साहित्य सृजन, भूगोल, पारिस्थितिकी, आपदा प्रबंधन, आध्यात्म।
शोध कार्य-
• रामकथा का ऐतिहासिक स्वरूप
• चैलेंजेज बिफोर डिजास्टर मिटिगेशन
• वेस्टर्न कोस्टल रीजन्स: ए सर्वे
संप्रति: उपसंपादक और साहित्य संपादक (भारत संवाद- दैनिक)
उपसंपादक और साहित्य संपादक (संवाद धारा- साप्ताहिक)
संस्थापक:
उदात्त साहित्य संस्था (दिल्ली)
निकष प्रकाशन (दिल्ली)
निकष साहित्य समानुमेलन (ऑनलाइन काव्य मंच)
विदेश यात्रा – नेपाल, सउदी अरब, इस्राइल

Books:
गीत संग्रह-
१• इक पावस ऋतुओं पर भारी
२• पथ को मोड़ देख निज पिय को
३• पहरे तब मुस्काते हैं
४• लो! आखिर आया मधुमास
५• स्वर लहरी यह नयी-नयी है
सामूहिक काव्य संग्रह-
१• कुण्डलिनी लोक
२• वर्तमान सृजन (प्रथम भाग)
शीघ्र प्रकाश्य–
• ऊर्ध्वलोक का महाविवर ( उपन्यास)
• प्रवर्तन (रामकथा पर आधारित प्रथम उपन्यास)
• नवोन्मेष (रामकथा पर आधारित पांचवां उपन्यास)
• मछली पर रेत और रेत में गुल (गज़ल संग्रह)
• Peacock Dances and Nature Smiles (Collection of English Articles)

Awards:
नैसर्गिक प्रतिभा सम्मान (1999)
नवोदित युवा कवि सम्मान (2003)
श्रेष्ठ निबंधकार का सम्मान (2000, 2005, 2009)
श्रेष्ठ युवा कवि सम्मान (2004)
कुण्डलिनी रत्न सम्मान (2017)
महर्षि दयानंद सरस्वती हिन्दी सम्मान(2017)
कविता लोक आदित्य सम्मान (2019)

Copy link to share

मन की कौन थकान हरे?

मन की कौन थकान हरे? मन की कौन थकान हरे? अपनी ही सुधि नहीं किसी को, नभ में कहाँ उड़ान भरे? मन की कौन थकान हरे?।।१।। नित-प्रति... Read more

"नशा"

आकुल होकर कलम ने मेरे सब छंद विच्छिन्न कर दिए, और उद्गार निकले इस तरह, ""नशा"" नशे पर क्या कहें, है नाश का यह द्वार कहलाता, ... Read more

"कुछ काव्याभिव्यक्ति पर"

काव्य स्वाभाविक लयात्मक अभिव्यक्ति है, इसलिए उसकी स्वयं की अपनी मर्यादा होती है। स्वाभाविक लयात्मक और खुद-बखुद छन्दबद्ध कविताओं में ... Read more

नशे की लत

उसकी इक प्रसन्न दुनिया थी; मुस्काता था बाप, और, मुस्काती थी माँ; पत्नी थी संतुष्ट, प्रेम से; बच्चे भी आह्लादित रहते। नज़र लग ... Read more

नयी सुबह में साहस पायें

पावन तृषा उठी जब मन में, शुभाशीष की ध्वनियाँ आयें। मनोदोष की होम-प्रविधि का, वर्णन करतीं दिव्य ऋचाऐं॥1॥ वीरप्रसू है यह वसुंधरा... Read more

"शक्ति और सत्ता की बात"

"शक्ति और सत्ता की बात" बंधु! लीक सेवाभावी की बिचलित हो करती जो घात। आज सुनो उस छली वृत्ति की शक्ति और सत्ता की बात।।१।। किस ... Read more

सत्यवीर का प्रेमिल सत्यापन

"सत्यवीर का प्रेमिल सत्यापन" 'इक पावस ऋतुओं पर भारी' काव्यकृति युवाकवि श्री अशोक सिंह 'सत्यवीर' के भावोद्गार की अनुपम भेंट है । इ... Read more