Ashok sapra

Joined January 2017

Copy link to share

मिलता नहीं मेरी इन रचनाओं का कोई खरीददार

मिलता नहीं मेरी इन रचनाओं का कोई खरीददार कविताएं पहुंच गई हाशिए पर शिल्प हुआ बेकार कब तक याद रखेंगे हम प्रेमचंद, महादेवी वर्मा क... Read more

जुनून मुझमें देशभक्ति का

जुनूँ मुझमें देश भक्ति का देश से ही दिल लगाया है बन्दगी करता हूँ माता की जों जन्म हिन्द में पाया है तबस्सुम सजाकर लबों पे राष्ट्... Read more

हमारा देश और हम ही काफ़िर कहलाये

हमारा देश और हम ही काफ़िर कहलाये चलो चलकर हम कासगंज को देख आये बहुत हो गई बदमाशी नर्मदिल वालों पर चलो चलकर अपने दो दो हाथ कर आये... Read more

चलो आज थोड़ी तुम भी पियो

चलो आज तुम भी पियो थोड़ी हम भी पीते है साक़ी की नजरों में नजरें डाल पैहम भी पीते है माना बदनाम हो जाऊँगा यारों की महफ़िल में चाय क... Read more

चांद छत से आकर रख गया ख़त

चाँद छत से आकर रख गया ख़त सिरहाने आ गले लग जा सनम ,तू ईद के ही बहाने मेरी मंजिल होकर ,तू मेरा इंतज़ार ना करें मैं वापिस आऊँगा तेर... Read more

नई मुर्गी हलाल है

आज काजियों ने की नई मुर्गी हलाल है माशुका गई ,मुर्गो को तो इसका मलाल है सुना सुना हो गया सारा गुलशन अपना बुझी बुझी जिंदगी अपनी ... Read more

माँ बहुत याद आओगी तुम

माँ बहुत याद आयोगी तुम माँ मेरी तुझसे इस जगत में पहचान माँ तू जिंदगी में तो ,है मेरी मुस्कान मैंने माँ कहना ही सीखा बचपन में... Read more

मम्मी डैडी के चरणों में चारों धाम

सुनों जीवन में याद रखना मेरा ये पैगाम मम्मी डैडी के चरणों में ही है चारों धाम खुशियां पल पल बढ़ती जायेंगी तुम्हारी जब जाओगे कही ... Read more

आओ हिन्द वासियों तुमकों चूड़ियां उपहार दे दूँ

कासगंज में चन्दन गुप्ता की तिरंगा या भगवा यात्रा जो भी थी उसके बाद जो हुए वो एक कलंक है तो मेरी अशोक कुमार सपड़ा की यह कविता हमारे का... Read more

कहतें है हम थानेदार

कुछ लोग माशूक़ ऱखते है हम इज्जतदार मूंछ ऱखते है चाँद की शरारत जैसे अपने अफसाने भी है ,सरकार फिर भी बुझती ज्वालामुखी नहीं दिल को स... Read more

लगा दो आग गीता और कुरआन में

लगा दो आज आग गीता और कुरआन में अगर घर ने माँ बाप पूजे नहीं उस मकान में जहाँ मानवता मार कर मशीन बन गए लोग उस विलासी गढ़ में रहने ... Read more

बाप है तेरा ये देश मेरा हिंदुस्तान

जो हमारे तिरंगे का करते रहते है अपमान उसको मारूंगा गोली चाहें हो लाख इंसान LMG 7.62 mm के निशाने पर आओ फिर देखूँगा दुश्मन कितन... Read more

आओ मिलकर अपनी संस्कृति बचाये

आओ मिलकर अपनी संस्कृति बचाये यही इल्तिजा नन्हे पौधों को समझाये दुआ लेले हम फकीरों की तुम चाचा दुश्मनों को पहचाने मार कर भगाये ... Read more

हॉर्न धीरे से बजा रे पगले देश मेरा सोता है

हॉर्न धीरे से बजा पगले देश मेरा चैन की नींद सोता है मधुर सुहानी नींद को तू क्यों पगले आकर खोता है आंच सी सर्दी में आ जाती है अब ... Read more

मेरी गीत गजलों में मेरी शकन देखिये

मेरे गीत गज़लों में मेरी इतनी तो शान देखिये रोता हूँ भारत माँ के लिये मुझे परेशान देखिये अब नहीं आती कभी सपनों में किसी के माता ... Read more

व्यंगात्मक कविता आइये कद्रदान

आइये कद्रदान लेकर आया सियासत की दुकान झोपड़ियां दूंगा तुमको छीन कर के तुम्हारे मकान तुम्हारे लहू को जलाकर अपना चरागाँ जलाना है त... Read more

गजल वो शहर में आकर के

वो गाँव से शहर आया तो मेरे हालात पूछता रहा झूठों की बस्ती के मरे हुए मेरे जज्बात पूछता रहा वो देखकर आया था ख़्वाब शहर की ऊंचाइयों... Read more

कत्ल का सामान बनकर

कत्ल का सामान बनकर देखो यूँ ना आया करों अपनी खुशबु से मेरी रूह को ना महकाया करों दिल के अरमानों की तबाह हो चुकी बस्तियों पर आँ... Read more

गजल राहें इश्क में आये है

राहें इश्क में आये है दोनों हाथ को जोड़कर हजारों उल्फत की कसम खाने को दौड़कर रिमझिम बारिश है और रंजोगम की घटाएं कागज पर रखी है आँ... Read more

गजल सरहदें क्यों पहचानता नहीं तू

सरहदों को पहचाता नहीं क्यों तु भी परिंदा नादाँ आज जमाने ने खड़ा कर दिया इस बात पे तूफाँ दीवाना है या पागल औढ के मौत का कफ़न उड़े ... Read more

गजल जिंदगी ख़ाक में मेरी

जिंदगी ख़ाक में मेरी ये रकीब मिलाने लगे है सफर आखिरी है दूल्हे सा मुझे सजाने लगे है मायूसियों के जज्बात तरसता दिल ले चला हूँ सज़ा... Read more

गजल आया हूँ शहर में लेके कुछ किस्से नये पुराने

आया हूँ शहर में किस्से लेकर नये पुराने परेशां चेहरों के लबों पर लाऊंगा मुस्काने बख्शा खुदा ने हुनर तो कुछ बेचने आया खरीद लो मेर... Read more

एक गीत शीर्षक वही तू है

मेरा एक गीत उस दोस्त के लिए जो अपने पैसे के घमण्ड में मुझे यह कहकर छोड़ गया था की मुझे तमीज़ नहीं बात करने की मेरी ओकात क्या है आज वो ... Read more

एक गीत शीर्षक वही तू है

मेरा एक गीत उस दोस्त के लिए जो अपने पैसे के घमण्ड में मुझे यह कहकर छोड़ गया था की मुझे तमीज़ नहीं बात करने की मेरी ओकात क्या है आज वो ... Read more

गजल तुमको देखा हमको कितने जमाने हो गए

इस शेर के साथ पेश है मेरी गजल उलझा हुआ अब तक जो,वो सवाल है जिंदगी कभी ख़ुशी तो कभी गम 'की मिसाल है जिंदगी तमन्नाओ के कहार उठा चल... Read more

कविता शीर्षक मेरी ऊँगली पकड़कर बेटा मुझे चलाने वाला

आया कोई मुझको भी तो ,सोती रातों में जगाने वाला मेरे बांगो में वो कोयल सा नन्हा पंछीे गुनगुनाने वाला गम की रातें भी ढल जाती मेरी ... Read more

कविता शीर्षक बेटी तू तो है गंगाजल

बेटी तू तो है गंगाजल का बहता हुआ तेज प्रवाह तू जीवन में तो जिंदगी का आसान होगा निर्वाह तू मेरे सुने जीवन की धड़कन तुझसे उमंगे हजा... Read more

कविता शीर्षक बीज डाले बेटो के पर बेटी तू उग आये

तुझसे है अनोखा रिश्ता मन को ये हम समझाये हमने बीज डाले बेटो के थे पर बेटी तू उग आये कड़वा सोच बोल रहा पर तू नफरत न करना बेटी छोट... Read more