Ashok Kumar

Joined January 2017

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दरिया सी फितरत

मेरी दरिया सी फितरत है, रवानी ले के चलता हूँ I समंदर से फ़क़त अपने, मैं मिलने को मचलता हूँ I I कोई कब रोक पाया है यहाँ पर राह को मेर... Read more

ईश की टीष

रे मनुष्य, मेरे कारखाने का तू था मास्टरपीस, तुझे बना कर मैंने थी ली राहत की साँस की अब तू बनेगा मेरे ही कई कटपीस, दुनिया ... Read more