*माला की तारीफ़ तो सब करते हैं, क्योंकि मोती सबको दिखाई देते हैं*

*मैं! तारीफ़ उस धागे की करता हूं, जिसने सब को जोड़ कर रखा है .*

*आप से मधुर संबंध ही मेरा सबसे बड़ा धन है !*
*उन संबंधो को नमन।*

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हाइकु

1. चुनावी रैली बर्बाद करती हैं धन की थैली 2. आती हैं सदा मुश्किलें जीवन में हार न मानें अशोक कुमार ढोरिया ई मेल neelam 1... Read more

दोहे

बेटी घर का मान है, नहीं किसी पर भार। अगर नहीं हों बेटियाँ, हो कैसा संसार।। अशोक कुमार ढोरिया मुबारिकपुर(झज्जर) हरियाणा सम्पर्... Read more

मृत्युभोज

मृत्युभोज मंगतू ने गरीबी की मार सहते हुए जैसे तैसे मजदूरी करके अपने इकलौते बेटे को पढ़ा लिखाकर कामयाब कर दिया।अच्छी नौकरी मिल गई। ... Read more

मैं नन्हा नन्हा बालक हूँ

नन्हा नन्हा बालक हूँ मैं मरुस्थल की सैर करता हूँ चलता चलता थक जाता हूँ ऊँट को जहाज बनाता हूँ। नन्हा नन्हा बालक हूँ मै... Read more

पश्चाताप का खजाना

खजाना अक्सर धन का होता है लेकिन मुझे नसीब हुआ -पश्चाताप का खजाना।छिपा खजाना भला किसको अच्छा नहीं लगता।मैं अपने घर खर्च में से कुछ पै... Read more

माँ

कलेजे में दुःख-दर्द छिपाकर, फूल-सी खिली रहती थी माँ निवाला दे अपने मुख का मुझे, स्वयं भूखी रहती थी माँ स्वयं चाहे न मिला आशियाना... Read more