मैं काहानी, लघुकथा एवं लेख लिखता हूँ.

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फ़ोकट का तमाशा

आज फिर कामिनी बाहर गली में आकर चिल्ला रही थी 'कोई भी नही बचेगा, सब को सजा मिलेगी. कानून किसी को नही छोड़ेगा.' सभी अपने अपने घरों से ... Read more

जीवन धारा

जब मि . गुप्ता ने कैफे में प्रवेश किया तब मि . खान और मसंद का ठहाका उनके कानों में पड़ा। उन्हें देखकर मि .खान बोले " आओ भाई सुभाष आज ... Read more

मान

विभा के माथे पर सदैव सिंदूरी बिंदी सजी रहती थी. वह बड़े चाव से इसे लगाती थी. उसके लिए यह प्रतीक थी उसके सुखी वैवाहिक जीवन की. उसके ... Read more

हवेली

वृंदा जिस समय हवेली पहुँची वह दिन और रात के मिलन का काल था. उजाले और अंधेरे ने मिलकर हर एक वस्तु को धुंधलके की चादर से ढंक कर रहस्यम... Read more

लकीर

इन गलियों में रमन ने पहली बार कदम रखा था। मेकअप लगाये झरोखों से झांकते चहरे जो हाव भाव से उसे अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रहे थे।... Read more

वेलकम होम

कार तेज़ी से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी। कार की पिछली सीट पर रोहन उदास बैठा था। वह अपने दादा जी के घर जा रहा था। उन दादा जी के घर ... Read more

खुशियों का खजाना

बात तकरीबन बीस वर्ष पुरानी है। यह मोहल्ला लोअर मिडिल क्लास लोगों का था। जिनकी आमदनी छोटी किन्तु ख्वाहिशें बड़ी थीं। मोहल्ले में एक च... Read more

मलाल

हर शाम सिन्हाजी इस समय नदी के किनारे आकर बैठ जाते थे. डूबते हुए सूरज को देखते हुए आत्म मंथन करते थे. अपने बीते हुए जीवन का विश्लेषण ... Read more

गूंगी गुड़िया

रसोई में काम करते हुए गीता सुन रही थी. चंद महीनों पहले ही ब्याह कर आई हुई उसकी देवरानी वीना से भी वही सब कहा जा रहा था जो उससे कहा ग... Read more

वादा

अभी अभी अंजू को ऑपरेशन के लिए ले गए थे. स्थिति तनावपूर्ण थी. डिलीवरी की तारीख़ बीस दिन बाद की थी किंतु अचानक अंजू को तकलीफ़ होने लगी... Read more

हकीकत

गाँव के चौपाल पर एक नाटक खेला जा रहा था. चारपाई पर पूरे ठसक के साथ बैठी ताई अपने पोतों का गुणगान कर रही थीं "मेरे चार पोते हैं. सब... Read more

कागज़ की कश्ती

आज कुछ बच्चों को कागज़ की नाव चलाते देख कर मुझे मेरा बचपन याद आ गया. मेरा गांव का घर और उसका आंगन. आंगन में भागता मैं और मुझे पकड़ने... Read more

स्वयंसिद्धा

एक ही शहर में उमादेवी का अपने बेटे के साथ ना रह कर अकेले रहना लोगों के गले नही उतर रहा था. लेकिन अपने निर्णय से वह पूरी तरह संतुष्ट ... Read more

अहम

प्रतिष्ठित साहित्यकार पुष्करनाथ साहित्य जगत का सर्वोच्च पुरस्कार गृहण करने जा रहे थे. यह पुरस्कार उनके उपन्यास 'स्वयंसिद्धा' के लिए ... Read more

रिटायर्ड

रिटायरर्ड भवानी बाबू अवकाशग्रहण के करीब तीन माह  बाद अपने पुराने दफ्तर आए थे. सोंचा चलो उन लोगों से मिल लें जिनके साथ पहले काम कि... Read more

कैसे कैसे रंग

दरवाज़ा खोला तो सामने जो शख्स खड़ा था कुछ पहचाना सा लगा। याद करने का प्रयास कर ही रहा था की वही बोल पड़ा " क्या हुआ पहचाना नहीं मैं विश... Read more

सौर

दिनेश को आज घर लौटने में देर हो गयी थी। जूते उतार कर वह पलंग पर लेट गया। वह बहुत थका हुआ था। आज का दिन अच्छा नहीं बीता था । काम भी औ... Read more

ए.टी.एम.

महेश जैसे ही घर में घुसा माँ ने सवाल दागा "मेरी चार धाम यात्रा का कोई इंतजाम हुआ कि नहीं." महेश ने थके हुए स्वर में कहा "अभी नहीं म... Read more

बस नं. 13

बस के रुकते ही सभी जो रोज़ इस स्टॉप से चढ़ते थे चढ़ गए. किंतु वह आज भी नहीं आई. सोम सोंच में पड़ गया. आखिर क्या बात है. इधर करीब पंद... Read more

हरफनमौला

विपिन की एक आदत उसके जानने वालों को अच्छी नहीं लगती थी. वह यह जतलाने की कोशिश करता था कि दुनिया का हर काम वह आसानी से कर सकता है. जब... Read more

खोया पाया

सरिता स्टोर रूम की सफाई करवा रही थी. जो सामान काम का नहीं था उसे अलग रखवा रही थी. बहुत सा बेकार सामान बाहर निकाला जा चुका था. तभी मे... Read more

बचत

बबलू ने ददाजी के कमरे में चारों तरफ नज़र दौड़ाई. सब कुछ व्यवस्थित हो गया था. दादाजी के लिखने पढ़ने की मेज़ पर सब सामान करीने से लगा ... Read more

कट्टी बट्टी

शाम हो गई थी बंटू बाहर खेलने जाने की बजाया एक किताब पढ़ रहा था. उसकी मम्मी जब कमरे में आईं तो उन्होंने आश्चर्य से पूंछा "क्या बात है... Read more