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ग़ज़लें

बड़ी अजीब सी बातें जनाब करते हैं नदी की धार में हैं पानियों से डरते हैं हमें है खौफ़ बिजलियाँ जला न दें घर को वगरना हम तो सावनी र... Read more

रोक लें महाभारत

जानती हूँ हाँ-हाँ! जानती हूँ किसने दिया था शाप सगर के पुत्रों को जानना चाहते हो तो जान लो उन्हें शापित किया था सत्ता के अहंकार... Read more

भविष्य प्रश्न

कैसा होता है भविष्य? हर पल अदृश्य हर कल जी हाँ! आने वाला हर कल! होता है मात्र छल छिपा रहता है पर्दे के पीछे जिसे पकड़ने के लिए ... Read more

ग़ज़ल

रखो अपने लिए ऐ रहबरो यह फ़लसफ़े अपने सफ़र में मुझको काम आएंगे मेरे हौसले अपने मैं किन अपनों की बातें कर रही हूँ आप हैरां हूँ हवस म... Read more

बेचारा दिन

दीपावली का दिन त्योहार तो है पर मेरे लिए हर दिन की तरह आया है यह दिन भी कोई खास बात नहीं सुबह सवेरे ही शुरू हो गई थी मित्रो... Read more

नदिया हूँ

मैं गीतों की प्रसव वेदना झेल चुकी हूँ नदिया हूँ पर्वत से चल सागर से पहले कहाँ रुकी हूँ राह रोकते पथ के शैल और गिरि कानन भावों... Read more