कुमार अरविन्द

शिवहर (बिहार)

Joined August 2018

Bsc (chemistry),CCC, Social worker

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एक वक्त था

तेरी गली से होकर जब भी मैं गुजरता था मन ही मन प्रिये मै इतना सवरता था जैसे भौरे को अपने पास बुलाने को मेरे बाग के ये महके गुल ... Read more

मोहब्बत

मोहब्बत को यू ही बदनाम करते है लोग जिसने कभी मोहब्बत किया ही नहीं मोहब्बत किसे कहते है वो नादान क्या जाने Read more

मत पूछो कितनी मोहब्बत है

जब भी तुम मिलने आती थी कितनी जल्दी वो मुलाकात गुजर जाती थी प्यास बुझती नहीं बरसात गुजर जाती थी तेरी यादों से दिल दुखता था नी... Read more

अनोखा प्रेम

हमारे मोहल्ले में गीता आंटी रहती है हम अक्सर उनके यहाँ जाया आया करते है l कल सुबह की ही बात है हम जैसे ही आंटी के दरवाजा के पास पहुं... Read more