Aruna Dogra Sharma

MOHALI

Joined November 2018

Poetess
author of two poetry books “Lehrein” And “Dhaage “

Prestigious Awards on literature by many organizations

Theatre and singing enthusiasts

Author and editor of Geography books

Written many articles and poems for newspapers and magazines (social causes) in English and Hindi

Geography Teacher

Wellness consultant

Reiki grand master

Acupressure therapist

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अनलॉक - 3.0"

"अनलॉक - 3.0" स्वयं से प्यार तु कर, अपनों की परवा तू कर, आगमन हुआ अनलॉक 3:0 का, जाग, वक्त का मान तू कर, दिशा निर्देशों ... Read more

अनलाॅक- 2

अनलाॅक- 2 देखो बेसमझी मत करना, सुनो अभी पड़ेगा डरना। सूखी नदी में कैसे तरना, पानी हो तो बहता झरना। जीवन अमूल्य, बचा अगर ना,... Read more

सूर्य ग्रहण

🌑💫 सूर्य ग्रहण का है अद्भुत चूड़ामणि रूप, अंधकार ग्रस्त है आज जो देता नित धूप, देखो, सीखो, जानो ना आंको किसी को कम, प्रकाश... Read more

New Normal:नया सामान्य

नया सामान्य सुबह-सवेरे माँ ने भेजा आज एक उपहार, देख कर चकित हो गई, अनोखा माँ का प्यार, खोला तो अंदर मासक, सैनेटाईज़र अौर है... Read more

लॉक डाउन से अन-लॉक 1.0

अभी मत सोचो कोई बात नहीं, अन-लॉक 1.0 में भयभीत होने वाली कोई बात नहीं। यह तो आपदा काल है, इतनी आसानी से होते सामान्य हालात न... Read more

श्रमिक

मज़बूर चल -चल के हारी है, ना खत्म हो रहा सफर, कौन जाने क्यों ज़ारी है। रोज़ी -रोटी छिन गई, यह कैसी महामारी है, भूखे पेट से... Read more

जान है तो जहान है

क्रूरता है उसकी पहचान, चौफेरे मचाया कोहराम, परदेस से आया, भयंकर तूफान। ना पैर , ना हाथ, ना है कान, चलता फिर भी लंबी तान। ... Read more

चित्त

चित्त गर लोभी हठी ,पग पग होती हार । समय काल सम ना रहे , करो ना अहंकार । करो ना अहंकार, सन्मन विमल सदा रहे। जैसे जल की धा... Read more

लॉक डाउन

यह कैसी वक्त की चाल है , भयंकर आपदा काल है। मायावी निशाचर जाल है , लॉक डाउन उत्तम भाल है। प्रभु सिमरन परम ढाल है , ... Read more

मुक्तक

दूर से आकर मेघों ने , आसमान को घेरा है, चौफेरे फैल रहा, जैसे भयंकर अंधेरा है। सूर्य, पुण्य भोर का वादा देकर, हो गया अस्त , ... Read more

भारत माँ के लाल

भारत माँ के लाल🇮🇳 धन्य भारत माँ के लाल , सुलझा रहे हर मुश्किल सवाल।🔬 डॉक्टर, नर्स और मेडिकल स्टाफ, लड़ रहे हर पल कोरोना... Read more

मुक्तक

मुक्तक "मनुज" प्रकृति का प्रकोप है यह सारा, विषाणु करें भयभीत फिरे मारा -मारा , पृथ्वी के नियमों का किया है बहिष्कार, सो... Read more

"नारी" -- तुम खुद में एक परिभाषा हो

"नारी" -- तुम खुद में एक परिभाषा हो इससे ज्यादा क्या कहूं, तुम खुद में एक परिभाषा हो, संस्कारों में मर्यादा हो। तुम प्र... Read more

कुण्डलियाँ

कुण्डलियाँ शंका मन में मत रखो ,शुद्ध रखो आहार । हाथों को रख स्वच्छ नित, होंगे क्यों बीमार । होंगे क्यों बीमार ,नही बन आमिष भो... Read more

मानवता

आज फिर मानवता को जिंदा जला दिया , नफरतों की आग ने सब कुछ जला दिया । अपने ही आशियाने टुकड़ों में यूं ना बाँटो, मेरे ही अंश सब... Read more

सवच्छता

स्वच्छता पृथ्वी की सबसे बड़ी आवश्यकता, हो कण- कण में स्वच्छता। चलता, तैरता, उड़ता जहर , मानव हो जागरूक ..नहीं तो बरसेगा ... Read more

मानव अधिकार

हाँ मेरा भी है मानव अधिकार, आंचल मेरा ना करो तार तार , नारी अस्तित्व करो स्वीकार , यूं ना दागो ना करो तिरस्कार। अरुणा ड... Read more

छंद

छंद जिसे मिलता प्रभु तेरा साथ , भाग्य न छोड़े कभी हाथ । जीवन नैया पार लग जाए , दुख दर्द कभी ना उसे सताए। पूरी होगी ते... Read more

नशा मुक्त जीवन

नशा मुक्त रिश्ते नाते तोड़कर, अपनों को सब छोड़ कर, मौत से नाता जोड़कर, तंग गलियों के मोड़ पर, पीड़ा सहन नहीं कर पाएगा तू ... Read more

योग

"अंतरराष्ट्रीय योग दिवस " मुक्तक भौतिक सुखों को त्याग कर , सही दिशा में प्रयास कर, रहना अगर निरोग तुझे , मान... Read more

छुट्टियां

🌞छुट्टियां⭐ देखो !देखो! समय चक्र चलता है कैसी चाल, हम भी कभी नन्हे बच्चे थे ,सम बाल गोपाल । करते थे अपनी मनमानी, सबसे प्य... Read more

बड़े अच्छे

बड़े अच्छे थे जो वादे सच्चे थे , नफे नुकसान का न था किसी को ज्ञान, नेकी करना और रब से डरना, जब थी सब जन की पहचान।।💥🌱🕉 अरुणा ... Read more

बढ़ रही गर्मी, कट रहे पेड़

विषय: " बढ़ रही गर्मी, कट रहे पेड़ 💥🌴🌳💥 विद्या: स्वतंत्र रचना मैं रीढ़ सा जुडा इस धरा से,। मैं मरुं नित असहनीय पीडा से, ... Read more

साइकिल

🚲🚲साइकिल🚴🚴‍♀ जागो-जागो हुआ सवेरा ,सूरज चमके बनके नूर, नेता, अफसर, डाक्टर या हो मजदूर, मैं साइकिल देता साथ सबका भरपूर। बेटी... Read more

मैं

मैं मैं सहमी थी खंडित नहीं हुई चलती रही। पग वंदन हृदय पटल स... Read more

आँखे

👁 आँखे 👁 वो आँखें कभी हँसा करती थी, वो आँखें कभी शरारत करती थी, वो स्वच्छ नीर सी चमका करती थी, वो रब्ब को सजदा करती थी, व... Read more

श्रम

श्रम कर बस श्रम कर, असफलताओं का गम ना कर। दूर नहीं डगर मंजिल की, सही दिशा में परिश्रम कर। मन में रख ना भ्रम, वक्त पर तु ... Read more

दिल के काले

. *दिल के काले* मलिन मन श्वेत तन ढोंगी, जो जन दिल के काले हैं। शोषक अत्याचारी है ये, धन बल में मतवाले हैं। पहन के चोल... Read more

माँ के नवरात्रे

"माता के नवरात्रे" तरस गए रे मेरे नेैन, माँ तुम कब आओगी। अद्वितीय नजारे प्रकृति पुकारे, राह ताके निष्ठा से सारे, नवल वर... Read more

मतदान

मतदाता का अधिकार, नहीं जाना चाहिए बेकार। सूझ -बूझ और जागरूकता, उपयुक्त चुनाव नैतिकता। ऐसा हो मतदान, भारत वर्ष का कल्याण, ... Read more

जय जवान

क्या यूं ही होता रहेगा मिट्टी का रंग लाल व्यर्थ यूंही बहता रहेगा शहीदों का रक्त हर बार सरहदों के रक्षक जवान, रखते मां की आन और ... Read more

दोस्ती

आइने से कहा, हमसे दोस्ती करलो, अकस हमारा देख लेकिन वो धुंधला गया। पहचाना हुआ सा चेहरा लगता है कहा उसने, मगर दोस्ती करने से हिचक... Read more

नया साल

" नया साल" वही आकाश, वही सूरज वही चंदा , वही तारे होंगे नये साल में कहां कोई अलग नज़ारे होंगे। बीतेंगी रातें वैसे ही, टू... Read more

पैसा

नहीं सोना "पैसों के ढेर" पर, बस यूँही करते रहना है कर्म मुझको, जीने की ख्वाहिश तो रखते हैं जनाब... Read more

माँ

कितने मोहक थे वो दिन जब मैं तुम्हारी गोद में थी न दुख की चिंता, न सुख का आभास नन्ही बाहों में सिमटा था पूरा आकाश चौफेरे फैला था म... Read more