Arti vipin gupta

Delhi .

Joined January 2019

center head ,INIFD surat .(International intitute of fashion design) presently in surat .
textile and fashion graduate from Lady Irwin college Delhi .post graduate in textile design .
worked as chief designer at Vichitra designer sarees Delhi .
love to write ,
won many writing competetions .
interested in writing Hindi and english poetry ,passages ,and satires .
looking forward to publish a book of self written poems .

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ज़ेब

बाबूजी जिसमें गहराई देखते, माँ को लगती हमेशा लंबी कम, भाई के हाथ की होड़ में , बहन का गुमान है बढाती । वह चीज ही ऐसी जिसपर , दु... Read more

मैं हूँ न

तुम हो एक पूर्ण मानुषी, स्वयं सिद्ध ,अधिकारिणी हो। अकिंचन रहती ,मुस्कान लिए, कभी हंसती कभी हंसाती हो, कुसमित भाव व प्रेम लिए। त... Read more

चलो आज कुछ अच्छा करते हैं।

प्रपंच से दूर,सरल बनूँ खुशी हो भरपूर कुछ अच्छा करूँ गुरूदेव की मंत्रमाला, प्रभु से बात , छुट्टी का आनंद परिवार का साथ। धर के ... Read more

कब से ढूंढ रही

आधा धंटा हो गया, ढूँढते देखते न मिला, गैस के नीचे,इधर उधर , डब्बे सब हटा हटा , देखा जहाँ न सोच सकते मंदिर में,टेबल पर दादी क... Read more

छोड़ो कल की बातें ,

कल जो तिरंगा था,आज तीन रंग बन गए। जोश के गीत गर्व से गाए ,वो आम हो गाए।। मंच पर बैठे कल ,अतिथि वे अनजान हो गए। बिक रहे थे झंडे ... Read more

नया नौ दिन पुराना सौ दिन

चार दिन विदेश धूमने के बाद स्वदेश लौटने पर माँ के हाथ की करारी रोटी और दाल, नए नए रंग होने के बावजूद दुलहन का लाल जोड़ा ,करवा चौथ प... Read more

अमृत कुंभ

अमृत कुंभ के संगम में, बस एक बूंद ही मिल जाए, कृष्णमय हो चंचल मन स्थिर आज वह एक पल मिल जाए दूर कहीं हो तुम ही तुम जहाँ, वृंदावन... Read more