अरशद रसूल

Badaun (UP)

Joined February 2019

फोन : 9411469055/
– जन्म स्थान : बादुल्लागंज, ज़िला बदायूं (उत्तर प्रदेश)।
– शिक्षा: एमए, बी एड, एमबीए, ग्रामीण विकास में पीजी डिप्लोमा, मुअल्लिम उर्दू, डिप्लोमा इन जर्नलिज़्म।
– लेखन: ग़ज़ल/गीतिका, मुक्त काव्य, छंद, गद्य, लघु कथा, समसामयिक लेख आदि।
– पुस्तक: 2 संकलित।
– प्रकाशकाधीन पुस्तकें: आजकल (लेख), कसौटी (लघुकथा संग्रह) फुलवारी (बाल कविता), गुलदान (काव्य)।
– राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं, साझा काव्य संकलनों में अनेक रचनाएं प्रकाशित, रेडियो पर प्रसारण।
– पुरस्कार/सम्मान: उत्कृष्ट ज़िला युवा पुरस्कार, युवा लेखक सम्मान, पर्यावरण मित्र सम्मान, समाज शिरोमणि सम्मान आदि।
– अध्यक्ष: संकल्प युवा विकास संस्थान, उ. प्र./अनेक सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं में विभिन्न पदों का उत्तरदायित्व।
– संपर्क:
फोन 9411469055/
email: arsh.bdn@gmail.com

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देवता हो गया

देखते देखते क्या से' क्या हो गया एक पत्थर से' वो देवता हो गया रोज़ी' रोटी जुटाने की' मजबूरियां बाप से आज बेटा जुदा हो गया छो... Read more

पीठ पर वार करते नहीं

प्यार में ही लुटे हैैं कई बार हम अब करेंगे न आंखें कभी चार हम नस्ल दर नस्ल आईं हैं खुद्दारियॉं पीठ पर वार करते नहीं यार हम ... Read more

यह चमन है हमारा

बाप ने आज धेला कमाया नहीं यूं खिलौना उसे कोइ भाया नहीं यह अलग बात है कुछ कमाया नहीं नाम लेकिन बड़ों का डुबाया नहीं जामे उलफत... Read more

सताने लगा आदमी

बेकसों को सताने लगा आदमी भूल बैठा है खौफ-ए खुदा आदमी ढूंढने हम चले पारसा आदमी था नहीं कोइ हमसे बुरा आदमी फरिश्तों से ... Read more

देश का दुर्भाग्य

इसे हमारे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जिसकी राष्ट्रभाषा, मातृभाषा, राजभाषा, गरीबों के कामकाज की भाषा... सब कुछ हिंदी है। फिर भी... Read more

बेवफा ज़िंदगी

हो गई है बता क्यों खफा ज़िंदगी क्या खता हो गई कुछ बता ज़िंदगी चाहते हैं सभी खुशनुमा ज़िन्दगी दे रही है मगर क्यों सजा ज़िन्दगी... Read more

हिन्दी भारत का अभिमान

भारत का अभिमान है हिन्दी हम सबकी पहचान है हिन्दी शिखर पर पहुंचे अपनी भाषा हम सबकी हो यही अभिलाषा सच में कितनी महान है... Read more

सांप मुंह छुपाने लगे

सांप भी अब यहां मुंह छुपाने लगे आदमी आदमी को सताने लगे दुश्मनी पर तुले आज भाई यहां आप कैसा यह भारत बनाने लगे हम कभी आपसे रूठ... Read more

सियासत की सियासत

आकाश को छूने का जो जज़्बा नहीं होता इंसान कभी चाँद पे पहुँचा नहीं होता यह दौरे सियासत की सियासत है वगरना “सूरज के इलाक़े में अंध... Read more

इंसान बनाएंगे

मिलकर फिर लहू बहाएंगे हम भारत नया बनाएंगे जाति धर्म की बात जो करते उनको इंसान बनाएंगे खर्चों से कुछ नित्य बचाकर रूखी सूखी ... Read more

इंसाफ दुनिया का

जहां दूर तक कोई साहिल नहीं था मैं दरिया-ए उल्फत में डूबा वहीं था गुलों के नगर में जो गोशा नशीं था बड़ा खूबसूरत वह बेहद हसीं था ... Read more

मां का किरदार

मुहब्बत में ऐसा कोई वफादार नहीं होता दुनिया में मां जैसा कोई किरदार नहीं होता रब ने मां के कदमों को यूं ही नहीं बख्शी जन्नत... Read more

मुकरियां

उसने अंग अंग महकाया उससे ही खिल जाती काया सफाई के रखे लाखों गुन ऐ सखि साजन, नहिं सखि साबुन बातों से सदा करता वार हार कर भी नह... Read more

मुकरियां

समय का पालन यह सिखाए रोज सवेरे मुझे जगाए हरदम उसकी जरूरत पड़ी ऐ सखि साजन, नहीं सखि घड़ी बाहर उजला भीतर रीठा लगता है वह कितना ... Read more

बंजारों का ठिकाना

बे जरूरत न तुम सफर में रहो 'वक्त का तकाजा है घर में रहो' मजबूरी है इस तरह कैद रहना अब तो मां-बाप की नजर में रहो कमाना है नाम... Read more

मुकरियां

मुकरियां ===== यौवन की शोभा बढ़ जाती हर नारी इस पर इतराती करती उससे असीमित प्यार ऐ सखि साजन, नहीं सखि हार देख देख उसको जी... Read more

दूर ही रहना...

प्यारे देशवासियों, आप सभी जानते हैं इन दिनों हमारा देश कोरोना वायरस जैसी महामारी से जूझ रहा है। यह एक ऐसी भयानक बीमारी है जो एक इं... Read more

रखिए धीरज

खाली समय यूं बिता लो तुम बढ़िया पेंटिंग बना लो तुम खेलो कैरम, खेलो लूडो घर में नहीं किसी से रूठो बंद है बाहर का चटकारा मम्म... Read more

होश नहीं अपने खोना

जग में मचा हुआ है रोना धोना मिलकर मार भगाओ ये कोरोना छोटा बच्चा है या कोई बड़ा है हर शख्स कैद घर में ही पड़ा है छाया यही एक खौफ ... Read more

झुमका

बरेली ही क्या दुनिया भर के लोगों को यह सवाल परेशान करता रहा है कि आखिर, झुमका गिरा तो गिरा कहां? कई मौकों पर लोगों का बरेली आना-जाना... Read more

भागती परछाइयां

दूर भागती हैं अब तो परछाइयां मेरी कौन साथ देता न होतीं तन्हाइयां मेरी बचपन में लगता है कोई कैसे पचपन का तलाश में हैं शहर की तमा... Read more

दिल मिलें इस बार

छोड़िए सारी तकरार होली में ये सब बातें हैं बेकार होली में गले तो अब तक बहुत मिलाए हमने दिल भी मिलें काश इस बार होली में... Read more

बदगुमानी से पहले

यहां तो सबको अपने हिस्से याद रहते हैं यह भी तो बताओ फर्ज कितने याद रहते हैं दिलों में बद गुमानी आने से पहले हमको अपने सभी रिश्त... Read more

वादों की पगडंडियां

मुजरिम से खड़े हैं खाद की दुकान पर पुलिस का सख्त पहरा है किसान पर किसानों की मौत का हिसाब कौन रखे जूं तक नहीं रेंगी संसद के कान... Read more

कानून की धज्जियां

लगाकर बड़े नाम की तख्तियां उसने कानून की उड़ा दी धज्जियां उसने सर्कस है या ये सवाल पेट का रबड़ बना डाली हड्डियां उसने हमें ... Read more

ढोंगी बाबा

गर्मियों की छुट्टियां हो चुकी थीं। शायद इस वजह से ट्रेन में कुछ ज्यादा ही भीड़-भाड़ थी। स्लीपर क्लास की बोगियां भी जनरल से ज्यादा भर... Read more

मज़ार की चादर

बात फरवरी आखिर की है। मौसम गुलाबी था। सुबह-शाम की सर्दी तो थी। मन्नत पूरी होने पर दिल्ली से एक परिवार मजार पर चादर चढ़ाने पहुंचा था।... Read more

मतलबी कौन?

हालांकि डॉक्टर जूलियट बहुत अरबपति आदमी था। समाजसेवा का भी उसको बेहद शौक था। दूसरों के काम आना और उनकी मदद करना जूलियट के रोजमर्रा के... Read more

वह अल्हड़ नहीं

वह अल्हड़ नहीं है, अब मासूम नहीं है। किसी भी शोहरत से, महरूम नहीं है। उसकी जुदा कहानी है अब बच्ची नहीं, सयानी है उस पर चढ़ च... Read more

गुमनाम सा देशभक्त

मामूली सी बात पर दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ चुके थे। तनातनी हद से कुछ ज्यादा ही बढ़ती जा रही थी। दोनों ही पक्ष खुद को सच्चा पक... Read more

यादों के उजाले

डॉ. बशीर बद्र उर्दू जगत का जाना-माना नाम है। इनका जन्म 15 फरवरी 1936 को हुआ था। इन्हें आसान उर्दू जबान का बेहतरीन शायर माना जाता है।... Read more

वादा झूटा हो जाए...

भुलाना तो बहुत चाहा पुरानी यादों को, उसके वादों को, हम समझ ही न सके, उसके इरादों को। शामिल किया था उसने, हमेशा मुझे वफाओं मे... Read more

सच गूंगा नहीं

हवस नहीं है मुझे दौलत कमाने की इक जरूरत है ये घर को चलाने की मैं जीता, तो उसने भी मुबारक कहा लगा था कोशिश में जो मुझे हराने की ... Read more

जीत गया इंसान

कहती है जनता यही, सबका यह सम्मान। हारी फिरका परस्ती, जीत गया इंसान।। फेल हुए चाणक्य जी, जमा घड़े में पाप। बयार चली विकास क... Read more

दुश्मनों से गिला नहीं

लोग बेमौत मारे जा रहे हैं, यहां आंकड़े सुधारे जा रहे हैं बुलंद करते नारे जा रहे हैं वो सब गम के मारे जा रहे हैं तहज़ीब यह... Read more

बसंत की छटा

चहुदिश छाई है खुशहाली बसंत की हर छटा निराली सफल हों सबके सारे काज स्वागत करो आया ऋतुराज फिर हुई सुखद सुनहरी भोर खेत मे... Read more

बसंत आया है

आया है, बसंत आया है मौसम ने रंग जमाया है फिर हुई सुखद सुनहरी भोर खेत में नाच रहे हैं मोर सफल हो सब के सारे काज स्वागत करो आया... Read more

अपना देश

अपना देश जान से प्यारा अमर रहे गणतंत्र हमारा अपने वीरों की कुर्बानी भूलें कैसे अमर कहानी हजारों बार नमन हमारा अपना देश जान ... Read more

प्रिय बिन...

फिरता- रहता मारा- मारा प्रिय बिन सूना ये जग सारा पल को जिया सदी में हमने प्रिय बिन सांस लगी थी थमने प्रिय बिन कैसे समय गुज़ार... Read more

रिश्तों का रंग

कहकहों में बदली है सिसकियां हमनें तोड़ डाली क़फ़स की तीलियां हमनें सगे रिश्तो का भी अब रंग बदला है रोकी नहीं नफरत की आंधिय... Read more

दिल का दर्द

अब आए बहलाने कोई दिल की लगी बुझाने कोई जख्मों पर तो मरहम रक्खा दिल का दर्द न जाने कोई बना लिया है दिल को पत्थर आता नह... Read more

बिल्ली का डर

बिल्ली आई घर के अंदर चूहे भागे पूंछ दबाकर कई दिनों से वह भूखी थी चूहों के ऊपर लपकी थी चूहों की हिम्मत हुई धड़ाम मच गया कुनब... Read more

आज़ादी की चाह

प्रभु ऐसा दो हमें वरदान नापें हम तेरा आसमान नहीं है धन दौलत की चाह दिखाना आज़ादी की राह ऐ काश, होते पंख हमारे तोड़ ला... Read more

शांति दूत

कबूतर इस पक्षी का नाम देता है अम्न का पैग़ाम नभ में यह उड़ता जाता है बच्चों को खूब लुभाता है दूर गगन में उड़ जाता था खत ... Read more

आंखों का एल्बम

कितनी ही बार लोगों ने हमें मिलते हुए पाया है हालांकि हमारा मिलन पाक-साफ था फिर भी ज़माने को रिश्ते पर ऐतराज़ था कितनी... Read more

बंदर

छत पर आया मोटा बंदर पक्षी खिसके पूंछ दबाकर पहले काटा सब कपड़ों को तोड़ा चिड़िया के अंडों को ऊधम कुछ ऐसे भी काटा फै... Read more

भुखमरी का ग्राफ़

मैं बेरोजगार नहीं हूं कोई लाचार नहीं हूं तन तोड़ मेहनत से हिम्मत के दम पर अपना पेट भरता हूं मेरा रोजगार सरकारी रिकॉर्ड में ... Read more

दुश्मन बना लिया

इक शख्स को तो पा लिया मैंने जग को दुश्मन बना लिया मैंने उसको सर पर चढ़ा लिया मैंने फिर नतीजा भी पा लिया मैनें उसन... Read more

ज़र्फ़

मुझे कांधों पे उठाना चाहता है ज़र्फ़ मेरा आजमाना चाहता है बितानी थी मुझे ज़िंदगी अपनी मगर वह रात बिताना चाहता है जुदाई चाहता... Read more

बेगरज जिंदगी

दौलत बेहिसाब कमाना चाहता है ज़िंदगी बेगरज बनाना चाहता है हिमाकत की भी कोई हद होती है वह दस्तार तक आना चाहता है रिश्तों की डो... Read more