A.R.Sahil

New Delhi

Joined November 2018

तुम्हारे इश्क़ में बदनाम, हम हुये इतने…!
हमारा नाम यहाँ, रोज ही खबर में है…!!

Copy link to share

ग़ज़ल :- मेरी औकात

मेरी औकात है क्या, मुझको बताता है कोई...! आईना ले के मेरे सामने आता है कोई...!! ख़ुदकुशी जुर्म है सो, जब्त गम पे करता है कोई...!... Read more

 "फर्क पड़ता है...?"

"क्या फर्क पड़ता है...?" इश्क की बाजी मैंने हारी या जीती, "क्या फर्क पड़ता है"...? क्या खोया मैंने क्या पाया इश्क़ में, "क्या फर्क ... Read more

गजल:- दर्दे दिल जो उन्हें हम सुनाने लगे

दर्दे दिल जो उन्हें हम सुनाने लगे...! उनको हर बात में सौ फसाने लगे...! ऐसे जुगनू जिन्हें था सितारा किया..! फ़र्ज़ का पाठ हमको पढ़... Read more

गजल: न कोई गजल न कोई मिश्रा

तमाम शहर की अक्सर, रहे नजर में है…! वो एक शख्स जो मेरे लहू, जिगर में है…!! खयालो ख्वाब की मंजिल तलाश करता फिरे…! हरेक शख्स यहाँ... Read more

गज़ल:- नई है सोच नया इन्कलाब का सूरज

नई है सोच नया इन्क़लाब का सूरज ! निकल रहा है नई आबो-ताब का सूरज !! खुदा के खौफ से डरना जो जानते ही नहीं ! डुबो के रहता है वो उन ... Read more

गज़ल:- तुझे आज से बेवफा लिख रहा हूँ

तेरे जुल्म की इन्तेहा लिख रहा हूँ ! तुझे आज से बेवफा लिख रहा हूँ !! हया लिख रहा हूँ, अदा लिख रहा हूँ ! तेरे हुस्न को आइना लिख र... Read more

गजल: जो कर सको तो मेरे नाम एक शाम करो

तमाम उम्र न मांगी कि मेरे नाम करो जो कर सको तो मेरे नाम एक शाम करो !! सनम न समझो मगर हमसे अजनबी जैसे हुजूर जब भी मिलो तो दुआ सल... Read more