Anupinder Singh

Joined January 2017

Copy link to share

ग़ज़ल

बुलाएँ दर पुराने हमारे घर पुराने नए हैं आजतक भी हज़ारों डर पुराने पुराने चाँद तारे नहीं अम्बर पुराने हुई ताज़ा हैं यादें वो ख... Read more