अनुपम सक्सेना

भोपाल ( म.प्र.)

Joined July 2018

देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं के अलावा स्तरीय वेब पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित . बीएचईएल भोपाल में वरि. मानव संसाधन अधिकारी

Books:
कहानी संग्रह – फिर उठेंगी आवाज़ें (समय प्रकाशन) , फांस और अन्य कहानियां (यथार्थ प्रकाशन).
उपन्यास – एक मुट्ठी प्यास ( प्रारम्भ प्रकाशन ), फेंटेसियों के बीच (शारदा प्रकाशन) .
काव्य संग्रह – अपने अपने आकाश ( अंजुमन प्रकाशन ) ,

Awards:
राजभाषा कार्यान्वयन समिति द्वारा राजभाषा गौरव सम्मान
भेल कार्पोरेट द्वारा कहानी संग्रह –फिर उठेंगी आवाजें को 31,000/- रूपये का पुरस्कार .
रंजन कलश शिव सम्मान- 2016
हिंदी सागर सम्मान एवं श्रेष्ठ शब्द शिल्पी सम्मान – विश्व हिंदी रचना मंच

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करवा चौथ

करवा चौथ सिर्फ सामाजिक मान्यता है इससे पति की उम्र नहीं बढ़ती ये जानते हुए भी औरतें पति की लंबी उम्र की दुआ करती हैं यूं ... Read more

झांक कर देख लो

झांक कर देख लो हो सकता है बाहर कोई जरूरतमंद ,या भूखा व्यक्ति या कोई अनाथ बालक भी हो सकता है हो सकता है उम्मीद का जंगल ही खड़ा... Read more

महापुरुष

अपनी पत्नी को देह सुख देने में असमर्थ एक बुद्धिजीवी पति पत्नी को इजाजत देता है कि वह पसंद के पुरुष से संबंध रख सकती है ... Read more

प्रतिक्रियावादी

मुझे प्रतिक्रियावादी करार देकर फांसी पर लटका दिया गया मैं बच सकता था यदि मैं आंखों पर पट्टी बांध लेता और सिर झुकाये बाहर न... Read more

पीछा करती आवाज़ें

जाने कैसी आवाज़ें हैं ! यह किसी का रूदन है कि मां इसी तरह रोती थी यह जो फिज़ा में मर्मस्पर्शी चीखें हैं लगता है बलात्कारियों... Read more

मेरी ख्वाहिश

मैं कभी नहीं चाहूंगा कि सत्य की सूखी टहनियों से लटक तुम अपनी जान दे दो कि नैतिकता का फीका शर्बत पी तुम अपने जीवन को बेस्वाद ... Read more

हर चमकदार शहर के गर्भ में

हर चमकदार सतह के नीचे बहुत से दाग धब्बे छिपे रहते हैं वैसे ही हर चमकदार शहर के गर्भ में होते हैं बहुत से भिखारी जो बसों और र... Read more

कल्पना से अधिक

कल्पना से अधिक मन में आस्था लिये प्रेमपूर्ण हृदय के साथ हमने दीप जलाया एक विश्वास के साथ कि अंधकार दूर होगा पर हमारी कल्... Read more