Rajesh vyas anunay

Boda district Rajgarh (mp)

Joined August 2020

रग रग में मानवता बहती
हरदम मुझसे कहती रहती
दे जाऊं कुछ और जमाने तुजको
काव्य धारा मेरी ऐसी बहती
राजेश व्यास “अनुनय”

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**तिरंगा मेरे देश की शान**

तिरंगा मेरे देश की शान - तिरंगा मेरे देश की शान। छांव में जिसकी जग से आगे सारा हिंदुस्तान।। तिरंगा मेरे______________। (१) जन-जन ... Read more

जल का महत्व -- ""पानी पानी पानी रे""

पानी पानी पानी रे ,जन-जन की जिंदगानी रे । पैसों से ना प्यास बुझेगी, काहे करे नादानी रे । पानी पानी पानी रे -- जन-जन की जिंदगानी र... Read more

**फैशन फैशन वाह री फैशन**

फैशन फैशन वाह री फैशन, दौड़ रही तू कैसी दनादन। ना तुझे संस्कृति सम्मान की परवाह, करती जा रही जो चाहे तेरा मन।। फै... Read more

""श्रद्धा का यह श्राद्ध है "" (सर्वपितृ अमावस्या पर विशेष)

तर्पण अर्पण और समर्पण, श्रद्धा का यह श्राद्ध है। पुरखो से जो मिली धरोहर, रखते हमेशा याद है ।। आप ... Read more

####जीवन --- संदेश####

कौन क्या लाया, साथ क्या ले जाएगा। कुछ दिन में जमाना भूल जाएगा। कुछ तो ऐसा कर जा तू जमाने में, आने वाला युग तुझे किताबों में पाएगा... Read more

मुक्तक --- शिक्षक जीवन !!!

मैं शिक्षक हूं किताबी है, जमाने जिंदगी मेरी। मैं पढ़ता हूं पढ़ाता हूं, इसी में दिल्लगी मेरी। मेरे कथनों या वचनों से अगर कोई संवर... Read more

हिंदी दिवस--- दोहे

(१)सूर तुलसी दे गए, हमें अनेकों ग्रंथ। आधुनिकता की दौड़ में ,चल पड़े कौन से पंथ।। हिंदी से नाता जोड़ो, दिखावा करना छोड़ो। (२) ग... Read more

हिंदी दिवस ::मुक्तक विशेष !!!

(१)हिंदी हे वतन मेरा हिंदुस्तान कहता हूं। रग रग में बसी हिंदी जिव्हा पे राग रखता हूं। तू जननी हे मेरी जननी मै बेटा मात हूं तेरा, ... Read more

हिंदी-- हिंदी - मै -- हिंदी !!!

सूर का वात्सल्य मुझमें , मैं तुलसी की चौपाई। हिंदी हूं मैं हिंदुस्तान की, सुनो सुनो मेरे भाई।। मीरा का दीवानापन ,महादेवी की पीर ... Read more

!!! हिंदी को हम नमन करें!!!

मां कह कर के जिसे पुकारा कंठ में जिसे उतारा है। मातृभाषा यह हिंदी हमारी देश बोले जिसे सारा है।। न... Read more

चल रहे - मुक्तक

मेरा लिखना आप का पढ़ना कर्म दोनों ही कर रहे। चुन चुन कर उनमें से मोती, मस्तिष्क पटल में भर रहे। चल रहे... Read more

मुक्तक -जुनून ए इश्क

जुनून ए इश्क यह मेरा तेरी चौखट पर आया है। जख्म खाए मगर फिर भी तुझे ना भूल पाया है। मैं तेरा हूं मैं तेरा हूं भरोसा कर ले तू मेरा ... Read more

मैं मजदूर हूं जीता फिर भी जरूर हूं !!

महल बनाए चौबारे बनाएं कुटिया मेरी टूट गई । भाग्य विधाता तू ही बता दे किस्मत काहे रूठ गई। मैं मजदूर हूं जीता फिर भी जरूर हूं।। (१)... Read more

**देखा देखा जग का मेला**

देखा देखा जग का मेला लगता कितना है अलबेला। अपने अपने पथ के राही हम सब, दौड़ रहा जीवन का रेला।। कोई गुरु और कोई है चेला यह जग है ब... Read more

""""सरस्वती वंदना"" (द्वितीय)

भाव जगा दे भाग्य बना दे, जय मां वीणा वादिनी । ज्ञान कुंज बन जाए यह मन, जय मां विद्या दायिनी। दया कर दे -... Read more

*लेखन* - एक कला है!!!

**लेखन एक कला है ** चलता जब सिलसिला है । मन की तरंगे जागती। विचारों के पीछे भागती। जब-जब पड़ता जगत इनको । ... Read more

****!!लक्ष्य की तैयारी है****!!

ऐ मुसाफिर ,सफर तेरा अगर ,जारी है। रुक मत जाना ,लक्ष्य की तैयारी है। अब तक तू चला- आई कई बला, तेरे विजय की ,अब बारी है।। लक्ष्य की... Read more

तेरी नजरों में -तू बेकसूर थी

तेरी महफ़िल में हम भी थे तू नशे में चूर थी। हमने रोका टोका तुझको तू चली जा रही दूर थी । तेरी नजरों में-- तू बेकसूर थी ! नशा जब... Read more

प्रेरक -- दोहे !

(१) रूप रंग एक सा वाणी दे पहचान। कोकिल सु मधुर गात है काग की कर्कश तान ।। (२) आए इस संसार में लेकर मानव रूप। कड़वी ब... Read more

!!!!तू मेरा प्यार है प्यारा!!!!

तेरी वफा को मैंने है समझा तूने हरदम दिया है सहारा । तू मेरा प्यार है प्यारा ---तू मेरा प्यार है प्यारा -- २ (१) जब जब घिरता म... Read more

------- धरती है बलिदान की----

गांधी गौतम वीर शिवा की यह धरती प्यारी प्यारी। भगत बोस सुखदेव के हम तो सदा रहेंगे आभारी। धरती यह बलिदान की, मे... Read more

समय चल रहा है !!!

समय चल रहा है जीवन उसमें ढल रहा है। क्यों आगे की चिंता पालू वर्तमान ही संभालू। क्या पता? भविष्य के गर्भ में, क्या पल रहा है ।। ... Read more

""""क्यों रहूं किसी से दूर""""

जीवन क्षण भंगुर क्यों रहूं किसी से दूर । मिलनसार ही जीवन मेरा तवज्जो देता इसे जरूर।। देखता हूं कमियां स्वयं की गुण ओरो के अपनाता... Read more

बाबुल का पैगाम :: बेटी के नाम!!! भाग ०१

!!!!!!!!!!!!!!!+बेटी!!!!!!!!! बड़े अरमानों से पाला है संस्कारों की पहनाई माला है। !!!!!!!!!! बेटी !!!!!!!!!!!! रुखा सुखा मि... Read more

****मां की सेवा****

ओ मां सेवा करूं तेरी पूजा करूं तेरी पूजा करूं ओ तेरी सेवा करूं मां तुझसे ना मैं तो दूर रहूं !!!!!! तूने ही तो मां उधर में पाला ... Read more

समस्या -संघर्ष - समाधान !!!

पाठकों सादर नमस्कार ! आज हम उपरोक्त वर्णित विषय पर चर्चा करते हैं। हम सब मनुष्य हैं समाज में जीवन जीते हैं। ईश्वर ने प्रकृति के नि... Read more

!!!!अपनी-अपनी सबको लगी!!!

अपनी-अपनी सबको लगी । कोई करता दिल्लगी कोई करे यहां ठगी। दुनिया नहीं किसी की सगी । सुख में सब की भीड़ लगी। दुख देख जनता भगी । मह... Read more

"""""पढ़ने दो मुझे पढ़ने दो""""""️️️️

अभी नहीं मेरी उमरिया बाबुल कन्यादान की। नन्ही हूं मैं कमसिन बिटिया पोथी थमा दो ज्ञान की। पढ़ने दो मुझे पढ़ने दो - सपने अपने गढ़... Read more

****गुरु की प्रीत ****

(१)गुरुजनों की सीख ने ऐसा किया कमाल इज्जत मुझको मिल गई हो गया मालामाल ।। कभी भी भूल ना पाऊं गुरु को शीश नवाऊँ। (२) यहां वहां थ... Read more

**शिक्षक जीवन** अतीत- वर्तमान- भविष्य

०५ सितंबर २०२० - वार - शनिवार "गुरुजी दे दो ऐसा ज्ञान कि मैं बन जाऊं विप्र महान" ** दोहा** गुरु... Read more

***गुरु है ज्ञान का मोती***

गुरु है ज्ञान का मोती गुरु से जीवन में ज्योति । प्रभु के नाम से पहले अर्चना जिसकी है होती ।। उन्हें हम ध्यान में लाए... Read more

!!!कवि ह्रदय और करुणा !!!

करुणा मुझे रुलाती दे दे कर ताने । लाख मनाया मन को पागल फिर भी ना माने ।। आभास हुआ अतीत का मिली करुणा । वर्तमान को देख सा... Read more

**ग्राम्य दर्शन खो गया मन **

भीड़भाड़ और भागम भाग से मन मेरा अकुलाया । नगरो महानगरों से निकल मै गांव चला आया। हवा शुद्ध थी आज मिली दिल की खिल गई... Read more

***चल मुसाफिर चलना ! ***

जीवन का यह मेला राही तू ना अकेला । कौन नहीं इस जग में जिसने नहीं है संकट झेला । चल मुसाफिर चलना मंजिल मिले ना वरना। तुझ में... Read more

मुक्तक -- करूं क्यों फ़िक्र !!!

करूं क्यों फिक्र मै कल की आज जब साथ है तेरा । भरोसा क्या जिंदगी का ना तेरा है ना कुछ मेर... Read more

**प्यार की शुरुवात हुई **

नजरें चार हुई अनेकों बार हुई जागा जुजुनें इश्क प्यार की शुरुवात हुई ना उन्हें चैन ना हमें सुकून भूख प्यास नींद उड़ी जिस दिन... Read more

**लिखता हूं मैं रोज कविता **

लिखता हूं मैं रोज कविता बिन इसके मैं कहां हूं जीता आखर जोड़ शब्द बनाता यही है मेरी बहती सरिता लिखता हूं मैं रोज कविता यहां... Read more

**प्रीत का मोती **

तेरी धड़कन की गलियों में दिल मेरा चला आया । बंदिशें थी बहुत लेकिन जमाना छोड़ मै आया । पनाह दे... Read more

तोड़ दो --छोड़ दो प्रथा पुरानी तोड़ दो !

युग नया अब आया बंदे कुरुतियों के खेल है गंदे बचपन जिसमें मर सा जाए ऐसी प्रथाएं छोड़ दो । छोड़ दो छोड़ दो प्रथा पुरानी तोड़ दो... Read more

पितृ --- !!!!! हमारे !!!!! आज !!!! पधारे !

नक्षत्रों से उतर आए हैं पूर्वज पितृ हमारे वरदान इन्हीं से मिलता रहे हमें जीवन में सांझ सकारे पथ इनका हम तो संवारे यही तो है... Read more

*******मैं राही हूं*******

(१)मैं राही हूं मैं राही हूं चलना ही काम है मेरा मिलेगा क्या मुझे चलकर सोचना काम नहीं मेरा सृजन के रास्ते जाऊं न बाधाओं से घब... Read more

***प्रकृति कितनी हसीन थी *** ! ***

जंगल था जमीन थी प्रकृति कितनी हसीन थी । वो झरनों का झरना निर्मल नदियों का बहना घांट ही घांट - पगडंडियों की बाट ... Read more

* ! * मंच की तलाश थी * ! *

मंच की तलाश थी ह्रदय में एक ही प्यास थी विचार फैलाऊ मै भी अपने हो पूरे मेरे भी सपने दिन प्रतिदिन यही तो आस थी मंच की तलाश ... Read more

" हूं मैं कवि! रवि छू आया "

हूं मैं कवि रवि छु आया । आकाश पाताल हरलोक घुम आया हकीकत की जमीन पर जब उतरा खुद को धरातल पर ही पाया ।। हूं मैं कवि रवि छु आया।... Read more

(कोरोना)*** संकट अब भी जारी है !

माह पर माह बीते संकट अब भी जारी है , कोरोना विचित्र महामारी है । सारा जहां अपनी-अपनी कर रहा तैयारी है । कहीं लाक डाऊन तो कहीं अन... Read more

****वह है****

सांसारिक गतिविधियां चलती रहती है किसके इशारे पर ? मनुष्य सोचता है मैं कर रहा हूं अथवा मेरे द्वारा हो रहा है। यह मनुष्य की ऐसी ... Read more

***समग्र चिंतन ***

(१)"अच्छा- बुरा" एक नजरिया है जो देखने समझने वाले पर निर्भर करता है। जो किसी के लिए अच्छा है, वही दूसरे के लिए बुरा। ... Read more

बेटियां -------- बेटो सा ही मान लो !

बेटों से कम नहीं बेटियां, बात यारों यह जान लो । करो ना इन पर जुल्म कभी तुम अपने मन में ठान लो । (१) इतिहास के पन्ने पलट के... Read more

**** गुजरते लम्हें ****

विषमता का झोंका तूफा में बदला पल कहां ठहरते हैं जिंदगी के वह लम्हे भी गुजर गए शीतल पवन की छांव ने हमें सहेजा वादा करने व... Read more

मुक्तक । जीना तो था

(१) हम जमाने में रहकर इसका जाए का ले रहे हैं। कभी कड़वा कभी मीठा रस पी रहे हैं जीना तो दोनों ... Read more