प्रबन्धक:
शाश्वत एकेडमी, सूची, रायबरेली।

अध्यक्ष:
शाश्वत अनुराग ट्रस्ट।

अन्य व्यावसायिक उपक्रम:
शाश्वत एंटरप्राइजेज, लखनऊ।

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नीतिपरक दोहे

117 /नीतिपरक दोहे/ अकिंचन को मिलता कोई, जब अनमोल रतन। रखता उसे सम्भालकर, करके लाख जतन।। कामी को काया मिले, उसका... Read more

रंगरेज कन्हैया लाल

115 / रंगरेज कन्हैया/ रज रज रमे रमेश हैं, रंगे राधिका रंग। श्याम वर्ण के श्यामजी, राधा गोरे अंग। होली के बहुरंग में, खिल... Read more

दोहे

/ दोहे/ जीवन के दिन चार हैं, लगा दियो उपकार। सबसे बढ़ कर धर्म है, परमारथ लो जान।। सुख की घड़ियाँ हैं अभी, काहे होत अधीर। चक्र समय ... Read more

हिन्दी दिवस विशेष(दोहे)

जब हम करते बात हैं, हिंदी में सरकार। जाने बहुजन समझते, बात करे साकार।। निज भाषा का ज्ञान तो, है आवश्यक जान। बिन भाषा के यूँ फिर... Read more

दोहा

हरि दर्शन से क्षीण हो, कलुषित बुध्दि पाप। देखन को पूजा करे, मन ना हो निष्पाप।। बिन भरोस नहिं प्रेम हो, जन्म लिए बहुताय। प्रेम ... Read more

दोहे

कृपा हो करुणाकर की, सधै काम अति शीघ्र। बाकी चाहे मर मिटो, दौड़ करो अति तीव्र।। कमला कमलाकांत बिन रहती बड़ी उद्विग्न। जब तक दोऊ सं... Read more

किसान

"किसान" सावन वर्षा देख कर, हर्षित हुआ किसान। पानी की उपलब्धता, अब बढ़िया होगा धान।। उचित मूल्य की बात है, सबकी एक हो राय। केन्द्र... Read more

चौपाइयां

चौपाइयां जय रघुवीर तुम्हारी शरणा। करउँ दण्डवत तुम्हारी चरना।। जो मन मैल बसी रघुराई। काटहुं नागपास सम आई।। हृदय मोह मद भरा विश... Read more